राज कपूर के 'सपनों की कैद' से आजाद ऋष‍ि, कैसे बने कपूर खानदान के अगले सुपरस्टार

रणबीर कपूर पर ऋषि कपूर की सख्ती को अक्सर गलत समझा गया, लेकिन इसकी जड़ें कपूर खानदान की पुरानी परंपरा में हैं. राज कपूर ने जैसे ऋषि को अपनी सिनेमाई कल्पनाओं का हिस्सा बनाया, वही नजरिया आगे बढ़ा. इस कहानी में सिर्फ एक पिता-पुत्र का रिश्ता नहीं, बल्कि बॉलीवुड की सबसे बड़ी विरासत का दबाव भी छिपा है.

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पिता की परछाईं से निकलकर सुपरस्टार बने थे ऋषि कपूर! (Photo: Instagram/@umeshyaadav) पिता की परछाईं से निकलकर सुपरस्टार बने थे ऋषि कपूर! (Photo: Instagram/@umeshyaadav)

सुबोध मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 30 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:10 AM IST

रणबीर कपूर ने कई बार बताया है कि अपने पिता, ऋषि कपूर से उनकी बातचीत बहुत फॉर्मल थी. बचपन से ही वो ऋषि से बहुत डरते थे. ऋषि कपूर ने भी अपनी किताब 'खुल्लम खुल्ला' में लिखा कि उनका बस चलता तो वो रणबीर को कभी रॉकेट सिंह, बर्फी या बॉम्बे वेल्विट जैसी फिल्में करने ही नहीं देते. एक बार तो ऋषि, अनुराग बसु और अनुराग कश्यप पर बरस पड़े थे कि उनकी फिल्मों ने रणबीर के टैलेंट के साथ न्याय नहीं किया.

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तब भी और आज भी कई बार बॉलीवुड फैन्स ऋषि कपूर को उनके इस बर्ताव के लिए जज करते हैं. खुद सुपरस्टार रह चुके एक पिता का, सार्वजनिक रूप से अपने उस बेटे की फिल्मों के बारे में नेगेटिव बातें करना, जिसे बॉलीवुड का अगला सुपरस्टार माना जा रहा हो! मगर अपने बेटे के करियर की नियति तय करने की इतनी प्रबल इच्छा रखना कपूर परिवार के लिए कोई नई बात नहीं थी. ऋषि शायद रणबीर को उसी चश्मे से देख रहे थे, जिससे उनके पिता राज कपूर ने उन्हें देखा था— कपूर परिवार की शानदार एक्टिंग विरासत.

जब राज कपूर की कल्पनाओं का चेहरा बने ऋषि कपूर
फिल्मी विरासत वाले कई दूसरे एक्टर्स की तरह, ऋषि कपूर अपने शौक से एक्टिंग के मैदान में नहीं उतरे थे. उनकी मां तो कभी चाहती ही नहीं थीं कि ऋषि या उनके बाकी बच्चे बड़े पर्दे के मायावी संसार का हिस्सा बनें.

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ऋषि का अपना बस चलता तो वो एक्टिंग डेब्यू के बाद भी लंदन के किसी टॉप कॉलेज में पढ़ने चले गए होते. जैसे बाद में उनकी बेटी ऋद्धिमा कपूर गईं. लेकिन ऋषि को एक्टिंग में खींच कर लाया गया था और खींचने वाले थे खुद उनके पिता राज कपूर. इंडियन सिनेमा के सबसे बड़े 'शोमैन' राज कपूर ने अपना जीवन ही सिनेमा के नाम कर दिया था. हिंदी सिनेमा के शुरुआती स्टार्स में से एक पृथ्वीराज कपूर के बेटे राज, कपूर परिवार की सिनेमाई विरासत को हमेशा हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के शिखर पर देखना चाहते थे. वो ऐसी कहानियां पर्दे पर उतारना चाहते थे जो बेजोड़ हों.

इन कहानियों की कल्पना करते हुए वो 45 की उम्र में टीनेजर भी हो सकते थे, कॉलेज जाने वाला लड़का भी. मगर एक अधेड़ व्यक्ति बड़े पर्दे पर इन कल्पनाओं का चेहरा खुद तो नहीं हो सकता न! उनका सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट मेरा नाम जोकर (1970) एक ऐसी ही कहानी थी. इसके लिए राज साहब को जरूरत लगी एक ऐसे टीनेज एक्टर की जिसमें लोगों को उनकी इमेज भी दिखे. वो क्यूट भी दिखे और दमदार एक्टिंग भी कर सके. बॉलीवुड की 'फर्स्ट फैमिली' में जन्मे ऋषि फिल्मों और नाटकों के सेट्स पर ही बड़े हो रहे थे. पृथ्वीराज कपूर के नाटक पठान में वो खाट पर लेटा हुआ बच्चा थे.

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राज की फिल्म श्री 420 (1955) के 'प्यार हुआ इकरार हुआ' गाने में आपको जो बच्चे खेलते दिखते हैं, उनमें ऋषि कपूर भी थे. वो बचपन में ही उनकी व्हिस्की से एक घूंट भर के, शराबी आदमी की मजेदार एक्टिंग किया करते थे. राज कपूर ने जब मेरा नाम जोकर पर काम शुरू किया तो ऋषि थे भी 17 साल के, यंग राजू के रोल के लिए परफेक्ट. राज कपूर स्कूल से ही ऋषि कपूर को उठाते और शूट पर ले जाते. एक बार तो इस बात से खफा होकर ऋषि को स्कूल से रस्टिकेट भी कर दिया गया था.

द कपूर्स किताब की राइटर मधु जैन को ऋषि ने बताया था, 'पापा स्कूल आए. उन्हें सफाई देनी पड़ी कि वो मुझसे काम नहीं करवा रहे. इसलिए फिर वो मेरे साथ वीकेंड्स में शूट करते थे और छुट्टियों का इंतजार करते थे. मैंने ऑटोग्राफ देने के लिए सिग्नेचर की प्रैक्टिस शुरू कर दी थी. मैं शीशे के सामने खड़ा होकर देखता था कि मैं एक्टिंग करता हुआ कैसा लगता हूं.'

अपनी टीचर पर क्रश रखने वाले टीनेजर के रोल में, मेरा नाम जोकर से ऋषि की इमेज आज तक लोगों को याद है. अपने पहले ही एक्टिंग रोल के लिए ऋषि को बेस्ट चाइल्ड एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला. लेकिन मेरा नाम जोकर बुरी तरह फ्लॉप हो गई. राज कपूर अपनी सारी पूंजी इसमें झोंक चुके थे, उनके खजाने खाली हो गए. ऋषि कपूर समेत कपूर परिवार के कई लोगों ने इस दौर में राज साहब को झल्लाते, खीझते और बिना जरूरत गुस्सा करते देखा था. शोमैन को शॉक लगा था कि उनके फिल्ममेकिंग स्टाइल को 'पुराना-बुझा हुआ' कहा जा रहा था.

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राज कपूर की नई फैंटेसी और लवर-बॉय ऋषि की एंट्री
राज ने मेरा नाम जोकर की आलोचनाओं का जवाब दिया यंग लव स्टोरी बॉबी (1973) से. अपनी बाकी फिल्मों की तरह इसमें भी उन्होंने एक सोशलिस्ट आइडिया लगाया— एक लड़का अपने रईस बाप के स्टेटस को ठुकराकर, एक मछुआरे की बेटी के साथ प्यार में घर छोड़ देता है.

बॉबी के लिए राज ने केवल एक मंत्र इस्तेमाल किया— यंग और मॉडर्न. ऋषि को वो यंग राज कपूर बना ही चुके थे. बॉबी के लिए उन्होंने ऋषि का फैशन, लुक सब बदल डाला— वेस्टर्न कपड़े जो लगभग कॉस्ट्यूम जैसे लगते थे. बाइक, बड़े सनग्लास और ढेर सारा एक्शन, जो तब तक उनकी फिल्मों से दूर ही था. बॉबी रिलीज हुई और यूथ की डिक्शनरी बन गई. हाल ये था कि पेरेंट्स अपने बच्चों को बॉबी देखने से बचाना चाहते थे. इंडियन सिनेमा में 'लवर बॉय' ऋषि कपूर की एंट्री हो चुकी थी, जो 2000 के दशक तक मिडल एज में भी, अपनी उम्र को सूट करने वाली रोमांटिक स्टोरीज करता नजर आया.

लेकिन बॉबी या मेरा नाम जोकर में 'डायरेक्टर' राज कपूर के सेट पर ऋषि कपूर के लिए 'लव' जैसा कुछ नहीं था. द कपूर्स में ही ऋषि का बयान है, '(सेट पर) पहले दिन से ही वो राज साहब थे या राज जी. और मैं एक्टर था.' इस बारे में ऋषि की पत्नी नीतू ने बताया था, 'चिंटू (ऋषि) पापा से बहुत डरते थे. उनके सामने वो एक शब्द नहीं बोलते थे. वो बस खड़े होकर उन्हें सुनते थे.'

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बॉबी ने ऋषि कपूर को रातोंरात स्टार बना दिया था, अब वो इंडस्ट्री के तमाम फिल्ममेकर्स के साथ काम करने लगे. उन्हें लॉन्च भले पापा ने किया था, मगर उस दौर के लगभग हर बड़े फिल्ममेकर ने उन्हें फिल्मों में लेकर, उनके टैलेंट पर मुहर लगा दी थी.

जब राज कपूर के फिल्म सेट पर बेहोश हो गए ऋषि कपूर
एक दशक बाद राज कपूर को नया जुनून चढ़ा, भारतीय समाज में विधवा विवाह के असहज मुद्दे पर फिल्म बनाने का. प्रेम रोग (1982) के लिए उन्होंने फिर ऋषि को याद किया. पर ये कह पाना मुश्किल है कि किस ऋषि को— अपने बेटे को या एक्टर को. क्योंकि शशि कपूर ने बताया था, 'राज कपूर प्रेम रोग के सेट्स पर बहुत गुस्से में काम करते थे.' और राज जब किसी भी एक्टर या क्रू मेंबर से गुस्सा होते थे तो वो गुस्सा अपने करीबियों पर उतारते थे. प्रेम रोग के सेट पर एक बार ऋषि कपूर बेहोश हो गए थे.

लेकिन राज ने ऋषि को बचपन से यही ट्रेनिंग दी थी. वो पिता की डांट चुपचाप सह जाने को ही बेटे का धर्म मानते थे. इसलिए राज साहब जब अपना एक और जुनून पूरा करने निकले, तो उन्होंने फिर ऋषि को साथ लिया. प्रेम रोग के भी करीब एक दशक पहले से राज कपूर के मन में एक प्रेम कहानी आकार ले रही थी. भारत-पाकिस्तान की सरहद से बंटी एक लव स्टोरी— हिना.

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जब ऋषि ने पूरा किया राज कपूर का ड्रीम प्रोजेक्ट
जुनून इतना कि दो दशक तक राज कपूर इसलिए फिल्म टालते रहे क्योंकि उन्हें किसी एक्ट्रेस में परफेक्ट हिना नहीं दिख रही थी. इस तलाश में ही उन्हें पद्मिनी कोल्हापुरे मिली थीं, लेकिन वो हिना की कल्पना पर फिट नहीं बैठीं तो उन्हें राज ने प्रेम रोग में ले लिया था.

आखिरकार 80 के दशक के अंत में, जेबा बख्तियार में राज कपूर को अपनी हिना दिखी. फिर से उन्होंने ऋषि को अपनी ये ऑनस्क्रीन फैंटेसी पूरा करने के लिए बुलाया. लेकिन 1987 में फिल्म शुरू करने के बाद राज कपूर चल बसे. हिना का टाइटल, कहानी और शूट हो चुके दो गाने अब ऋषि कपूर के हवाले थे.

17 साल की उम्र से पिता की कल्पनाओं को डांट सुन-सुनकर भी पर्दे पर उतारते आ रहे ऋषि कपूर ने बड़े भाई रणधीर कपूर को साथ लिया, जो दो बार डायरेक्शन में हाथ आजमा चुके थे. राज कपूर ने जाते-जाते ऋषि को वो फिल्म दे गए, जिसने 90s में उनका लड़खड़ाता करियर फिर से संभाला.

पृथ्वीराज कपूर से शुरू हुई कपूर परिवार की एक्टिंग की विरासत को राज कपूर ने और विस्तार दिया था. स्टारडम के शिखर से राज कपूर के हटने के बाद थोड़े-थोड़े समय के लिए उनके दोनों भाई शम्मी कपूर और शशि कपूर ने भी स्टारडम चखा. लेकिन शम्मी के सितारे भी बहुत जल्दी धुंधलाने लगे. शशि कपूर बड़ी तेजी से उभरे लेकिन सोलो हीरो के तौर पर बहुत कामयाब नहीं हुए. 80 के दशक में वो भी स्क्रीन से गायब होते गए. शम्मी और शशि के बच्चों में से कुछ ने एक्टिंग चुनी नहीं और जिन्होंने चुनी वो ऐसा बड़ा कमाल नहीं कर पाए कि कपूर परिवार की विरासत का दावेदार कहे जा सकें. अगली पीढ़ी में, राज के बड़े बेटे रणधीर और छोटे बेटे राजीव बहुत जल्दी आए-गए हो गए.

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इन दोनों के बीच में जन्मे ऋषि ने न सिर्फ अपनी अलग पहचान बनाई, बल्कि लंबे समय तक कपूर परिवार की एक्टिंग विरासत को स्क्रीन पर बचाए रखा. ऋषि को हीरो के रोल में लेकर आई बॉबी और अमिताभ की पहली धमाकेदार हिट जंजीर एक ही साल आई थीं. लेकिन ऋषि ने अमिताभ ही नहीं, संजय दत्त, सनी देओल, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ, मिथुन और जीतेंद्र जैसे मास हीरोज के बीच भी खुद को स्क्रीन पर बचाए रखा.

उनके सामने 90s में शाहरुख, आमिर, सलमान जैसे नए हीरोज की खेप भी आई. मगर ऋषि अब भी लवर बॉय इमेज को अलग-अलग एंगल से भुनातीं कहानियों के सहारे अपनी जगह डटे रहे. करिश्मा, करीना और फाइनली रणबीर के हाथ में ये विरासत आने से पहले ऋषि ही कपूर परिवार का सबसे पॉपुलर चेहरा रहे. वो बच्चा जिसे उसके पिता ने जबरदस्ती स्क्रीन पर खींचा था, करीब तीन दशकों तक अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने वाला दमदार तुर्क साबित हुआ.

शायद इसीलिए वो अपने बेटे रणबीर को भी उसी 'टाइट' तरीके से डील करना चाहता था, जैसे उसके पिता ने उसके साथ किया. रणबीर बता चुके हैं कि वो शुरुआत में इमोशनली अपने पिता से बहुत कनेक्ट नहीं कर पाते थे. उन्होंने खुद ही अपने फैसले लिए, और अपनी कामयाबी लिखी. ऋषि शुरुआत में उनके तरीकों से बहुत खुश नहीं थे, लेकिन बाद के दिनों में उन्होंने रणबीर की सक्सेस पर बहुत खुशी जाहिर की.

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