बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर इन दिनों अपनी नई फिल्म 'पेद्दी' को लेकर जबरदस्त विवादों में घिर गई हैं. फिल्म देखने वाले दर्शकों से लेकर क्रिटिक्स तक, हर कोई इस बात से नाराज है कि मूवी में जाह्नवी के किरदार को जरूरत से ज्यादा बोल्ड और महज एक 'आई कैंडी' बनाकर पेश किया गया है. लेकिन यह बहस सिर्फ 'पेद्दी' तक सीमित नहीं है. अगर जाह्नवी के अब तक के फिल्मी सफर और उनके पिछले रिकॉर्ड्स पर नजर डालें, तो एक बात साफ दिखती है कि उनकी एक्टिंग या किरदारों से कहीं ज्यादा चर्चा हमेशा उनके लुक्स और स्क्रीन प्रेजेंस की ही हुई है.
ऐसे में अब फिल्म इंडस्ट्री और सोशल मीडिया पर यह सवाल उठना लाजमी हो गया है कि क्या इतने बड़े बैनर से लॉन्च होने के बाद भी जाह्नवी कपूर बॉलीवुड में सिर्फ एक 'ट्रायल वर्जन' बनकर रह गई हैं?
जाह्नवी कपूर का धमाकेदार डेब्यू
साल 2018 में जब जाह्नवी कपूर ने बॉलीवुड में कदम रखा था, तो उनका डेब्यू किसी आम न्यूकमर जैसा नहीं था. उन्हें मराठी सिनेमा की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'सैराट' की ऑफिशियल हिंदी रीमेक 'धड़क' से लॉन्च किया गया था, जिसे करण जौहर के बैनर धर्मा प्रोडक्शंस ने बनाया था. हालांकि, इतने बड़े मौके के बावजूद यह फिल्म दर्शकों पर वैसा जादुई असर नहीं छोड़ पाई, जैसा अनीत पड्डा के लिए उनकी फिल्म 'सैयारा' ने किया था.
इसके बाद जाह्नवी को 'घोस्ट स्टोरीज़', 'गुंजन सक्सेना', 'रूही', 'बॉम्बे गर्ल', 'गुड लक जेरी' और 'मिली होमबाउंड' जैसी कई अलग-अलग जॉनर की फिल्मों में काम करने के मौके तो मिले, लेकिन वो कोई ऐसी यादगार परफॉर्मेंस नहीं दे पाईं जिससे इंडस्ट्री में उनकी एक मजबूत और खास पहचान बन सके.
'कमर्शियल इमेज' की तरफ बढ़ा झुकाव!
जाह्नवी कपूर की फिल्मों के चयन और उनके किरदारों के ग्राफ को देखें तो ऐसा लगता है कि धीरे-धीरे उनका ध्यान प्योर एक्टिंग से हटकर कुछ अलग करने की तरफ चला गया. इसकी शुरुआती झलक करण जौहर की फिल्म 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' के एक गाने में उनके कैमियो के दौरान साफ देखने को मिली थी.
इसके बाद आई जूनियर एनटीआर के साथ उनकी फिल्म 'देवरा', फिर 'परम सुंदरी', 'सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी' और अब हालिया रिलीज 'पेद्दी' ने इस बात पर मुहर लगा दी. 'पेद्दी' के विवाद ने उनकी पिछली फिल्मों की उस लिस्ट को दोबारा सामने ला दिया है, जहां पर्दे पर उनकी एक्टिंग क्षमता से कहीं ज्यादा फोकस उनकी बॉडी और ग्लैमर को दिखाने पर रहा है. यानी डायरेक्टर्स का पूरा ध्यान सिर्फ उनके दिखने पर ही सीमित हो गया, लेकिन अफसोस की बात यह है कि यह 'ग्लैमर स्ट्रेटेजी' बॉक्स ऑफिस पर भी कोई खास कमाल नहीं दिखा पा रही है.
एक्ट्रेस गायत्री चगंती ने क्या लिखा?
इस पूरे विवाद को और अच्छी तरह समझने के लिए साउथ एक्ट्रेस गायत्री चगंती का हालिया बयान बेहद अहम है. गायत्री ने जाह्नवी के इस पहलू पर खुलकर बात करते हुए कहा, 'जाह्नवी कपूर को इस मामले में पूरी तरह पीड़ित (विक्टम) बताना भी गलत होगा. अगर आप देखें, तो उन्होंने खुद अपनी ज्यादातर फिल्मों में ग्लैमरस रोल ही चुने हैं. सच तो यह है कि लोग उन्हें उनकी एक्टिंग स्किल्स के लिए नहीं, बल्कि उनके ग्लैमरस अंदाज के लिए ही कास्ट करते हैं. जाह्नवी भी अपने किरदार को कपड़ों और लुक्स के जरिए जरूरत से ज्यादा अट्रैक्टिव दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़तीं, भले ही कहानी या उस किरदार की वैसी मांग हो या न हो.'
गायत्री ने आगे लिखा, 'आज जाह्नवी का ग्लैमर ही उनकी सबसे बड़ी पहचान बन चुका है. जहां स्क्रिप्ट की डिमांड हो, वहां ग्लैमरस दिखने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन कुछ फिल्मों में यह जरूरत से ज्यादा और अजीब लगता है. उदाहरण के लिए, फिल्म 'परम सुंदरी' में ऐसे कई सीन हैं जहां उनका ऐसा लुक कहानी के लिहाज से बिल्कुल जरूरी नहीं था. यहां तक कि उनके पारंपरिक और सादे कपड़ों को भी इस तरह से डिजाइन किया गया कि वे ज्यादा सेंसुअल लगे.'
'केरल के बैकग्राउंड वाली कहानी में सगाई जैसे एक पारिवारिक और पारंपरिक मौके पर अचानक उनका बेहद बोल्ड साड़ी में आ जाना खटकता है. इतना ही नहीं, जिन सीन में वह एक स्कूल टीचर (खासकर प्रीस्कूल के छोटे बच्चों की टीचर) बनी हैं, वहां भी उनकी क्लीवेज साफ दिखाई देती है. मैं ऐसे दस और उदाहरण दे सकती हूं, जिससे साफ है कि फोकस कहां था.'
खुद बोल्ड सीन्स के खिलाफ हैं जाह्नवी
इस पूरे विवाद के बीच जाह्नवी कपूर का एक पुराना इंटरव्यू भी चर्चा में आ गया है. कुछ समय पहले वह राज शमानी के मशहूर पॉडकास्ट में शामिल हुई थीं, जहां उन्होंने खुद यह कुबूल किया था कि फिल्मों में उन्हें बिना वजह बोल्ड दिखाए जाने वाले दृश्यों से काफी तकलीफ होती है.
जाह्नवी ने कहा था, 'मेरा मानना है कि काम के हर स्टेज पर यह पूछना बेहद जरूरी है कि मैंने किस चीज के लिए अपनी सहमति (Consent) दी थी. मैं किसी भी रूप में बिना सहमति के किसी महिला या खुद को सेक्शुअलाइज किए जाने के सख्त खिलाफ हूं, यह बात मुझे अंदर तक परेशान करती है.' उन्होंने यह भी बताया था कि जब कभी कोई कैमरामैन गलत एंगल से शॉट लेकर उनकी बॉडी को हाइलाइट करने की कोशिश करता है, तो वह बहुत असहज हो जाती हैं और तुरंत उसे ऐसा करने से मना करती हैं.
ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि जब जाह्नवी खुद को इस तरह पर्दे पर पेश किए जाने के खिलाफ हैं, तो फिर वह बार-बार ऐसी फिल्मों और किरदारों का हिस्सा क्यों बन रही हैं? क्या बतौर एक्ट्रेस फिल्म के सेट पर 'NO' कहने या मना करने का अधिकार उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है?
इस मामले पर बात करते हुए एक बातचीत में जया बच्चन ने कहा कि ऐसे मामलों को सेट पर ही रोकना जरूरी है. उन्होंने बताया कि जब उनके साथ ऐसा हुआ तो उन्होंने तुरंत आपत्ति जताई और उसके बाद किसी भी फिल्ममेकर ने उनके साथ इस तरह बाउंड्री पार करने की हिम्मत नहीं की.
देखा जाए तो इस मौजूदा बहस से पहले भी जाह्नवी ने अपने करियर में कुछ ऐसी फिल्में चुनी थीं, जिनमें उनके किरदार मजबूत थे और जो पुरुष किरदारों पर भी भारी पड़ सकते थे, लेकिन अफसोस कि उन फिल्मों और उनकी एक्टिंग की चर्चा बहुत कम हुई. अब देखना यह है कि क्या जाह्नवी इस ग्लैमरस इमेज के चक्कर से बाहर निकलकर खुद को एक टॉप एक्ट्रेस के रूप में स्थापित कर पाती हैं, या फिर इंडस्ट्री में उनकी गिनती सिर्फ एक ट्रायल वर्जन के तौर पर ही होती रहेगी.
शिखर नेगी