ओशिवारा फायरिंग केस: कमाल आर खान को मिली जमानत, कोर्ट में वकील ने रखी ये दलील

मुंबई के ओशिवारा इलाके में हुई गोलीबारी की घटना में गिरफ्तार हुए केआरके को बड़ी राहत मिली है. केआरके को इस मामले में कोर्ट से जमानत मिल गई हैं. वहीं एक्टर के वकील ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं.

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केआरके को मिली बड़ी राहत (Photo: Instagram/@kamaalrkhan) केआरके को मिली बड़ी राहत (Photo: Instagram/@kamaalrkhan)

विद्या

  • नई दिल्ली,
  • 31 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:53 AM IST

एक्टर और फिल्म क्रिटिक कमाल आर.खान, जिन्हें दुनिया KRK के नाम से जानती है, उन्हें मुंबई की अंधेरी मजिस्ट्रेट कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. ओशिवारा इलाके में हुई फायरिंग की घटना के आरोप में कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है.

KRK को कोर्ट ने 25,000 रुपये के निजी मुचलके (पर्सनल बॉन्ड) पर जमानत दे दी है. इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब उनके वकील ने पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए और इसे पूरी तरह गैर-कानूनी करार दिया.

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वकील ने उठाए सवाल
केआरके की ओर से अदालत में वकील सना रईस खान पेश हुईं. उन्होंने गिरफ्तारी की पूरी प्रक्रिया को ही गैर-कानूनी और मनमाना करार दिया. उन्होंने दलील दी कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 35(3) के मुताबिक, गिरफ्तारी से पहले जो नोटिस दिया जाना अनिवार्य है, वह पुलिस ने कभी दिया ही नहीं. इसके अलावा, उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 22(1) और BNSS की धारा 47 के उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया, जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के पुख्ता कारण लिखित या मौखिक रूप से बताना जरूरी होता है.

कमाल आर खान के बचाव में वकील ने एक मजबूत तर्क रखा. उन्होंने बताया कि जिस बालकनी में गोलियां मिलने की बात कही जा रही है, वहां से केआरके के घर की दूरी करीब 1,500 मीटर यानी डेढ़ किलोमीटर से भी ज्यादा है. जबकि जिस पिस्तौल की बात पुलिस कर रही है, उसकी मारक क्षमता यानी रेंज महज 20 मीटर के आसपास होती है. वकील ने कहा कि इतनी दूरी से फायरिंग करना शारीरिक रूप से पूरी तरह नामुमकिन है.

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अदालत में यह बात भी सामने आई कि पुलिस ने अब तक ऐसी कोई बैलिस्टिक या फॉरेंसिक रिपोर्ट पेश नहीं की है, जो सीधे तौर पर उन गोलियों को केआरके के हथियार से जोड़ सके. आर्म्स एक्ट के उल्लंघन पर वकील ने कहा कि खान के पास हथियार का वैध लाइसेंस है और नियम के मुताबिक वे साल में 200 कारतूस तक खरीद सकते हैं. ऐसे में उनके पास 22 कारतूस मिलना कोई अपराध नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर कारतूसों के हिसाब में कोई कमी है भी, तो यह केवल एक प्रशासनिक चूक हो सकती है जिस पर जुर्माना लगता है, यह कोई गंभीर आपराधिक मामला नहीं बनता.

कमाल की वकील ने क्या कहा?
न्यूज एजेंसी से बात करते हुए KRK की वकील सना रईस खान ने कहा, 'उनकी गिरफ्तारी मनमाने तरीके से की गई, उनके संवैधानिक अधिकारों की पूरी तरह से अनदेखी की गई, ये निश्चित रूप से कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है. ये मामला बनता ही नहीं है. ये सिर्फ कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है. उन्हें बिना नोटिस के गिरफ्तार किया गया. ये अजीब आरोप भी था कि कुछ कारतूस गायब हैं, जैसे छह गोलियां गायब हैं. तो मैंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा यह एक प्रशासनिक उल्लंघन हो सकता है, जिसके लिए उन्हें लाइसेंसिंग अथॉरिटी द्वारा सजा दी जा सकती है, जिसके लिए उन पर क्रिमिनल कोर्ट में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता.'

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क्या था पूरा मामला?
ये मामला 18 जनवरी को तब सुर्खियों में आया जब लोखंडवाला की 'नालंदा सोसाइटी' में अचानक गोलियां मिलने की खबर फैली. सोसाइटी की दूसरी और चौथी मंजिल पर रहने वाले लेखक नीरज मिश्रा और मॉडल प्रतीक बैद के अपार्टमेंट्स में गोलियां बरामद की गई थीं. गोलियों के निशान दीवारों और प्लाईवुड के कैबिनेट पर पाए गए थे. राहत की बात ये रही कि इस घटना में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ, लेकिन रिहायशी इलाके में इस तरह गोलीबारी ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए थे.

शुरुआती जांच में पुलिस ने बिल्डिंग के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, लेकिन वहां कोई भी संदिग्ध व्यक्ति अंदर आता या बाहर जाता नहीं दिखा. इसके बाद पुलिस ने फॉरेंसिक टीम और बैलिस्टिक विशेषज्ञों की मदद ली. जांच के आधार पर पुलिस उन लोगों की लिस्ट तैयार करने लगी जिनके पास आसपास के इलाके में लाइसेंसी हथियार थे. 24 जनवरी को पुलिस ने केआरके को हिरासत में ले लिया. पुलिस का दावा था कि जो गोलियां मिली थीं, वे खान की 7.65 एमएम मौजर पिस्तौल से मेल खाती हैं.
 

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