पश्चिम बंगाल की मालदा उत्तर लोकसभा सीट पर 23 को मतगणना के बाद चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं. इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार खगेन मुर्मू ने जीत हासिल की है. उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रत्याशी मौसम नूर को 84288 वोटों से हराया है.
नतीजों की स्थितिकब और कितनी हुई वोटिंग
मालदा उत्तर सीट पर लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के तहत 23 अप्रैल को वोट डाले गए और कुल 80.28 फीसदी मतदान हुआ.
कौन-कौन उम्मीदवार
मालदा उत्तर लोकसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से मौसम नूर पर दांव खेला जबकि कांग्रेस ने इस सीट से इशा खान चौधरी को मैदान में उतारा. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस सीट से खगेन मुर्मू और सीपीएम ने विश्वनाथ घोष को मैदान में उतारा. मुख्य राष्ट्रीय पार्टियों के अलावा मालदा उत्तर सीट से बहुजन समाज पार्टी, शिवसेना, बहुजन मुक्ति पार्टी समेत कई निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव लड़े.
2014 का जनादेश
मालदा उत्तर संसदीय क्षेत्र में पूर्व रेल मंत्री और कांग्रेस नेता गनी खान चौधरी की बेटी मौसम नूर सांसद चुनी जा रही हैं. 2009 और 2014 के आम चुनावों में भी मौसम नूर जीत हासिल करने में कामयाब रहीं. 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरी मौसम नूर ने सीपीएम उम्मीदवार खगेन मुर्मू को मात दी थी. मालदा मुस्लिम बहुल क्षेत्र है और यह इलाका कांग्रेस का गढ़ रहा है, लेकिन अब इस इलाके में सियासी तौर पर दाखिल होने के लिए बीजेपी के साथ तृणमूल कांग्रेस भी जोर आजमाइश कर रही है.
सामाजिक ताना-बाना
मालदा उत्तर लोकसभा क्षेत्र की कुल आबादी 23,37,850 है. इसमें 93.71% आबादी गांवों में रहती है जबकि 6.29% आबादी शहरी है. इनमें अनुसूचित जाति और जनजाति का अनुपात क्रमशः 23.3 और 10.05 फीसदी का है. जिले की आबादी में 51.27 फीसदी मुस्लिमों की हिस्सेदारी है जबकि 47.99 फीसदी हिन्दू हैं. 2017 की मतदाता सूची के मुताबिक मालदा उत्तर लोकसभा क्षेत्र में 15,71,541 मतदाता हैं. 2014 के लोकसभा चुनावों में 81.6 फीसदी लोगों ने वोटिंग में हिस्सा लिया था, जबकि 2009 के आम चुनावों में यह आंकड़ा 83.69 फीसदी का था.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
साल 2009 में हुए परिसीमन में मालदा लोकसभा सीट दो हिस्सों में बंट गई. इनमें एक मालदा उत्तर लोकसभा सीट और दूसरी मालदा दक्षिण लोकसभा सीट बनीं. इस सीट पर ज्यादातर समय कांग्रेस का कब्जा रहा है. पहले लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक दो बार ही ऐसे मौके आए जब इस सीट पर माकपा के उम्मीदवार जीतने में कामयाब रहे. 1971 और 1977 के आम चुनावों माकपा के दिनेश चंद्र जोरदार लगातार चुनाव जीतते रहे.
पहले लोकसभा चुनाव 1951 में कांग्रेस के टिकट पर सुरेंद्र मोहन घोष चुनाव जीते थे. उनके बाद 1957 और 1962 के चुनावों में कांग्रेस से रेणुका राय चुनाव जीतीं. 1967 के चुनाव में कांग्रेस ने यू. रॉय को मैदान में उतारा जिन्होंने जीत हासिल की. 1971 और 1977 में कांग्रेस इस सीट पर जीत हासिल नहीं कर सकी. इसके बाद ए.बी.ए. घनी खान चौधरी 1980, 1984, 1989, 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 तक लगातार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतते रहे. वह यूपीए सरकार में मंत्री भी रहे. 2005 में उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस के अबु हसेम खान चौधरी ने जीत हासिल की थी.
आम, जूट और सिल्क के उत्पादन के लिए मशहूर मालदा के नतीजे अहम हैं क्योंकि इस क्षेत्र में बीजेपी, वाम मोर्चे के साथ तृणमूल कांग्रेस की भी नजर है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 2011 से पश्चिम बंगाल की सत्ता में हैं, लेकिन मालदा की सियासत में उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को जगह नहीं मिल सकी है. पश्चिम बंगाल का मालदा जिला बांग्लादेश की सीमा से सटा हुआ है, जहां आदिवासी और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है.
वर्ष 1980 से 2005 तक गनी खान चौधरी मालदा इलाके से चुनकर लोकसभा पहुंचते रहे हैं. 2005 में चौधरी के निधन के बाद से उनका परिवार यहां काबिज है. मालदा जिले में दो लोकसभा सीटें हैं. इनमें एक उत्तर मालदा सीट, जहां से गनी खान चौधरी की भतीजी मौसम नूर कांग्रेस से 2014 का चुनाव जीता था.
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सना जैदी