अर्जुन तेंदुलकर की शादी में आख‍िरी बार दिखी थीं आशा, क्या थी आख‍िरी बात? सायरा बानो ने बताया

आशा भोसले और सायरा बानो काफी अच्छी दोस्ती थीं. दोनों अक्सर एक दूसरे के घर जाती थीं. आशा भोसले के निधन से सायरा बानो को तगड़ा झटका लगा है. उन्होंने सिंगर संग अपनी आखिरी बातचीत और मुलाकात के बारे में बताया है.

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आशा भोसले संग सायरा बानो का था अच्छा बॉन्ड (Photo: Social Media) आशा भोसले संग सायरा बानो का था अच्छा बॉन्ड (Photo: Social Media)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 13 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:50 AM IST

सुरों की मल्लिका आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं. 92 साल की आशा ने 12 अप्रैल को हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह दिया. आशा भोसले के निधन से दिग्गज एक्ट्रेस सायरा बानो को तगड़ा झटका लगा है. सायरा और आशा काफी अच्छी दोस्त थीं. आशा भोसले ने सायरा बानों के लिए कई गाने गाए थे. दोनों एक दूसरे के घर भी जाती थीं. 

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आशा संग सायरा की वो आखिरी बातचीत...

सायरा बानो ने अब आशा भोसले संग अपनी आखिरी मुलाकात याद की है. न्यूज 18 संग बातचीत में सायरा बानो ने बताया कि इस बार रमजान के महीने में उनकी आशा भोसले से आखिरी बातचीत हुई थी. 

सायरा बोलीं- मैंने हाल ही में रमजान के महीने में उनसे बात की थी. मैंने उनका एक इंटरव्यू देखा था, जिसमें वो रमजान, ईद और रोजे के बारे में बड़े प्यार से बात कर रही थीं. उनकी बातें सुनकर मैं बहुत हैरान रह गई थी. उन्होंने लोगों के बीच एकता, साथ, प्रेम का एक सुंदर संदेश दिया था. उनके बोलने का तरीका मुझे बहुत अच्छा लगा था. वो हमेशा बहुत अच्छी तरह बोलती थीं. मैंने उनसे इस बारे में बात करने के लिए फोन किया था. 

'वो आखिरी बार था जब मैंने उनसे बात की थी, तब मुझे यह एहसास नहीं था कि इतनी जल्दी उनकी तबीयत इतनी खराब हो जाएगी. यह मेरे लिए एक बड़ा झटका था. मुझे याद है मैंने उनका एक वीडियो देखा था, जिसमें वो एक समारोह में शामिल हुई थीं (शायद अर्जुन तेंदुलकर की शादी के बारे में) और वो बेहद कमजोर लग रही थीं. वो आखिरी बार था जब मैंने उन्हें देखा था. उन्हें उस हालत में देखना मेरे लिए बहुत दुखद था. मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि वो अचानक इतनी बीमार हो जाएंगी.' 

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आशा-लता से थी गहरी दोस्ती

सायरा बानो आगे बोलीं- आशा और लता जी फैमिली फ्रेंड्स थीं. हमने साथ में बहुत समय बिताया. दिलीप साहब और मैंने उनके साथ कुछ यादगार पल बिताए. हम पुराने जमाने के, शास्त्रीय संगीत पसंद करने वाले लोग थे. हमें जीवन और संगीत से जुड़ी कहानियां साझा करना बहुत अच्छा लगता था और हमें खाने-पीने की बातें करना भी बहुत पसंद था. आशा जी को टेस्टी खाना बहुत पसंद था. उनका अपना एक रेस्टोरेंट भी है. मैंने उनके हाथ का बना खाना कभी नहीं खाया, लेकिन वो और लता जी हमारे घर खाना खाने आती थीं. आखिरी बार जब वो घर आई थीं, तब लता जी ने अपने हाथों से दिलीप साहब को खाना खिलाया था. मेरे पास उस दिन की तस्वीरें हैं. 
 

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