गोरखपुर लोकसभा सीट पर बीजेपी के लिए निषाद पार्टी जरूरी या मजबूरी?

बीजेपी के साथ ही साथ यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ इस बार गोरखपुर सीट को लेकर काफी सजग हैं. यही वजह है कि बीजेपी ने निषाद पार्टी से हाथ मिलाने में देरी नहीं की साथ ही गोरखपुर के सांसद प्रवीण निषाद को बीजेपी में शामिल भी करा लिया.

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गोरखपुर सांसद प्रवीण निषाद को बीजेपी में शामिल कराते जेपी नड्डा गोरखपुर सांसद प्रवीण निषाद को बीजेपी में शामिल कराते जेपी नड्डा

आनंद पटेल

  • नई दिल्ली,
  • 05 अप्रैल 2019,
  • अपडेटेड 7:29 PM IST

यह बहुत दिनों की बात नहीं है जब यूपी की गोरखपुर सीट पर हुए उपचुनाव में निषाद पार्टी प्रमुख संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद सपा के टिकट पर चुनाव जीते. उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि सीएम योगी के गढ़ में बीजेपी को हराने वाले संजय निषाद में बीजेपी में शामिल हो जाएंगे. बीजेपी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ इस बार गोरखपुर सीट को लेकर काफी सजग हैं. यही वजह है कि बीजेपी ने एनडीए में निषाद पार्टी को शामिल कराने में देरी नहीं की और प्रवीण निषाद को बीजेपी में शामिल भी करा लिया.

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गोरखपुर लोकसभा सीट पर तकरीबन 19.5 लाख वोटर हैं, जिसमें निषाद, मल्लाह और बिंद जातियों  के वोटरों की अच्छी खासी तादाद है. इस सीट पर इन जातियों के तकरीबन 3.5 लाख वोटर हैं. इतना ही नहीं गोरखपुर के अलावा महराजगंज और जौनपुर सीट पर इनका अच्छा खासा प्रभाव है. बीजेपी ही नहीं सीएम योगी आदित्यनाथ दोबारा से गोरखपुर सीट पर पार्टी का कब्जा हो. गोरखपुर सीट पर लंबे समय से मठ का कब्जा था.

2018 के उपचुनाव में बीजेपी उम्मीदवार उपेंद्र दत्त शुक्ला भले ही कम वोटों से हारे लेकिन यह हार बीजेपी के लिए पचाने वाली नहीं थी. अब प्रवीण निषाद के बीजेपी में शामिल होने से साफ है कि वह अब गोरखपुर से पार्टी के उम्मीदवार हो सकते हैं. बता दें कि हाल ही में प्रवीण निषाद के पिता और निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद ने लखनऊ में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी. दोनों की मुलाकात के बाद से ये चर्चा होने लगी थी कि दोनों पार्टियां साथ चुनाव लड़ सकती हैं.

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बताया जा रहा है कि एक साल के भीतर ही सबकुछ बिगड़ने लगा. निषाद पार्टी के मुखिया गोरखपुर सीट के साथ ही सपा चीफ अखिलेश यादव से महराजगंज की भी सीट मांगने लगे. वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर से इसके खिलाफ आवाज उठने लगी. सपा के स्थानीय नेता प्रवीण निषाद के टिकट को लेकर नाखुश बताए जा रहे थे. उनका तर्क था कि निषाद बाहुल्य पिपराइच सीट पर प्रवीण निषाद को बीजेपी उम्मीदवार से कम वोट मिले.

सपा ने गोरखपुर सीट पर प्रवीण निषाद को उम्मीदवार न बनाकर रामभुआल निषाद को उम्मीदवार बना दिया. सपा से जब निषाद पार्टी के रिश्ते बिगड़े तो बीजेपी ने इस मौके के पकड़ा और निषाद पार्टी के एनडीए में शामिल कर दिया. बताया जा रहा है कि निषाद पार्टी को बीजेपी यूपी में दो सीटें दे सकती है. बीजेपी ने एक ओर जहां महागठबंधन के सहयोगी को अपने साथ मिलाया वहीं निषाद वोटरों को भी पार्टी की लाने की कोशिश की है.

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