जी हां! आपने एकदम सही हेडलाइन पढ़ी है. मैं तब सिर्फ 2 साल का ही था जब सलमान खान सिल्वर स्क्रीन पर राधे भैया बनकर आए थे. उनके उस हेयरस्टाइल का जो नशा लोगों के सिर पर सवार था, वो मैंने फर्स्ट हैंड तो फील नहीं किया था. मगर हां अपने आसपास मौजूद लोगों से सलमान के आइकॉनिक 'तेरे नाम' वाले हेयरस्टाइल की कहानी खूब सुन चुका हूं. मैंने आज से पहले ये फिल्म कभी नहीं देखी क्योंकि मेरी आंखों के सामने सलमान की दूसरी फिल्मों का पर्दा पड़ा हुआ था.
वही ट्यूबलाइट-राधे-सिकंदर टाइप चीजें जिन्हें देखकर हम लोग अब निराश-हताश हो जाते हैं. हाल ही में जब 'तेरे नाम' को दोबारा थिएटर्स में लाया गया, तब मैंने सोचा कि क्यों ना इसे एक्सपीरियंस किया जाए. सच कहूं, तो इस फिल्म के किस्से-कहानियां मैं रील्स और इंस्टा पोस्ट के जरिए सुन चुका था. आखिरकार जेन-जी हूं, सोशल मीडिया ही हमारी दुनिया है. लेकिन अपने सामने बड़े पर्दे पर चलती हुई सलमान खान की 23 साल पुरानी फिल्म 'तेरे नाम' मुझे कैसी लगी, आइए आपको बताता हूं.
'तेरे नाम' का जेन-जी रिव्यू
थिएटर्स में अब तक हमने कई लव-स्टोरीज की बरसात झेली है— सैयारा, आशिकी 2, लैला-मजनू, सनम तेरी कसम. इन फिल्मों की कहानी का जादू फैंस के सिर कितना चढ़ा था, ये बताने की जरूरत मुझे शायद ही हो. थिएटर्स में लोग इन फिल्मों को देखकर रोए, चीखे-चिल्लाए और बेहोश तक हुए हैं. क्या ऐसा कुछ 'तेरे नाम' के दौरान भी हुआ होगा? ये मुझे नहीं पता. मैं फिल्म सिर्फ उस इरादे से देखने गया कि क्या ये मुझे पसंद आएगी या नहीं. और सच कहूं तो ये फिल्म मेरे दिल को छू गई.
'तेरे नाम' एक ऐसी ट्रैजिक लव स्टोरी है, जिसने मेरे दिल और दिमाग दोनों को कमजोर सा कर दिया. फिल्म ने मुझे शुरू से लेकर अंत तक सीट से बांधे रखा. आमतौर पर लव स्टोरीज में एक समय ऐसा आता है, जब आपका ध्यान थोड़ा इधर-उधर भटकने लगता है. मगर 'तेरे नाम' में मुझे ये दिक्कत नहीं लगी. इसकी सबसे बड़ी जान इसके गाने हैं. फिल्म के सभी गाने अपने आप में आइकॉनिक थे, जिसे कई दफा सुना जा चुका है. लेकिन फिल्म की कहानी के साथ-साथ इन्हें सुनने/देखने का जो मजा था, उसका कोई सब्सटिट्यूट नहीं है.
सलमान खान ने जीता दिल
सोशल मीडिया ये बता चुका है कि 'तेरे नाम' तमिल फिल्म 'सेतू' का रीमेक है. लेकिन इसके हिंदी वर्जन में जो काम सलमान खान ने किया है, वो वाकई काबिल-ए-तारीफ है. जिन सलमान खान को हम आज फिल्मों में काम करता हुए देखते हैं, उनकी और 'तेरे नाम' वाले सलमान की कोई तुलना नहीं हो सकती. सबसे पहले तो अपने आइकॉनिक हेयरस्टाइल में सलमान का स्टाइल-स्वैग, जिसे उन्होंने अपने साथ अंत तक कैरी किया और मेरे लिए यादगार बन गया. पूरी फिल्म के दौरान सलमान की मेहनत साफ झलकी. फिर चाहे वो फर्स्ट हाफ में गुंडा-बदमाश राधे मोहन हो या सेकंड हाफ वाला पागल-बेसुध राधे मोहन.
सलमान ने पूरी कोशिश की कि हम फिल्म में उनके इमोशन्स को उसी दर्द के साथ महसूस कर पाएं, जो स्क्रिप्ट के पन्नों पर लिखे गए थे. जब-जब सलमान स्क्रीन पर रोए या चिल्लाए, उससे मेरा भी दिल भर आया. सलमान खान ने यूं तो कई फिल्मों में बेहतरीन एक्टिंग की है, मगर शायद ही उनकी कोई परफॉर्मेंस 'तेरे नाम' से बेहतर हो. कम से कम मुझ जेन-जी के सामने तो उनका कोई खास यादगार काम नहीं मौजूद है. इस फिल्म ने मुझे दोबारा ये भरोसा दिलाया है कि सलमान खान बड़े पर्दे पर राज करने के लिए जन्मे हैं.
आज के दौर में कितनी सही 'तेरे नाम' जैसी फिल्म?
फिल्म की कहानी वैसे तो जग-जाहिर है कि कैसे निर्जरा (भूमिका चावला) के लिए राधे मोहन का प्यार पूरी तरह मुकम्मल नहीं हो पाता. निर्जरा के दीवानेपन में राधे पागल हो जाता है और अपनी पूरी जिंदगी उसी की याद में गुजार देता है. इस कहानी की ट्रैजेडी और इंटेन्सिटी स्क्रीन से उतार कर आपके दिल में घर करने लगती है. लेकिन सलमान का किरदार अगर आज लिखा जाता, तो पक्का उसपर काफी बवाल मचता.
क्योंकि राधे मोहन फिल्म में काफी टॉक्सिक है और आजकल टॉक्सिक मैस्कुलिनिटी पर कितना बवाल मचता है, ये तो हम 'एनिमल' फिल्म में देख चुके हैं. हालांकि 'तेरे नाम' देखने के बाद, शायद कुछ लोगों को 'एनिमल' में रणबीर कपूर का किरदार ज्यादा सुधरा हुआ लगे. क्योंकि उसके एक्शन्स कम से कम क्लियर तो थे! लेकिन राधे मोहन कब, किस वक्त क्या कर जाए ये कोई नहीं जानता था. वो एक गुंडा था, जो कभी भी किसी को भी मार सकता था. राधे भैया जैसा किरदार आज अगर पर्दे पर दिखाई दे, तो उसे शायद हर कोई बर्दाश्त ना कर सके. मगर उसकी कहानी में जो इमोशन और दर्द है, वो जरूर लोगों पर असर करेगी.
'सैयारा', 'लैला-मजनू', 'सनम तेरी कसम' जैसी फिल्मों को देखकर आंसुओं के समंदर बहाने वालों का 'तेरे नाम' देखकर क्या हश्र होगा, ये सोचकर ही आत्मा कांप जाती है. ये फिल्म अपनी कहानी और ट्विस्ट से आपको 'शॉक' करने का दम रखती है. मुझे यकीन है कि 'तेरे नाम' देखकर दिल टूटे आशिकों को अपनी माशूकाएं बड़ी जोर से याद आ सकती हैं. लेकिन कोई बात नहीं ब्रदर, लॉर्ड सलमान ने फिल्म में कहा है— 'हर किसी को वफा के बदले वफा नहीं मिलती!'
पर्व जैन