एक्टर पारस छाबड़ा ने स्प्लिट्सविला और बिग बॉस जैसे शो से अपना नाम बनाया है. पारस काफी वक्त से एक्टिंग से दूरी बनाए हुए हैं. लेकिन अब वो एक्टर से यूट्यूबर बन गए हैं. अपने चैनल पर आबड़ा का डाबड़ा शो चलाते हैं. वे प्रेमानंद महाराज और राधा-कृष्ण के भक्त हैं. उनके सेलेब्रिटी से ज्यादा धार्मिक पॉडकास्ट वायरल होते हैं. इसी कड़ी में उन्होंने अपने तिलक का जिक्र करते हुए एक कहानी सुनाई.
सोशल मीडिया पर बिग बॉस फेम पारस छाबड़ा का एक पॉडकास्ट वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे अपने माथे पर लगे एक अनोखे तिलक की रहस्यमयी कहानी साझा कर रहे हैं. पारस बताते हैं कि कैसे एक भक्त की भक्ति के आगे झुककर स्वयं किशोरी जी (राधा रानी) ने उनके तिलक को पूरा किया था.
पारस छाबड़ा ने सुनाई कहानी
पारस छाबड़ा अपने पॉडकास्ट में बताते हैं कि यह बात उस समय की है जब भारत पर मुगल बादशाह अकबर का शासन था. अकबर ने एक सख्त नियम लागू किया था कि कोई भी व्यक्ति अपने माथे पर किसी भी प्रकार का धार्मिक चिह्न या तिलक लगाकर दरबार में नहीं आएगा. जो भी इस हुक्म की नाफरमानी करेगा, उसका सिर कलम कर दिया जाएगा. उस समय राधा रानी के एक परम भक्त और संत 'बिहारिन दास जी' (जो श्री हरिदास जी के शिष्य थे) बड़ी उलझन में पड़ गए. उनके लिए तिलक केवल एक चिह्न नहीं, बल्कि उनके आराध्य का श्रृंगार था, जिसके बिना वे स्वयं को अधूरा मानते थे.
जब बिहारिन दास जी इस संकट को लेकर अत्यंत भावुक होकर अपनी आराध्य राधा रानी का ध्यान करने लगे, तो एक चमत्कार हुआ. पारस बताते हैं कि भक्त की व्याकुलता देखकर राधा रानी स्वयं प्रकट हुईं. दास जी ने अपनी व्यथा सुनाई कि यदि वे तिलक नहीं लगाएंगे तो उनका श्रृंगार अधूरा रहेगा और यदि लगाएंगे तो अकबर मृत्युदंड देगा. भक्त की अटूट आस्था देख राधा रानी ने अपने चरणों के अंगूठे से उनके माथे पर लगे तिलक को नीचे की ओर खींचकर लंबा कर दिया. उन्होंने अपने भक्त को अभय दान देते हुए कहा कि अब जाओ, देखते हैं कौन तुम्हारा सिर कलम करता है.
अगले दिन जब बिहारिन दास जी उसी लंबे तिलक के साथ अकबर के दरबार में पहुंचे, तो सैनिकों ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया और बादशाह के सामने पेश किया. अकबर ने गुस्से में पूछा कि मना करने के बावजूद उन्होंने तिलक क्यों लगाया? तब भक्त ने पूरी सच्चाई बयान की कि यह तिलक उन्होंने नहीं, बल्कि स्वयं उनकी 'श्यामा प्यारी' ने लगाया है. पारस कहते हैं कि जब अकबर ने उस तिलक की दिव्यता और भक्त के चेहरे पर असीम शांति देखी, तो उसका अहंकार चूर-चूर हो गया. अकबर ने न केवल उन्हें छोड़ दिया, बल्कि यह भी स्वीकार किया कि यही 'असली संत और असली भक्त' हैं.
पारस ने गुरुजी से दीक्षा ली
वीडियो के अंत में पारस छाबड़ा अपने माथे की ओर इशारा करते हुए हैं. वे बताते हैं कि उनके माथे पर जो तिलक की है, वह उसी ऐतिहासिक घटना और राधा रानी के चरणों के आशीर्वाद का प्रतीक है. जिन्हें नहीं पता उन्हें बता दें कि पारस ने अपने गुरुजी से दीक्षा ले ली है. वो कंठी (तुलसी) माला धारण करने लगे हैं. माथे पर चंदन का तिलक लगाते हैं. बीते कुछ वक्त से पारस पॉडकास्ट या इवेंट्स में भी तिलक लगाए दिखते हैं. हाल ही में उनके इस नए अवतार को लेकर काफी बातें सोशल मीडिया पर हुई थी.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क