Jogi Review: 1984 के दंगों में फंसे 'जोगी' की दर्दनाक कहानी कर देगी इमोशनल, दिलजीत दोसांझ छाए

फिल्म की कहानी जोगिंदर सिंह उर्फ जोगी नाम के शख्स पर आधारित है. दिलजीत दोसांझ ने इस फिल्म में अपने करियर का सबसे बेस्ट काम किया है. जोगी की मजबूरी, बेबसी और दर्द को दिलजीत उभारकर बाहर लाते हैं, जो आपके ऊपर बड़ी छाप छोड़ता है. डायरेक्टर अली अब्बास जफर की इस फिल्म में इमोशंस के साथ एक्शन भी भरपूर है.

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दिलजीत दोसांझ दिलजीत दोसांझ

पल्लवी

  • नई दिल्ली,
  • 17 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 3:53 PM IST
फिल्म: जोगी
3/5
  • कलाकार : दिलजीत दोसांझ, मोहम्मद जीशान अयूब, कुमुद मिश्रा, अमायरा दस्तूर, हितेन तेजवानी
  • निर्देशक : अली अब्बास जफर

'हमारी तो आदत है उखड़कर फिर से खड़े हो जाना' दिलजीत दोसांझ की फिल्म में जब जोगी के पिता यह शब्द बोलते हैं, तो अंदर तक चोट लगती है. दिलजीत की फिल्म 'जोगी' नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गई है. फिल्म की कहानी 1984 में हुए एंटी सिख दंगों पर आधारित है. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निधन के बाद दिल्ली में शुरू हुए इन दंगो के बारे में हम सभी जानते हैं. लेकिन फिर भी डायरेक्टर अली अब्बास जफर की यह फिल्म हमें कई दर्दनाक पलों से रूबरू करवाकर सोचने पर मजबूर करती है. 

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1984 के दंगों पर आधारित है फिल्म

फिल्म की कहानी जोगिंदर सिंह उर्फ जोगी नाम के शख्स पर आधारित है. कहानी की शुरुआत 31 अक्टूबर 1984 को, उस समय देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या से शुरू होती है. इसके बाद दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाकों में दंगे होते दिखते हैं. दंगों के बीच जोगी और उसके पिता अनजाने में बस में चढ़ते हैं, जिसके बाद उन्हें लोगों के गुस्से का शिकार होना पड़ता है. मुश्किलों में फंसा जोगी लोगों से एक ही बात पूछता है- 'हमारी क्या गलती है?' जोगी की ये बात आपको चुभती जरूर है. इन मुश्किलों और मौत के मंजर के बीच जोगी अपने परिवार के साथ-साथ दूसरों को भी बचाने का फैसला करता है. 

जोगी में दिलजीत दोसांझ

दिलजीत दोसांझ की दमदार परफॉरमेंस

दिलजीत दोसांझ ने इस फिल्म में अपने करियर का सबसे बेस्ट काम किया है. जोगी की मजबूरी, बेबसी और दर्द को दिलजीत उभारकर बाहर लाते हैं, जो आपके ऊपर बड़ी छाप छोड़ता है. फिल्म का काफी हिस्सा दिलजीत बहुत आराम से अपने कंधों पर लेकर चलते हैं. फिल्म में उनका साथ मोहम्मद जीशान अयूब, नीलू कोहली और परेश पाहुजा ने दिया है. तीनों ने अपने किरदारों में जान डाल दी है. जीशान, जोगी के वो दोस्त बने हैं, जो सियासत के भड़काए मौत के खेल में अपने सीनियर से लड़कर लोगों के सामने मदद का हाथ बढ़ाते हैं.

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कुमुद मिश्रा ने किया कमाल

लेकिन एक एक्टर जिसने और कमाल किया है, वो हैं कुमुद मिश्रा. कुमुद ने फिल्म में त्रिलोकपुरी के काउंसलर तेजपाल अरोड़ा का किरदार निभाया है. तेजपाल ऐसा इंसान है, जिसे लोगों की जिंदगी से ज्यादा प्यारी, अपनी एमपी की टिकट है. कुमुद मिश्रा ने इस किरदार को इतने बढ़िया तरीके से निभाया है, जिसे देखकर आपको उनसे नफरत होने लगती है. फिल्म में हितेन तेजवानी भी पुलिसवाले के बढ़िया रोल में नजर आए हैं. हितेन का काम उन्हें फिल्म के बाकी एक्टर्स से इतर खड़ा करता है.

जोगी में कुमुद मिश्रा

एक्ट्रेस अमायरा दस्तूर ने जोगी की प्रेमिका का रोल निभाया है. दिलजीत संग अमायरा का रोमांस काफी क्यूट था. डायरेक्टर अली अब्बास जफर अपनी फिल्म की शुरुआत में ही कई दिल दहलाने वाले सीन आपके सामने रखते हैं. जलती हुई डीटीसी की बसें, खून से लथपथ और जिंदा जलते लोग, और उनके पीछे भागते दंगाई... ये सब दिल झिंझोड़ देने वाला लगता है.

अली अब्बास जफर, जोगी के साथ असली किरदारों को सामने लेकर आए हैं. यहां कोई हीरो नहीं है. कोई विलेन धर्म का दीवाना नहीं है. बल्कि राजनीति में जगह बनाने के लिए मौके का फायदा उठाने लगा है. फिल्म में इमोशंस के साथ-साथ एक्शन और थ्रिल भी भरपूर है. हालांकि इसमें कुछ कमियां भी हैं. सेकंड हाफ में कहानी में थोड़ी डल लगती है. लेकिन कुल मिलाकर आपको यह फिल्म अपने साथ बांधे रखती है.

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