साउथ इंडस्ट्री के पावर कपल विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की संस्कृति और रस्मों रिवाजों से भरी शादी सालों तक याद की जाएगी. इस वेडिंग ने फैशन ट्रेंड को ही बदलकर रख दिया. सालों पुराने स्टीरियोटाइप को तोड़कर नया बेंचमार्क सेट किया है. इस शाही शादी ने बताया कि सिर्फ दुल्हन ही आल्ता, जूलरी नहीं पहन सकती, बल्कि दूल्हा भी परंपरा में रमा हुआ दिख सकता है. वो भी गोल्ड की भारी भरकम जूलरी पहनकर मंडप में बैठ सकता है. शेरवानी या कोट पैंट ही नहीं, बल्कि बेयर चेस्ट होकर, धोती और अंगवस्त्रम पहनकर अपनी दुल्हन को लेने आ सकता है.
विरुष्का से विरोश तक- कैसे बदला ट्रेंड?
पिछले दस सालों में हुई इंडियन सेलिब्रिटी वेडिंग एक ही जैसी दिखी हैं. दुल्हन की साड़ी या लहंगा सब्यसाची का होगा या फिर मनीष मल्होत्रा का. दूल्हे के पास पहनने को बस शेरवानी ही ऑप्शन थी. ब्राइड शादी में पेस्टल कलर्स पहनती थीं. कम ही हीरोइनें रेड फैमिली के लंहगे में सजती संवरती थीं. ये शादियां भी खूबसूरत थीं. वो बात अलग है ये सभी वेडिंग्स एक ही वाइब देती थीं. यहां कैमरे के लिए बनाई गई मीठी केमिस्ट्री दिखती. ट्रैडिशन की झलक कम ही नजर आती थी. लेकिन रश्मिका-विजय ने शादी को नए रंगों से भरा है. इससे पहले ये काम 2017 में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने किया था. उन्होंने शादियों का लुक और गेटअप बदला था.
अदिति राव हैदरी और सिद्धार्थ की सादगी भारी टेंपल वेडिंग थोड़ी हटके थी, लेकिन ट्रेंड नहीं सेट कर पाई. विरुष्का ने हल्के रंगों का ब्राइडल ट्रेंड शुरू किया. फिर सालों तक सब उनकी नकल करते रहे. इस ट्रेंड को ब्रेक करने रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा आए. उन्होंने अपनी शादी में काफी कुछ नया किया. वो अपने रूट्स पर टिके रहे, बिना किसी को कॉपी किए. शादी की फोटो में सबसे पहले संस्कृति दिखी. साउथ इंडियन कपड़े, जूलरी, सिल्हूट और स्टाइल. रश्मिका ने अनामिका खन्ना की रस्ट सिल्क साड़ी चुनी. उनकी ये चॉइस ही पुराने ट्रेंड से उन्हें अलग दिखा गई. गोल्ड जूरी की भी चर्चा हुई. हरम (लंबा हार), बसिकम (माथे का जेवर), बड़े झुमके, जड़ा बिल्ला (चोटी का जेवर), चंपास्वरालु (कान की चेन), हाथफूल, माथापट्टी, नाक की पिन, चूड़िया, बाजूबंद, कमरबंद और पायल, वो भी सब पुराने मैट फिनिश में. उनकी शादी में दिखी हर एक चीज संस्कृति और रस्म से आई, ट्रेंड से नहीं.
पिछले दस साल की दूसरी ब्राइड्स से तुलना करें तो सबके लुक शानदार थे. लेकिन वो सब एक जैसे लगीं. राजस्थानी, पंजाबी, बंगाली या साउथ इंडियन दुल्हनें अपने स्टाइल में छाईं. लेकिन रश्मिका का लुक सबसे हटके था.
विजय ने तोड़ा ट्रेंड
विरोश की शादी का सबसे बड़ा हाईलाइट विजय का लुक था. ये बताया गया कि शादी में सिर्फ दुल्हन ही नहीं, दूल्हा भी भारी जूलरी पहन सकता है. इससे पहले सेलिब्रिटी दूल्हे लाइट कलर की शेरवानी और ना के बराबर जूलरी में दिखते थे. लेकिन विजय ने सब बदल दिया. उनका स्टाइल, जेवर और मूंछ राजसी लगे. शादी की थीम भारतीय राजघराने सी थी. जहां दूल्हे ने सोने के भारी जेवर, मोटे कंगन, पुराने मोटिफ, बिना हिचकिचाहट के कुंडल पहने थे. और सबसे हैरान करने वाला था उनका हाथ-पैर पर आल्ता लगाना. ये दिखावा नहीं, रस्म थी. शायद पहली बार फैशन की बात दुल्हन-दूल्हे में बराबर बंटी. भारत संस्कृतियों का देश है, इसका सबूत विजय-रश्मिका की हर फोटो देती है. रिसेप्शन के दिन भी रश्मिका ने सिल्क साड़ी रखी. उन्होंने मैसूर सिल्क पहना, जिसके साथ कम जेवर पहने थे. विजय को सफेद वेष्टी लुक में देखा गया.
फैशन पुलिस चाहे कपल की शादी में कितनी भी खामियां निकाल ले, जैसे जूलरी हैवी थी, ब्लाउज सिंपल था वगैरह... फिर भी ये शादी सालों तक याद रखा जाएगी. क्योंकि इसने ट्रेंड को नहीं बल्कि सच्चाई, संस्कृति को चुना. सालों के हल्के रंग, यूरोपियन जगहें, एक जैसे लहंगे देखने के बाद लोग बोर हो गए थे. उन्हें कुछ नया देखना था. रश्मिका-विजय की शादी के बाद अपने रूट्स को लेकर लोगों का गर्व बढ़ा है. हैंडलूम की बात ने जोर पकड़ा है. विराट-अनुष्का ने पेस्टल ब्राइडल का ट्रेंड शुरू किया. यहां डिजाइनर को नैरेटर के तौर पर देखा गया. लेकिन रश्मिका-विजय की शादी एक अलग एंगल दिखाती है, जहां कपल की नैरेटर के तौर पर वापसी हुई है. फर्क बारीक लेकिन जरूरी है. अभी तक लोग सवाल पूछते थे कि डिजाइनर कौन है? लेकिन अब ये पूछेंगे कि ये किस ट्रैडिशन से जुड़ा हुआ है. ये बदलाव ब्रांड से संस्कृति की तरफ शिफ्ट हुआ है.
तियाशा भोवाल