उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले की एक विधानसभा सीट है खतौली विधानसभा सीट. बताया जाता है कि खतौली को पहले खतावली कहा जाता था. कहा जाता है कि पहले मेरठ के हस्तिनापुर से लोग गाय चराने के लिए इस इलाके में आया करते थे जिस वजह से ग्वाले यहां अपने खाते (अकाउंट) खोलकर रखते थे. इसी वजह से पहले इसका नाम खता पड़ा और बाद में मुगल काल के दौरान खता के आगे वली जुड़ा. धीरे-धीरे इस इलाके का नाम खतौली पड़ गया.
खतौली विधानसभा क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से महज सौ किलोमीटर की दूरी पर है. खतौली, मुजफ्फरनगर जिला मुख्यालय से 21 किलोमीटर की दूरी पर दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग 58 पर बसा है. इस विधानसभा क्षेत्र में दो चीनी मिल हैं. खतौली नगर में स्थित त्रिवेणी मिल एशिया की सबसे ज्यादा गन्ने की पेराई करने वाली मिल है. खतौली विधानसभा में दूसरी मिल मंसूरपुर गांव में डीसीएम मिल है. कभी ये सीट पश्चिमी यूपी की सियासत का केंद्र हुआ करती थी.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
खतौली विधनसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो इस विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) को दो बार जीत मिली है. इस सीट से कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी, कांग्रेस, लोक दल, जनता दल, भारतीय किसान कामगार पार्टी और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवारों को एक-एक दफे जीत मिली है.
खतौली सीट के चुनावी अतीत की बात करें तो साल 2002 के चुनाव में इस सीट से आरएलडी के राजपाल सिंह बालियान ने सपा के प्रमोद त्यागी को 28171 वोट से हरा दिया था. 2007 में बसपा के योगराज सिंह ने आरएलडी के राजपाल सिंह बालियान को 16021 वोट से मात दे दी. 2012 में आरएलडी के करतार सिंह भड़ाना ने बसपा के ताराचंद शास्त्री को 5875 वोट हराकर फिर से ये सीट आरएलडी के पाले में कर दी. 2007 के विधानसभा चुनाव में राकेश टिकैत भी इस सीट से चुनाव मैदान में उतरे थे और उन्हें चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा था.
2017 का जनादेश
खतौली विधानसभा सीट से साल 2017 के जनादेश की बात करें तो इस सीट से बीजेपी ने विक्रम सैनी को टिकट दिया. बीजेपी के टिकट पर उतरे विक्रम सैनी के सामने सपा के टिकट पर चंदन चौहान की चुनौती थी. बीजेपी के विक्रम ने सपा के चंदन चौहान को 31374 वोट के बड़े अंतर से शिकस्त दे दी थी और पहली दफे विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए.
सामाजिक ताना-बाना
खतौली विधानसभा क्षेत्र के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो इस सीट की गिनती जाट बाहुल्य सीटों में होती है. इस विधानसभा क्षेत्र में सैनी, गुर्जर, ब्राह्मण वर्ग के मतदाता भी अच्छी तादाद में हैं. खतौली विधानसभा सीट का चुनाव परिणाम तय करने में दलित, पाल, कश्यप, ठाकुर के साथ ही मुस्लिम मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में करीब सवा तीन लाख मतदाता हैं.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
खतौली विधानसभा सीट से विधायक बीजेपी के विक्रम सैनी का जन्म 5 जून 1969 को मुजफ्फरनगर जिले के कवाल गांव में हुआ था. कवाल वही गांव है जहां दो भाइयों की हत्या के बाद 2013 में दंगे भड़के थे. विक्रम सैनी के पिता होशियार सिंह किसान थे. विधायक का दावा है कि उनके कार्यकाल में इलाके का चहुंमुखी विकास हुआ है. बीजेपी ने इस बार भी विक्रम सैनी पर दांव लगाया है. इस विधानसभा सीट के लिए प्रथम चरण में 10 फरवरी को मतदान होना है.
संदीप सैनी