इजराइल-ईरान तनाव की वजह से बैन हुई 5 साल की बच्ची पर बनीं फ‍िल्म? ज‍िस पर चलीं 335 गोल‍ि‍यां!

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच ऑस्कर-नॉमिनेटेड फिल्म ‘The Voice of Hind Rajab’ पर भारत में रोक लगा दी गई है. जानिए फिल्म की कहानी, बैन की असली वजह, और क्यों कूटनीतिक संतुलन बना बड़ी चुनौती.

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द वॉइस ऑफ हिंद रजब भारत में बैन क्यों? (Photo: AFP) द वॉइस ऑफ हिंद रजब भारत में बैन क्यों? (Photo: AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:40 PM IST

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और ईरान-इजरायल विवाद का असर अब भारत की फिल्मों पर भी दिखने लगा है. एक ओर पाकिस्तान के सेटअप में बेस्ड इंडियन स्पाई फिल्म धुरंधर 2 जहां कमाई के झंडे गाड़ रही है, वहीं भारत में ‘द वॉइस ऑफ हिंद रजब’ फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी गई है. पहले आई खबर में भी बताया गया था कि सेंसर बोर्ड (CBFC) ने इस ऑस्कर-नॉमिनेटेड फिल्म को मंजूरी नहीं दी, और अब नई जानकारी से इसकी वजहें और साफ हो गई हैं.

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क्यों रोकी गई फिल्म?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, CBFC को लगा कि इस फिल्म का कंटेंट काफी संवेदनशील है और इससे भारत-इजरायल के रिश्तों पर असर पड़ सकता है. फिल्म में गाजा में इजरायली कार्रवाई को दिखाया गया है. कहानी एक फिलिस्तीनी बच्ची की मौत पर आधारित है. मौजूदा समय में मिडिल ईस्ट (ईरान-इजरायल) तनाव चल रहा है. इसी वजह से सेंसर बोर्ड ने माना कि फिल्म रिलीज होने से भारत की 'डिप्लोमैटिक बैलेंसिंग' प्रभावित हो सकती है.

फिल्म के भारतीय डिस्ट्रीब्यूटर मनोज नंदवाना ने बताया कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के एक सदस्य ने कहा कि इस फिल्म की रिलीज 'भारत और इजरायल के रिश्तों को प्रभावित कर सकती है.'

नंदवाना ने कहा- जब हमने फिल्म बोर्ड को दिखाई, तभी मुझे समझ आ गया था कि इसे भारत में रिलीज की मंजूरी नहीं मिलेगी. हालांकि मुझे आधिकारिक तौर पर इसकी कोई सूचना नहीं दी गई है. उन्होंने सवाल उठाया कि- ये फिल्म दुनिया भर में रिलीज हो चुकी है, यहां तक कि इजरायल में भी. फिर भारत में इसे संवेदनशील क्यों माना जा रहा है? ये अजीब है.

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हालांकि, उन्होंने ये भी बताया कि इस फिल्म को पिछले साल नवंबर में कोलकाता के एक इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया था.

रिपोर्ट्स की मानें तो, भारत इस समय मिडिल ईस्ट में संतुलन बनाकर चल रहा है- इजरायल के साथ मजबूत रिश्ते (डिफेंस, टेक्नोलॉजी), फिलिस्तीन के समर्थन की पुरानी नीति, ईरान-इजरायल टकराव में न्यूट्रल रुख. ऐसे में इस तरह की फिल्म, जो एक पक्ष की पीड़ा को जोरदार तरीके से दिखाती है, सरकार के लिए संवेदनशील मानी जा रही है.

फिल्म की कहानी क्या है?

फिल्म की कहानी 5 साल की बच्ची हिंद रजब हमादा की है. 2024 में गाजा में जंग के दौरान उसकी मौत हो गई, जिस कार में वो थी, उस पर 335 गोलियां चली थीं.

फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे रेड क्रिसेंट टीम उसे बचाने की कोशिश करती है. उसकी 15 साल की कजिन भी इस हमले में फंस जाती है. ये कहानी बेहद इमोशनल और झकझोर देने वाली बताई जा रही है. ट्रेलर को लोग खूब पसंद कर रहे हैं. जंग के हालातों के बीच बच्ची की मदद की गुहार हर किसी को झकझोर दे रही है.

ये एक डॉक्यूड्रामा है, इसलिए इसमें बड़े कमर्शियल स्टार्स नहीं हैं. बावजुद इसके अपनी कहानी के दम पर ये लोगों का ध्यान खींचने में कामयाब रही है. फिल्म को ट्यूनीशियाई डायरेक्टर कौथर बेन हानिया ने बनाया है. फिल्म को दुनिया भर में सराहना मिल चुकी है. फिल्म को ऑस्कर 2026 में नॉमिनेशन मिला, वेनिस फिल्म फेस्टिवल में ग्रैंड ज्यूरी प्राइज जीता, प्रीमियर पर 20 मिनट का स्टैंडिंग ओवेशन मिला है. ये भारत के अलावा अमेरिका, यूके, फ्रांस, इटली जैसे देशों में रिलीज हो चुकी है. दिलचस्प बात ये है कि इजरायल में भी पहले बैन लगा, लेकिन बाद में कोर्ट ने उसे हटा दिया.

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द वॉइस ऑफ हिंद रजब के डायरेक्टर ने भारत के फैसले पर सवाल उठाए हैं. वहीं विपक्षी नेताओं ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी से जोड़ा है. सोशल मीडिया पर भी फिल्म को लेकर बहस तेज हो गई है. 

 

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