बॉब क्रिस्टो:​​​​​​​ पेशे से इंजीनियर, परवीन बाबी को देखकर आया भारत, विदेशी था ये विलेन

हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में अगर किसी विदेशी चेहरे ने विलेन के तौर पर अपनी धाक जमाई, तो वो नाम था बॉब क्रिस्टो. जिसे हिंदी की समझ नहीं थी, वो बॉलीवुड का खतरनाक विलेन आखिर कैसा बना?

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बॉब क्रिस्टो बॉलीवुड में कैसे आए? (Photo: ITG) बॉब क्रिस्टो बॉलीवुड में कैसे आए? (Photo: ITG)

शिखर नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 28 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:33 AM IST

इंडियन सिनेमा के इतिहास में विलेन्स की एक लंबी लिस्ट रही है, लेकिन 80 और 90 के दशक में एक ऐसा चेहरा पर्दे पर उभरा जिसने अपनी नीली आंखों और कड़क कद-काठी से ऑडियंस के दिलों में खौफ भर दिया. हम बात कर रहे हैं बॉब क्रिस्टो की.

बॉब सिर्फ एक एक्टर नहीं थे, बल्कि वह बॉलीवुड के पहले ऐसे 'विदेशी विलेन' बने जिन्होंने अमिताभ बच्चन, अनिल कपूर जैसे दिग्गज हीरोज को पर्दे पर कड़ी टक्कर दी और कई बार तो उन्हें जमकर पीटा भी.

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हैरानी की बात यह है कि बॉब को हिंदी भाषा की गहरी समझ नहीं थी, फिर भी उन्होंने अपनी अदाकारी और बॉडी लैंग्वेज से ऐसा जादू चलाया कि लोग उनसे असल जिंदगी में भी नफरत करने लगे थे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक सिविल इंजीनियर से बॉलीवुड के सबसे खूंखार विलेन बनने तक का उनका सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है.

साल 1938 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में बॉब क्रिस्टो पेशे से प्रोफेशनल सिविल इंजीनयिर थे. नौकरी के साथ-साथ वो थियेटर का भी हिस्सा भी बने, जहां उनकी मुलाकात हेलगा नाम की लड़की से हुई, दोनों में प्यार हुआ और बाद में शादी हुई. इस शादी से कपल को 3 बच्चे डॉरिस, मोनिक और निकोल हुए.

इस खुशहाल शादीशुदा जिंदगी को एक दिन नजर लग गई. पत्नी ने सड़क हादसे में दम तोड़ दिया. इस घटना के बाद सदमे में चले गए और बच्चों को दोस्त की मदद से  USA भेज दिया. जहां ट्रस्ट ने उनका खर्चा उठाया.

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बॉब क्रिस्टो बॉलीवुड में कैसे आए?
हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में बॉब क्रिस्टो ने कहा था, 'मैं कभी फिल्मों में एक्टिंग करने के लिए मुंबई नहीं आया था. मैं ऑस्ट्रेलिया में एक सिविल इंजीनियर था और एक कंस्ट्रक्शन कंपनी चलाता था. 1974 में एक कार दुर्घटना में मेरी पत्नी की मौत हो गई, जिसके बाद हमारे तीन बच्चों को पालने की जिम्मेदारी मुझ पर आ गई. हम कैलिफोर्निया चले गए और फिर वियतनाम. मैंने वियतनाम और जिम्बाब्वे में पुल बनाए और सेना तथा SAS के लिए काम किया. मैंने फिलीपींस और सिंगापुर में घड़ियां और जगुआर कारें भी बेचीं.'

'1977 में, मैं फिर से सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में लौट आया और मेरी पोस्टिंग मस्कट में हो गई. वहां रहते हुए, मैं दो हफ्तों के लिए मुंबई आया, क्योंकि मैं अपने वर्क परमिट के प्रोसेस होने का इंतजार कर रहा था. उस यात्रा के दौरान मेरी मुलाक़ात 'द हॉलिडे इन' में अमेरिकी स्क्रिप्ट राइटर जॉर्ज मार्जबेटुनी से हुई. जिनसे मैं पहले एक बार कैलिफोर्निया में मिला था. '

'उन्होंने उस दौरान एक्टर-फिल्ममेकर संजय खान को 'अब्दुल्ला' (1980) नाम की एक अरब कॉमेडी फिल्म की स्क्रिप्ट बेची थी. इसके कुछ ही समय बाद, मुझे मेरा वीजा मिल गया और मैं मस्कट के लिए रवाना हो गया. लेकिन वहां मुझे एक टेलीग्राम मिला, जिसमें बताया गया था कि मार्जबेटुनी को दिल का दौरा पड़ा है. इसलिए मैं मुंबई लौट आया और अस्पताल में उनसे मिला. उन्होंने मुझसे राजस्थान जाकर फिल्म की शूटिंग देखने के लिए कहा. इसलिए मैं हवाई जहाज से राजस्थान गया और वहां खान से मेरी दोस्ती हो गई. फिर उन्होंने मुझे बताया कि फिल्म में एक दुष्ट तांत्रिक का किरदार सामने आया है और पूछा कि क्या मैं उसे निभाना चाहूंगा? उन्होंने मुझसे अपना सिर मुंडवाने, पूरी दाढ़ी बढ़ाने और अपनी आंखों में भेंगापन लाने के लिए कहा. मुझे हिंदी का एक शब्द भी बोलना नहीं आता था. मैंने 'हां' कह दिया और फिल्म में काम किया; हालांकि फिल्म की कहानी तो फारस (Persia) पर आधारित थी, लेकिन उसकी शूटिंग राजस्थान में हुई थी.'

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इसी इंटरव्यू में एक्टर ने बताया, 'जब तक 'अब्दुल्ला' रिलीज हुई, उसके बाद मुझे तीन फिल्मों के ऑफर मिल चुके थे. मेरे बारे में बात बस फैल गई थी. मुझे सीधे प्रोड्यूसर और डायरेक्टर से फोन आने लगे. लोग मुझे देखते और कहते, 'अरे, यह तो बॉब क्रिस्टो है, वह नया लड़का. चलो, इसे अपनी फिल्म में ले लेते हैं. मैं कभी ऑडिशन या स्क्रीन टेस्ट के लिए नहीं गया. मुझे बस चुन लिया जाता था. मेरी हिंदी बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन मुझे लगता है कि लोगों को मेरा लहजा पसंद आया और उन्होंने मुझे हिंदी रोल दिए. मुझे कभी स्ट्रगल नहीं करना पड़ा. खान ने मुझे बनाया, क्योंकि मैं एक खलनायक जैसा दिखता था. मैं फिर कभी मस्कट वापस नहीं गया.'

परविन बॉबी का किस्सा हुआ मशहूर
हालांकि बॉलीवुड में आने को लेकर बॉब का एक और किस्सा काफी मशहूर हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, एक बार बॉब की नजर टाइम मैगजीन पर पड़ी, जिसके कवर पर बॉलीवुड की उस दौर की सबसे खूबसूरत एक्ट्रेस परवीन बॉबी की फोटो थी. परवीन को देखते ही एक्टर ने उनसे मन बनाने का फैसला कर लिया और वो उनसे मिलने मुंबई आ गए.

मुंबई आकर एक्टर नरीमन रोड के टी-हाउस में बैठे हुए थे. उनकी नजर कैमरामैन जुबैर खान से हुई. जो किसी से कह रहे थे कि अगले दिन फिल्म बर्निंग ट्रेन का मुहूर्त है, जिसके एक्ट्रेस परवीन बाबी है. फिर क्या था बॉब ने कैमरामैन से बात की और बात बन गई.

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बॉब कैमरानमैन के साथ सेट पर पहुंचे. जब बॉब ने यहां परवनी बाबी को देखा तो वो चौंक गए. क्योंकि एक्ट्रेस बिना मेकअप के थी. बॉब, परवीन बॉबी के पास पहुंचे और मैगजीन से उनका चेहरा मिलाने लगे. तब एक्टर ने उनसे कहा, 'ये लड़की परवीन है, आप नहीं.' ये बात सुन परवीन हंस पड़ीं और उन्होंने समझाया कि जब मैं शूटिंग नहीं करती तो मेकअप में नहीं होती हूं. ये बॉब की परवीन से पहली मुलाकात थी और दोनों की यहां से दोस्ती हो गई.

करीब 200 फिल्मों में किया काम
एक्टर ने करीब 200 फिल्मों में काम किया. जिसमें इनकी सुपरहिट फिल्म कुर्बानी (1980), कालिया (1981), नमक हलाल (1982) नास्तिक (1983),  शराबी (1984) मर्द (1985), मिस्टर इंडिया (1987), रूप की रानी चोरों का राजा (1993), गुमराह (1993) शामिल हैं.

दिवंगत एक्टर की आखिरी बड़ी फिल्म 'गुमराह' (1993) थी. 2001 में उन्होंने फिल्मों से रिटायरमेंट ले लिया और संजय खान के होटल, 'गोल्डन पाम्स स्पा' में फिटनेस डायरेक्टर के तौर पर बैंगलोर में काम किया. लेकिन  2006 में रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के बाद उन्होंने ये नौकरी भी छोड़ दी.

एक्टर से जब पूछा गया था कि क्या वो अपने देश ऑस्ट्रेलिया लौटने का इरादा रखते हैं? इस पर उन्होंने कहा था, 'नहीं, मैं भारत में ही मरना चाहता हूं. यहां के लोग मुझे बहुत पसंद हैं... वे बहुत मेहमाननवाज हैं. मैंने यहां कुछ अच्छे दोस्त भी बनाए हैं. मुझे यहां के गांव और समुद्र-तट बहुत पसंद हैं. आखिरकार ऐसा ही हुआ  बॉब क्रिस्टो का बैंगलोर में ही 20 मार्च 2011 को 72 साल की उम्र में उनका निधन हो गया.

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