350 रेप सीन करने वाला विलेन, ज‍िससे शादी तय हुई तो रिश्तेदार बोले- लड़की को जहर दे दो

बॉलीवुड की फिल्मों में विलेन का जिक्र होते ही जो चंद चेहरे आंखों के सामने घूम जाते हैं, उनमें रंजीत का नाम सबसे ऊपर आता है. रंजीत पर्दे पर इतने खौफनाक और शातिर विलेन रहे हैं कि एक दौर में लोग उन्हें असल जिंदगी में भी बुरा आदमी समझने लगे थे.

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बॉलीवुड का घिनौना विलेन (Photo: Instagram/ranjeetthegoli) बॉलीवुड का घिनौना विलेन (Photo: Instagram/ranjeetthegoli)

शिखर नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 05 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:40 AM IST

जब आंखों में दरिंदगी और चेहरे पर एक शातिर मुस्कान लिए बॉलीवुड का यह खूंखार विलेन पर्दे पर आता था, तो सिनेमा हॉल में सन्नाटा पसर जाता था. इस एक्टर ने बड़े पर्दे पर बुराई के ऐसे मानक स्थापित किए कि दर्शक उन्हें देखते ही नफरत से भर जाते थे. एक दौर था जब इस विलेन का नाम सुनते ही लड़कियां खौफजदा हो जाती थीं. 

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उनकी अदाकारी इतनी जीवंत और डरावनी थी कि उनकी पहचान एक घ‍िनौने विलेन के तौर पर पक्की हो गई थी. एक कलाकार के लिए इससे बड़ी कामयाबी भला क्या होगी कि लोग उसके किरदार को सच मानकर उससे नफरत करने लगें. हम बात कर रहे हैं रंजीत की. जिनके काम ने उन्हें इतनी कड़वी शोहरत दी कि उनके अपने माता-पिता तक ने उनसे मुंह मोड़ लिया था.

बॉलीवुड की फिल्मों में विलेन का जिक्र होते ही जो चंद चेहरे आंखों के सामने घूम जाते हैं, उनमें रंजीत का नाम सबसे ऊपर आता है. रंजीत पर्दे पर इतने खौफनाक और शातिर विलेन रहे हैं कि एक दौर में लोग उन्हें असल जिंदगी में भी बुरा आदमी समझने लगे थे. हालांकि, रंजीत इसे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं, क्योंकि उनके मुताबिक यह नफरत उन्हें नहीं बल्कि उनके एक्टिंग और किरदार को मिलती थी.

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मजे की बात यह है कि जो एक्टर पर्दे पर महिलाओं के लिए काल बनकर उभरता था, असल जिंदगी में वह उतना ही मिलनसार और नेकदिल इंसान है. आज भी जब रंजीत किसी सार्वजनिक कार्यक्रम या फिल्म प्रमोशन में पहुंचते हैं, तो अपने खास 'अरबी लुक' और कंदूरे से सबका ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं.

पहला ब्रेक ऐसे मिला
गोपाल बेदी उर्फ रंजीत का बॉलीवुड का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है.  रंजीत को अपना पहला ब्रेक भारतीय मूल के एक ब्रिटिश नागरिक की मदद से मिला था. हालांकि उनकी पहली फिल्म कभी बन नहीं पाई, लेकिन इसी के जरिए उनकी मुलाकात सुनील दत्त से हुई और उसके कुछ ही समय बाद, उन्होंने 'रेशमा और शेरा' में काम किया. वहां से उनके करियर ने जबरदस्त उड़ान भरी और आज उन्हें किसी परिचय की जरूरत नहीं है.

साल 1971 में आई फिल्म 'शर्मीली' में उन्होंने एक नेगेटिव भूमिका निभाई और यहीं से उनकी तकदीर बदल गई. इस फिल्म में उनके जबरदस्त एक्टिंग को देखकर फिल्ममेकर्स ने उन्हें विलेन के तौर पर टाइपकास्ट कर दिया. हालांकि शुरुआत में उन्होंने ऐसा नहीं सोचा था, लेकिन इसी नेगेटिव इमेज ने उन्हें वो शोहरत और मुकाम दिया, जो शायद हीरो बनकर भी नहीं मिल पाता.

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एक इंटरव्यू में अपनी बॉलीवुड यात्रा पर बात करते हुए रंजीत ने कहा, 'मैं तो इत्तेफाक से एक्टर बन गया. मैं एक्टिंग को लेकर कभी भी सीरियस नहीं था. इंडस्ट्री में मेरा कोई गॉडफ़ादर नहीं था, फिर भी मुझे इतनी सारी फिल्में मिलीं. मेरे पास घर जाने का भी मुश्किल से ही समय होता था और मैं अक्सर अपनी कार में ही सो जाता था. मुझे तो यह भी नहीं पता होता था कि मैं कितने पैसे कमा रहा हूं. लोग मेरी जानकारी के बिना ही मेरे साथ फिल्मों की घोषणा कर देते थे, और मैं उन्हें कभी मना भी नहीं करता था.'

किरदार का निजी जिंदगी पर कोई असर पड़ा?
इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में रणजीत ने कहा, 'जब मेरी शादी नहीं हुई थी, तो इस इमेज से मुझे कभी कोई परेशानी नहीं हुई. हालांकि, उस जमाने में लोग यह मानते थे कि आप असल में वही हैं जो आप परदे पर निभाते हैं. मुझे याद है, मैं वीकेंड पर अपनी बेटी से मिलने दिल्ली जाया करता था. हम रेस्टोरेंट जाते थे. तो, (रेस्टोरेंट में) हर कोई मुझे अजीब नजरों से देखता था, क्योंकि मैं उम्र में काफी बड़ा था और मेरे साथ एक ऐसी औरत होती थी जिसकी उम्र मुझसे आधी थी, या मेरी बेटी की उम्र की थी. मुझे अपना ऑर्डर इतनी जोर से देना पड़ता था जितना मैं दे सकता था, ताकि यह साफ हो जाए कि मैं अपनी बेटी के साथ हूं. मैं लोगों के मन में कोई बेवकूफी भरा ख्याल नहीं आने देना चाहता था.'

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एक्टर ने आगे कहा, 'जब मैंने फिल्म 'शर्मीली' में अपना पहला 'ग्रे कैरेक्टर' (नेगेटिव किरदार) निभाया, तो मुझे घर से निकाल दिया गया था. मैं एक बहुत ही रूढ़िवादी परिवार से आता हूं. उन्हें (मेरे माता-पिता को) लगा कि मैंने कोई बेवकूफी भरा पेशा चुन लिया है, जिसमें मैं लड़कियों को तकलीफ देता हूं और उनके साथ बदतमीजी करता हूं. हालांकि मैं परदे पर एक बहुत ही बदतमीज आदमी का किरदार निभाता था, लेकिन शॉट खत्म होने के बाद हम सब मिलकर उस किरदार का मजाक उड़ाते थे.

रेपिस्ट विलेन के तौर पर पहचान
जब रंजीत ने अपना पहला नेगेटिव रोल किया, तो उनके एक्टिंग की तारीफ हुई और उन्हें सफलता भी मिली, लेकिन उनका परिवार खुश नहीं था. उन्होंने 'द कपिल शर्मा शो' में फिल्म 'शर्मीली' में अपने पहले रेप सीन के बारे में बात करते हुए यह बात बताई. उन्होंने कहा, 'फिल्म 'शर्मीली' सुपरहिट हो गई, और मुझे एक नए 'रेपिस्ट विलेन' के तौर पर पहचान मिल गई. जब मैंने अपने परिवार को दिल्ली में फिल्म के प्रीमियर पर बुलाया, तो वे बीच में ही ऑडिटोरियम से बाहर चले गए. घर पर, मुझे उनके उदास और निराश चेहरों का सामना करना पड़ा. उन्होंने परिवार का नाम खराब करने के लिए मुझे घर से निकाल दिया और पूछा कि जब मेरे पिता मुझे राखी गुलजार के बाल खींचते, उनके कपड़े फाड़ते और उन्हें जमीन पर पटकते देखेंगे, तो वे पंजाब में लोगों का सामना कैसे करेंगे? उन्होंने मुझसे कहा कि मुझे आर्मी ऑफिसर या डॉक्टर जैसे रोल करने चाहिए, न कि ऐसे शर्मनाक किरदार. उन्होंने कहा, 'इसके बाद हम अमृतसर में लोगों का सामना कैसे कर पाएंगे?'

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बॉलीवुड फिल्मों के व‍िलेन रंजीत की पहचान आज भी एक न‍िगेट‍िव ही है. इस बात को खुद एक्टर रंजीत भी मानते हैं. रंजीत ने लगभग 500 फिल्मों में काम किया है.  उन्होंने फिल्मों में अब तक करीब 350 रेप सीन किए हैं.

70 के दशक के मशहूर एक्टर रंजीत ने कई रेप वाले रोल निभाए. हालांकि, उन्हें इस बात से कोई शिकायत नहीं है. उन्होंने एक बार कहा था, 'उस जमाने में रेप के सीन अश्लील नहीं होते थे. मेरा काम यह पक्का करना होता था कि हीरोइन सहज महसूस करे. बाद में, लोग मुझे 'रेप स्पेशलिस्ट' कहने लगे. वो दिन आज जैसे नहीं थे—तब लवमेकिंग सीन नहीं होते थे. मैं मजाक में कहता था कि अगर आपको सच में ऐसा चाहिए, तो जाकर कोई 'ब्लू फिल्म' बना लो.' हंसते हुए उन्होंने आगे कहा, 'मैं अक्सर मजाक में कहता हूं कि फैशन ने मेरा करियर बर्बाद कर दिया.'

महान खलनायक रंजीत ने अपने पूरे करियर में कई सुपरहिट फिल्मों में दमदार काम किया. उनकी फिल्मों में 'शर्मीली', 'शराबी', 'सुहाग', 'रॉकी', 'नमक हलाल', 'अमर अकबर एंथोनी', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'सत्ते पे सत्ता', 'लावारिस', 'धरम वीर', 'करण अर्जुन', 'बंटी और बबली', 'सावन भादों', 'वेलकम', 'हाउसफुल 4' और 'हाउसफुल 5' शामिल हैं. फिल्मों से परे, रंजीत ने हिटलर दीदी, त्रिदेवियां और बसेरा जैसे शो से टेलीविजन पर भी अपनी छाप छोड़ी.

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सास को दी जहर देने की सलाह
ETimes को दिए एक इंटरव्यू में, रंजीत ने अपनी पत्नी, अलोका बेदी के साथ अपनी शादी से जुड़े कुछ ऐसे राज खोले थे, जिनके बारे में पहले किसी को पता नहीं था. रंजीत ने उस समय को याद किया जब उनकी पत्नी के कुछ रिश्तेदारों ने उनकी सास को सलाह दी थी कि उन्हें अपनी बेटी की शादी रंजीत से करवाने के बजाय उसे डुबो देना चाहिए था या जहर दे देना चाहिए था. उन्होंने बताया, 'मेरी पत्नी के एक रिश्तेदार को जब पता चला कि उसकी शादी मुझसे हुई है, तो वह गुस्से से आग-बबूला हो गया. उसने मेरी सास से कहा कि उसे अपनी बेटी की शादी मुझसे करवाने के बजाय उसे जहर दे देना चाहिए था या डुबो देना चाहिए था.'

सिग्नेचर बन गया 'अरबी लुक'
पिछले दो-तीन दशकों से रंजीत अक्सर अरबी लिबास यानी 'कंदूरा' और 'कुफिया' में नजर आते हैं. सीनियर जर्नलिस्ट चैतन्य पादुकोण के मुताबिक, यह लुक अब रंजीत की पहचान बन चुका है. इसकी शुरुआत करीब 25-30 साल पहले हुई थी. वैसे तो अरब देशों में लोग गर्मी से बचने के लिए सफेद कंदूरा पहनते हैं, लेकिन रंजीत के पास अलग-अलग रंगों और खासकर सैटिन के कपड़ों वाले कंदूरे मौजूद हैं. उनका यह फैशन स्टेटमेंट आज इंडस्ट्री में सबसे अलग और अनोखा माना जाता है.

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दिलचस्प बात यह है कि पर्दे पर दहशत फैलाने वाले यह अभिनेता न तो मांस खाते हैं और न ही शराब पीते हैं. वे पूरी तरह से शाकाहारी हैं. रंजीत सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहते हैं, जहां वे अक्सर अपनी पुरानी तस्वीरें और वीडियो शेयर करके अपने अतीत को याद करते हैं.

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