समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह अपने हालिया ट्वीट और वीडियो को लेकर चर्चा में हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर अमिताभ बच्चन और उनके परिवार को लेकर की गई अपनी टिप्पणियों पर पछतावा जाहिर किया है. अमर सिंह ने खुद कहा कि वह अभी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं. साथ ही अमर सिंह ये कहते हुए भावुक होते दिखे कि पिछले 10 साल में उनके अमिताभ के साथ रिश्ते कैसे भी रहे हों लेकिन अमिताभ कभी भी उनके पिता की पुण्यतिथि पर उन्हें मैसेज करना नहीं भूले हैं.
अमर सिंह ने वीडियो में पश्चाताप करते हुए कहा कि उन्होंने बीते वक्त में कई बार ये कोशिश की है कि अमिताभ के दिल में उनके प्रति नफरत की भावना पैदा हो. हालांकि ऐसा नहीं हुआ. चलिए आपको बताते हैं कि अमिताभ और अमर सिंह की दोस्ती कैसे हुई और क्या वजह थी जो दोस्ती टूट गई.
बात 90 के दशक की है जब अमिताभ बच्चन अपने करियर के बुरे दौर में थे. उनकी कंपनी ABCL दिवालिया हो चुकी थी और तब अमर सिंह उनकी जिंदगी में जैसे देवदूत बनकर आ गए.
अमिताभ के बारे में अमर सिंह खुद ये बात कह चुके हैं कि जब बड़े कॉर्पोरेट घरानों ने भी अमिताभ की मदद करने से इनकार कर दिया था तब उस वक्त उन्होंने अमिताभ को डूबने से बचाया था.
अब सवाल उठता है कि एक दिग्गज नेता और राजनेता की दोस्ती कैसे हुई? तो बता दें कि सहारा ग्रुप के मालिक सुब्रत राय से अमर सिंह ने अमिताभ बच्चन की दोस्ती कराई थी.
कहा जा सकता है कि अमिताभ की शौहरत ने सहाराश्री की मदद की. कॉर्पोरेट डीलर से दिग्गज नेता बने अमर सिंह ने अमिताभ और सहाराश्री के कद को भुनाया.
दोनों के रिश्ते बिगड़ने उस वक्त शुरू हुए जब 2010 में समाजवादी पार्टी के साथ बगावत में बच्चन परिवार अमर सिंह के साथ खड़ा नहीं हुआ.
अमर को उम्मीद थी कि उनके साथ जया बच्चन भी समाजवादी पार्टी छोड़ेंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ और उल्टा जया ने अमर को निशाने पर ले लिया. लिहाजा अमिताभ-जया इसके बाद अक्सर अमर के निशाने पर रहने लगे.