बीजेपी-कांग्रेस में सियासी गोलपोस्ट बदलते रहे हैं हरक सिंह रावत, कभी 'रावत' से बगावत और अब बनेंगे सारथी?

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच बीजेपी ने हरक सिंह रावत को पार्टी से बाहर कर दिया है. ऐसे में हरक सिंह रावत कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं. उत्तराखंड के सियासत में हरक सिंह रावत दिग्गज नेता माने जाते हैं और छह साल पहले हरीश रावत सरकार के खिलाफ बगावत का झंडा उठाकर बीजेपी में आए थे.

Advertisement
हरक सिंह रावत हरक सिंह रावत

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली ,
  • 17 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 11:23 AM IST
  • हरक सिंह रावत साढे तीन दशक से सियासत में हैं
  • हरक सिंह रावत ने बीजेपी से शुरू किया था सफर
  • कल्याण सिंह सरकार में सबसे कम उम्र के मंत्री रहे

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के औपचारिक ऐलान के साथ ही बीजेपी में सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है. बीजेपी ने अपने कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने के साथ-साथ छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया. माना जा रहा है कि हरक सिंह रावत एक बार फिर से कांग्रेस का दामन थामेंगे और हरीश रावत के सारथी बनेंगे. हालांकि, एक समय उत्तराखंड में हरीश रावत की सरकार के खिलाफ बगावत का झंडा हरक सिंह रावत ने उठाया था, जिससे कांग्रेस के लिए संकट गहरा गया था. 

Advertisement

हरक सिंह रावत ने अपना सियासी सफर बीजेपी से शुरू किया था और बाद में उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाई उत्तराखंड के पृथक राज्य के लिए आंदोलन किया. इसके बाद कांग्रेस का दामन थाम लिया और प्रदेश अध्यक्ष से लेकर कैंबिनेट मंत्री तक बने, लेकिन 2016 में कांग्रेस सरकार के खिलाफ बगावत का झंडा उठाया और बीजेपी का दामन थाम लिया. प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनवाने में हरक सिंह रावत की अहम भूमिका रही है, जिसके चलते कैबिनेट मंत्री का ओहदा दिया. 

उत्तराखंड की सियासत में हरक सिंह रावत का अपना राजनीतिक कद है. वो साढ़े तीन दशक से सूबे में सियासी धुरी बने हुए हैं, जिसके चलते बीजेपी और कांग्रेस के बीच दलबदल करते रहे हैं. इसके बाद भी उनकी सियासी अहमियत बरकरार रही. 2022 के विधानसभा चुनाव में हरक सिंह रावत खुद के साथ-साथ अपनी बहू के लिए टिकट मांग रहे थे, लेकिन पार्टी सिर्फ उन्हें ही टिकट देने के पक्ष में थी. ऐसे में हरक सिंह रावत के बगावती रुख को देखते हुए बीजेपी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया है. 

Advertisement

हरक सिंह रावत खुद तो केदारनाथ सीट से चुनाव लड़ने की दावेदारी कर रहे थे और अपनी बहू अनुकृति रावत को लैंसडाउन सीट से चुनाव लड़ाना चाह रहे थे. बीजेपी ने उनकी मांगों को खारिज कर दिया, जिसके बाद वह नाराज होकर दिल्ली आ गए थे. माना जा रहा है कि हरक सिंह रावत एक अन्य बीजेपी विधायक के साथ कांग्रेस का दामन थामेंगे. कांग्रेस आलाकमान की भी हरी झंडी मिल चुकी है और साथ ही कांग्रेस कैंपेन कमेटी के चेयरमैन हरीश रावत भी सहमति दे चुके हैं. ऐसे में सोमवार को कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करेंगे.  

हरक सिंह रावत का सियासी सफर
उत्तराखंड की राजनीति के दिग्गज नेता हरक सिंह रावत का जन्म 15 दिसंबर 1960 को हुआ. 80 के दशक में हरक सिंह ने गढवाल विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र राजनीति में कदम रखा. बीजेपी के एबीवीपी से जुड़े रहे और 1984 में बीजेपी के टि‍कट से पहली बार व‍िधानसभा चुनाव लड़े, लेकिन जीत नहीं सके. इसके बाद 1991 में पौड़ी सीट से जीतकर विधायक और यूपी की कल्याण सिंह की सरकार में बने. हरक सिंह रावत ने इसके बाद पलटकर नहीं देखा और सियासी बुलंदियों पर चढ़ते चले गए. 

1993 में हरक सिंह रावत पौड़ी सीट से दोबारा विधायक बने, लेकिन 1996 में उन्होंने उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर अपनी अलग पार्टी बना ली. इसके बाद उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया, लेकिन बहुत दिन नहीं रह सके और कांग्रेस में शामिल हो गए. उत्तराखंड बना तो वह कांग्रेस की राजनीत‍ि में सक्र‍िय हो गए और कद्दावर नेता के तौर अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे. लैंसडौन सीट को कर्मभूमि बनाया और लगातार जीत दर्ज की. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष से लेकर विधायक दल के नेता तक रहे. 

Advertisement

2012 के विधानसभा चुनाव में हरक स‍िंह रावत ने कांग्रेस के ट‍िकट से रुद्रप्रयाग व‍िधानसभा चुनाव लड़ा और वह इस बार भी व‍िजय हुए. इसके बाद मार्च 2016 में हरक स‍िंह रावत अपनी ही सरकार से बगावत को लेकर चर्चा में आए. तब हरक स‍िंह रावत ने हरीश रावत की सरकार को ग‍िराने में महत्‍वपूर्ण भूम‍िका न‍िभाई. हालांक‍ि इसके बाद उन्हें विधासनसभा सदस्यता गवानीं पड़ी, लेक‍िन 2017 में चुनाव से पहले वह बीजेपी में शामिल हो गए. 2017 के चुनाव में बीजेपी ने हरक स‍िंह रावत को कोटद्वार सीट से चुनाव लड़कर विधायक और मंत्री बने. 

हरक सिंह रावत मंत्री बने, लेकिन त्रिवेंद्र सिंह रावत से लेकर पुष्कर धामी सरकार में उलझते नजर आए. त्रिवेंद्र सिंह सरकार में श्रम मंत्रालय को लेकर उनकी नाराजगी रही तो धामी सरकार में कोटद्वार में मेड‍िकल कॉलेज को मान्‍यता नहीं द‍िए जाने के आरोप में कैबि‍नेट बैठक में ही अपना इस्‍तीफा सौंप द‍िया था. हालांक‍ि बाद में बीजेपी ने डैमैज कंट्रोल करते हुए उनका इस्‍तीफा वापस ले ल‍िया था. पांच वर्षों के दौरान वह बीजेपी के लिए कई बार असहज स्थिति पैदा कर चुके थे. 

वहीं, अब टिकट को लेकर बीजेपी पर दबाव बना रहे थे और हरक सिंह रावत की कांग्रेस नेताओं से मुलाकात ने माहौल को गरमा दिया, जिसके बाद बीजेपी ने रावत के कांग्रेस में शामिल होने से पहले ही पार्टी से बर्खास्त कर दिया. ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस का दामन थाम कर हरीश रावत के लिए सारथी बनेंगे? 

Advertisement

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement