Sherni Review: जंगल, राजनीति और शेरनी की तलाश, रोमांच की कमी लेकिन बड़ी सीख देती है फिल्म

विद्या बालन की फिल्म शेरनी अमेजन प्राइम पर रिलीज हो चुकी है. यह कहानी एक वन विभाग की अफसर की है, जो एक शेरनी को बचाने में लगी है. हालांकि उसके रास्ते में गांव के लोग, सरकारी महकमें और लोकल राजनेता संग अन्य परेशानियां खड़ी हैं. कैसी है फिल्म शेरनी और क्या आपको इसे देखना चाहिए? जानिए हमारे रिव्यू में.

Advertisement
विद्या बालन विद्या बालन

पल्लवी

  • नई दिल्ली,
  • 18 जून 2021,
  • अपडेटेड 10:54 AM IST
फिल्म:शेरनी
3/5
  • कलाकार : विद्या बालन, बृजेन्द्र काला, विजय राज, नीरज कबी, शरत सक्सेना
  • निर्देशक :अमित मासुरकर
  • विद्या बालन की फिल्म शेरनी अमेजन प्राइम पर हुई रिलीज.
  • वन विभाग अधिकारी की भूमिका निभा रही हैं विद्या.
  • हमारे रिव्यू में जानिए क्या है फिल्म में खास और क्यों इसे देखें.

हम सभी से शायद बचपन से ही इस बात को सीखा है कि जानवर हमारे दोस्त हैं. उनमें भी जान है और उन्हें भी हमारी तरह दर्द होता है. पहले हाथी मेरे साथी जैसी फिल्मों में हमने इंसान और जानवरों की दोस्ती को देखा है. लेकिन विद्या बालन की फिल्म शेरनी कुछ अलग है और हमें गहराई से सीख देती है. यह कहानी है विद्या विन्सेंट (विद्या बालन) की जो वन विभाग की प्रमुख हैं, जो जंगल में घूम रही, इंसान और जानवरों को मारती शेरनी को सही-सलामत पकड़ना चाहती है. लेकिन उसके रास्ते में रोड़े बहुत हैं. 

Advertisement

विद्या का बॉस बंसल (बृजेन्द्र काला) अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहा है और शेरनी को मारने के लिए एक प्राइवेट शिकारी पिंटू भैया (शरत सक्सेना) को ले आता है. साथ ही लोकल राजनेता चुनाव के लिए जंगल और शेरनी को मुद्दा बनाकर राजनीति करने में लगे हैं. ऐसे में विद्या के सामने कई मुश्किलें हैं. अब वो शेरनी को पकड़ पाएगी या पिंटू भैया बीच में आएंगे या फिर चुनाव में खड़े नेताओं का बवाल उसका काम बिगाड़ेगा यही फिल्म में देखने वाली बात है. 

विद्या बालन को जंगलों से लगता था डर, शेरनी की शूटिंग के दौरान ऐसे पाया काबू

डायरेक्टर अमित ने किया कमाल

डायरेक्टर अमित मासुरकर इससे पहले फिल्म न्यूटन को बना चुके हैं. उस फिल्म में भी उन्होंने सादगी और असलियत को दिखाया था और इस फिल्म में भी वह असली फॉरेस्ट डिपार्टमेंट और उससे जुड़ी चीजों को लेकर आए हैं. आस्था टीकू ने इस कहानी को लिखा है. उनका लिखा स्क्रीनप्ले इस बात पर कटाक्ष करता है कि कैसे सरकारी महकमों और लोकल राजनेताओं अपनी सोच के हिसाब से जनता का भला करने की कोशिश कर रहे हैं. उनके तरीके जरूर अलग हैं, लेकिन उनके इरादे काले नहीं हैं. 

Advertisement

फिल्म का स्क्रीनप्ले ही इसे देखने लायक बनाता है. शेरनी की तलाश में विद्या विन्सेंट चप्पा-चप्पा छानने में लगी हैं, सरकार शेरोनी को बचाना चाहती है. गांव वाले जंगल का इस्तेमाल अपने जानवरों को चराने के लिए करना चाहते हैं. तो वहीं खुद जानवर ऐसी जगह पर रहना चाहते हैं जहां उनकी जान को खतरा न हो. यह फिल्म दिखाती है कि कैसे नैतिक भ्रष्टाचार का असर एक इंसान से दूसरे और फिर बड़े निर्णयों पर पड़ता है. 

विद्या बालन का काम कमाल

इस फिल्म में विद्या बालन के साथ बृजेन्द्र काला, विजय राज, नीरज कबी, शरत सक्सेना संग कई बढ़िया एक्टर्स ने काम किया है. फिल्म की सपोर्टिंग कास्ट भी अच्छी है. यह सभी एक्टर्स मिलकर इस फिल्म को 'असली' बनाते हैं. सभी ने अपने ग्लैमरस अंदाज को छोड़ किरदारों को बेहतरीन तरह से निभाया है. फिल्म में कई फनी और गहरी मीनिंग वाले सीन्स हैं, जो आपको याद रहेंगे. विद्या बालन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह दर्शकों के लिए लीक से हटकर कहानियां लाती रहेंगी. 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »