'मेरे पिता को विरासत में धन-दौलत नहीं, शहादत मिली...', राजीव गांधी को याद कर भावुक हुईं प्रियंका

मुरैना में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी भावुक हो गईं. उन्होंने कहा कि, 'मैं जानती हूं कि शहादत का क्या मतलब है. मेरे पिता को विरासत में धन-दौलत नहीं, शहादत की भावना मिली. यह भावना आप समझ सकते हैं, क्योंकि आपने अपने बेटे सरहद पर भेजें हैं.'

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मुरैना की चुनावी रैली में प्रिंयका गांधी भावुक हो गईं मुरैना की चुनावी रैली में प्रिंयका गांधी भावुक हो गईं

अमित भारद्वाज

  • नई दिल्ली,
  • 02 मई 2024,
  • अपडेटेड 11:45 PM IST

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर, गुरुवार को प्रियंका गांधी ने मध्य प्रदेश के मुरैना में रैली की. इस दौरान उन्होंने यहां जनसभा को संबोधित किया और 'विरासत वाले बयान' पर एक बार फिर निशाना साधा. प्रियंका गांधी ने कहा कि, 'जब अपने पिता के टुकड़े लेकर आई तो इस देश से नाराज थी. मैंने अपने पिता को हिफाजत से तुम्हारे पास भेजा और तुमने टुकड़े में लौटाया.

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प्रियंका गांधी ने कहा कि मैं जानती हूं शहादत का क्या मतलब है. जब मंच पर खड़े होकर मेरे पिता पर आरोप लगाते हैं कि मेरे पिता ने कोई कानून बदल दिया उनसे विरासत लेने के लिए. मेरे पिता को विरासत में धन-दौलत नहीं, शहादत की भावना मिली. यह भावना आप समझ सकते हैं, क्योंकि आपने अपने बेटे सरहद पर भेजें हैं.  मोदी जी इस भावना को नहीं समझ सकते.

पूर्व पीएम राजीव गांधी का किया जिक्र
प्रियंका गांधी ने मंच से कहा कि, 'मैं जब 19 साल थी, तब अपने पिता के टुकड़ों को घर लाई थी. तब मैं नाराज थी. फिर मैंने धीरे-धीरे इस बात को समझा कि जिससे प्रेम होता है, नाराजगी उससे ही होती है. आज मै 52 साल की हूं. पहली बार मैंने ये बात सार्वजनिक मंच पर कही है. मेरे देश के लिए मेरे दिल में कितना प्रेम है, 

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विरासत वाले बयान पर घेरा
उन्होंने विरासत वाले बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि 'मोदी जी कहते हैं कि मेरे पिता ने उनकी मां से विरासत लेने के लिए कोई कानून बदल दिया था. मोदी जी इस बात को समझ नहीं पाएंगे कि मेरे पिता को विरासत में धन दौलत नहीं मिली. मेरे पिता को विरासत में शहादत मिली. मैं कैसे समझाऊं कि मोदी जी मेरे पिता को देशद्रोही बोलते हैं. वे इस बात को नहीं समझेंगे, लेकिन आप समझेंगे, क्योंकि आप इस देश के किसान हो, इस देश कि मिट्टी आपने पसीने से सींची है. 

पुलवामा शहीदों का किया जिक्र
'जो पुलवामा के शहीद हैं, उनमें से कुछ पुलवामा शहीद यूपी के भी थे. मैं तब उनके घर गई थी. उन घरों के बच्चों ने कहा था उन्हें भी सेना में जाना है.  मैं आपको ये कहने आई हूं कि हमें देशद्रोही कहें, हमें घर से निकाल दें, मेरे भाई को संसद से निकाल दिया. मेरे भाई पर इतने केस लगाए, कुछ भी कर लें, लेकिन ये भावना मेरे दिल से नहीं निकाल पाएंगे.

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