'सैयारा' फेम अनीत पड्डा की बहन ने धुरंधर को बताया प्रोपेगेंडा, प्रियंका चोपड़ा पर भी साधा निशाना

बॉलीवुड एक्ट्रेस अनीत पड्डा की बहन रीत पड्डा ने धुरंधर फिल्म को प्रोपेगेंडा बताया है. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पेज पर इसे लेकर लंबा चौड़ा पोस्ट किया. इसके अलावा उन्होंने प्रियंका चोपड़ा पर भी निशाना साधा.

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(Photo: Instagram/@reetpadda_/YRF) (Photo: Instagram/@reetpadda_/YRF)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:06 PM IST

ब्लॉकबस्टर फिल्म सैयारा फेम अनीत पड्डा की बहन रीत पड्डा ने शुक्रवार को इंस्टाग्राम पर कुछ स्टोरीज शेयर कीं. जिनमें उन्होंने कुछ कमेंट्स दिखाए. इन कमेंट्स में वह एक यूज़र को जवाब दे रही थीं और अपनी बात पर कायम थीं कि 'द कश्मीर फाइल्स', 'द केरला स्टोरी' और 'धुरंधर' जैसी फिल्में प्रोपेगेंडा हैं.

इसके अलावा उन्होंने अपने कमेंट्स में उन्होंने प्रियंका चोपड़ा की भी आलोचना की. जिसमें प्रियंका ने ऑस्कर समारोह में अपने भाषण के दौरान फिलिस्तीन के समर्थन में आवाज नहीं उठाई. उन्होंने कहा कि अगर उनकी बहन अनीत को कभी ऐसा मौका मिलता है और अगर वह भी वहां जाकर किसी 'डोडो पक्षी' की तरह खड़ी रहती हैं', तो वह सबसे पहले अपनी बहन की ही आलोचना करेंगी.

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यूजर ने रीत पर उठाया सवाल
रीत द्वारा शेयर किए गए कमेंट्स के स्क्रीन शॉट्स के मुताबिक, 'deadhuzzcameback' नाम का एक यूजर रीत के विचारों पर सवाल उठाता नजर आ रहा है. उसने लिखा, 'मुझे आपका अकाउंट अनीत के जरिए मिला (मैं सच में उसके काम की तारीफ़ करता हूं), और सच कहूं तो आपके विचार हैरान करने वाले थे. 

'कश्मीर फाइल्स', 'केरल स्टोरी' या 'धुरंधर' जैसी फिल्मों को सिर्फ इसलिए 'प्रोपगैंडा' कहना कि वे आपकी सोच से मेल नहीं खातीं, उन्हें नज़रअंदाज करने जैसा लगता है; खासकर तब, जब वे असल घटनाओं या उनसे प्रेरित घटनाओं पर आधारित हों. किसी बात से असहमत होना ठीक है, लेकिन असलियत से इनकार करना ठीक नहीं है... और अगर आप प्रियंका से उम्मीद करते हैं कि वह फिलिस्तीन के मुद्दे पर कोई स्टैंड लें (उन्होंने मदद वगैरह देकर फिलिस्तीन के लिए काफी कुछ किया है), तो शायद आप अनीत को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें, क्योंकि वह अब एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर कदम रख रही है. जवाबदेही चुनिंदा नहीं होनी चाहिए.'

रीत पड्डा ने आखिर क्या लिखा?
इस पर रीत ने जवाब दिया, 'आम तौर पर, मैं इस पर ध्यान नहीं देती, क्योंकि साफ तौर पर यहां किसी का मन बदलना ऐसा है, जैसे बिल्लियों को कैलकुलस सिखाना. लेकिन, क्योंकि आपने इतनी दरियादिली दिखाते हुए अपना कीमती समय मेरी हर छोटी-बड़ी पोस्ट पर रिएक्शन देने में लगाया है, तो मैंने सोचा, क्यों न मैं भी जवाब दूं?'

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यह बताते हुए कि उन्हें क्यों लगता है कि 'धुरंधर' एक प्रोपेगेंडा फिल्म है, रीत ने लिखा, 'धुरंधर के मामले में यह सचमुच सरकार के पक्ष में एक नैरेटिव (कथा) का काम करती है. यह राजनीतिक भाषणों का इस्तेमाल करके, नोटबंदी जैसी 'छोटी-मोटी रुकावट' को सही ठहराती है. क्या इसे प्रोपेगेंडा कहेंगे? हां. क्या इससे इनकार करेंगे? बिल्कुल नहीं.'

उन्होंने 'द कश्मीर फाइल्स' और 'द केरल स्टोरी' जैसी फिल्मों की समस्याओं के बारे में भी बताया. उन्होंने लिखा, 'ऐसा लगता है कि ये फिल्में क्रिएटिव मैथ (रचनात्मक गणित) का इस्तेमाल करती हैं: जैसे,~32,000 महिलाओं ने इस्लाम अपना लिया. जबकि असल मामले तो कुछ सौ ही होते हैं. लेकिन, प्रोपेगेंडा ऐसे ही तो काम करता है, है ना? सच का एक छोटा सा टुकड़ा लो, उसमें मनगढ़ंत और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए आंकड़े मिलाओ, और बस, अचानक आपके पास किसी एक समुदाय के खिलाफ एक पूरा का पूरा नैरेटिव तैयार हो जाता है.'

रीत ने यह भी कहा कि ये फिल्में ठीक हो सकती थीं, लेकिन असली समस्या यह है कि जो फिल्में सरकार के एजेंडे के खिलाफ होती हैं, उन्हें रिलीज होने का मौका ही नहीं मिलता. उन्होंने लिखा, 'हां, मुझे ऐसी फिल्मों से कोई दिक्कत नहीं होती... अगर एक छोटी सी समस्या न होती, वह यह कि पंजाब 95 जैसी फिल्में—जो असल में राजनीतिक मुद्दों को उठाती हैं, लेकिन सत्ताधारी पार्टी की लिखी स्क्रिप्ट से अलग होती हैं—उन्हें तो रिलीज होने का मौका ही नहीं मिलता.'

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प्रियंका पर उठाया सवाल
ऑस्कर समारोह के दौरान प्रियंका चोपड़ा के रवैये पर सवाल उठाते हुए रीत ने लिखा, 'उन्हें एक ऐसे इंसान के साथ खड़े होकर एक गैर-कानूनी युद्ध का विरोध करने का मौका मिला, जिसने उस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा था... लेकिन वह उस मौके पर आगे बढ़कर कुछ कर ही नहीं पाईं. अगर मेरी बहन को ऐसा कोई मौका मिलता है—और इंशाअल्लाह, सच्चे पातशाह, जय श्री राम—मैं दुआ करती हूं कि वह उस मौके की नजाकत को समझे और अगर वह वहां किसी 'डोडो पक्षी' की तरह चुपचाप खड़ी रह जाती है, तो मैं सबसे पहले उसकी आलोचना करूंगी.'

रीत पड्डा कौन हैं?
एक तरफ जहां अनीत एक्टिंग के क्षेत्र में अपना करियर बना रही हैं, वहीं रीत पेरिस में एक मार्केटिंग प्रोफेशनल के तौर पर काम करती हैं. उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल से पता चलता है कि वह मानवाधिकारों और नागरिक अधिकारों की भी एक मुखर समर्थक हैं.

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