'ऑस्कर्स 2026' की रेस में करण जौहर की फिल्म, महंगे कैम्पेनिंग से घबराए फिल्ममेकर? बोले- रिजल्ट...

करण जौहर के प्रोडक्शन में बनी फिल्म 'होमबाउंड' ऑस्कर्स 2026 में शॉर्टलिस्ट हुई. इसे अकैडमी अवॉर्ड्स तक पहुंचाने के लिए फिल्ममेकर ने काफी मेहनत और पैसा दोनों खर्ज किया. अब करण जौहर ने अपनी फिल्म की कैम्पेनिंग पर बात की है.

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'होमबाउंड' पर बोले करण जौहर (Photo: Social media) 'होमबाउंड' पर बोले करण जौहर (Photo: Social media)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:36 PM IST

'ऑस्कर्स' अवॉर्ड में किसी भी इंडियन फिल्म का जाना एक बहुत बड़ी बात मानी जाती है. हर साल भारत अपनी ओर से एक इंडियन फिल्म का चयन करके उसे 'ऑस्कर्स' में भाग लेने के लिए उतारता है. लेकिन कुछ ही फिल्में शॉर्टलिस्ट हो पाती हैं. मगर इस साल भारत की ओर से फिल्ममेकर करण जौहर की 'होमबाउंड' ऑस्कर्स में उतरी है, जो अपने आप में गर्व की बात है. 

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'होमबाउंड' की सफलता पर क्या बोले करण जौहर?

करण जौहर के प्रोडक्शन में बनी 'होमबाउंड' अपनी मजबूत कहानी के चलते इंटरनेशनल स्टेज पर काफी नाम कमा चुकी है. हालांकि इंडिया में इसका बॉक्स ऑफिस कलेक्शन काफी ठंडा था. मगर तब भी फिल्म 'ऑस्कर्स' के लिए शॉर्टलिस्ट हुई. इसमें करण जौहर को काफी मेहनत और पैसा भी खर्चा करना पड़ा. हाल ही में पीपिंग मून को दिए इंटरव्यू में करण ने 'होमबाउंड' के महंगे 'ऑस्कर्स' कैम्पेन पर बात की है. 

करण ने बताया कि अपने प्रोडक्शन हाउस का 50% बिजनेसमैन आदर पूनावाला को बेचने के बावजूद, वो अभी भी फिल्मों में क्रिएटिवली काफी एक्टिव रहते हैं. उन्हें बिजनेसमैन आदर से काफी सपोर्ट मिलता है. हालांकि वो करण की तरह क्रिएटिव चीजों में नहीं रहते, लेकिन उनका प्रोडक्शन को लेकर एक बड़ा विजन रहता है जिसके बारे में वो सोचते हैं. बल्कि उन्होंने ही करण को 'होमबाउंड' की ऑस्कर्स की कैम्पेनिंग के लिए प्रेरित किया था.

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कैसे 'होमबाउंड' की हुई कैम्पेनिंग?

करण ने कहा, 'हम होमबाउंड बना रहे थे. मैंने आदर से कहा था कि ऑस्कर के लिए कैम्पेन चलाना बहुत पैसा मांगता है, और कभी-कभी ये बिना अंत वाला गड्ढा बन जाता है. क्योंकि पता नहीं चलता कि आखिर में क्या होगा. क्या फिल्म टॉप 15 में भी आएगी या नहीं, फिर टॉप 5 में भी या नहीं. ये बहुत मुश्किल काम है. इसके लिए पब्लिसिस्ट रखने पड़ते हैं, बाहर देश-विदेश जाना पड़ता है. वहां बहुत शोर मचाना पड़ता है, मीडिया से बात करनी पड़ती है, स्क्रीनिंग करवानी पड़ती है.'

'लेकिन आदर ने मुझसे कहा कि करण, ये बहुत अच्छा मौका है और फिल्म भी कमाल की है. हम अपनी पूरी ताकत लगा देंगे. इस बार पैसे की सोच-विचार मत करो, प्रॉफिट-लॉस मत देखो. पैसों से ज्यादा पैशन को देखो. तो हमने वैसा ही किया. ये फिल्म हमारे लिए पैसे कमाने का धंधा नहीं थी. ये सिर्फ इज्जत और नाम के लिए थी. हम दूसरी फिल्में बनाकर पेट पालेंगे, लेकिन होमबाउंड हमेशा से हमारा पैशन प्रोजेक्ट था. उस फिल्म में कोई पैसों का खेल नहीं था.'

होमबाउंड, जिसे नीरज घेवान ने डायरेक्ट किया, एक दो दोस्तों की कहानी है जिसमें कोविड महामारी का अंश दिखाया गया है. फिल्म में दिखाया गया कि कैसे लॉकडाउन लगने के बाद, दो दोस्त अपने घर जाने के लिए स्ट्रगल करते हैं. इस दौरान उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. कई हजार किलोमीटर पैदल चलने से लेकर, महामारी के कारण झेली जाने वाली परेशानी. इन सभी चीजों को 'होमबाउंड' में काफी अच्छे से दिखाया गया. 

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