कोलकाता दक्षिण लोकसभा सीट पर 23 मई को मतगणना के बाद नतीजे घोषित हो गए हैं. कोलकाता दक्षिण ममता बनर्जी का कर्मक्षेत्र रहा है. पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बनने से पहले ममता बनर्जी यहां से 4 बार सांसद रहीं और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की इस इलाके में तूती बोलती है. इस बार भी टीएमसी उम्मीदवार माला रॉय ने जीत हासिल की है. उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी सुभाष चंद्र बोस के परपोते और बीजेपी उम्मीदवार चंद्रबोस को हराया है.
कब और कितनी हुई वोटिंग
कोलकाता दक्षिण लोकसभा सीट पर19 मई को वोट डाले गए और 69.65 फीसदी मतदान हुआ. जबकि 2014 के चुनाव में यहां 69.33 फीसदी वोटिंग हुई थी.
कौन-कौन प्रमुख उम्मीदवार
टीएमसी ने इस सीट से इस बार सीटिंग एमपी का टिकट काट दिया और माला रॉय को अपना उम्मीदवार बनाया. इस लोकसभा सीट से सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्रबोस बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे. कांग्रेस ने यहां से मीता चक्रबर्ती को टिकट दिया, जबकि नंदिनी मुखर्जी इस सीट से सीपीएम की उम्मीदवार बनाया. यहां से निर्दलीय समेत 13 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे.
2014 का चुनाव
2014 के चुनाव में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के सुब्रत बख्शी यहां से सांसद चुने गए लेकिन बीजेपी के तथागत रॉय ने उन्हें कड़ी टक्कर दी. पश्चिम बंगाल में अधिकांश जगहों पर तृणमूल कांग्रेस का मुकाबला सीपीएम से हुआ लेकिन कोलकाता दक्षिण में लड़ाई बीजेपी से थी. ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को 431715 वोट जबकि बीजेपी के तथागत रॉय को 295376 वोट मिले. अगर वोट प्रतिशत की बात करें तो AITC को 57.19 पर्सेंट, बीजेपी को 35.39 और सीपीएम को 3.95 पर्सेंट वोट मिले. जबकि 2009 में AITC को 36.96 पर्सेंट, सीपीएम को 23.84 पर्सेंट और बीजेपी को 9.71 पर्सेंट वोट मिले थे. इससे साफ जाहिर है कि बीजेपी ने कोलकाता दक्षिण सीट पर मजबूत पकड़ बना ली है और तृणमूल कांग्रेस को कड़ी टक्कर दे सकती है. यह ऐसी सीट है जहां तृणमूल कांग्रेस और सीपीएम के जितने वोट घटे बीजेपी को उतना फायदा हुआ.
सामाजिक ताना-बाना
कोलकाता दक्षिण संसदीय सीट 24 परगना जिले में आती है. 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां की कुल आबादी 1972769 है. इनमें से 1.52 फीसदी आबादी ही ग्रामीण है बाकी 98.48 फीसदी शहरी है. अनुसूचित जाति और जनजाति का रेश्यो यहां पर 5.93 और .3 पर्सेंट है. 2017 की वोटर लिस्ट के मुताबिक 1700087 मतदाता हैं. 2014 के चुनाव में यहां पर 69.33 फीसदी वोटिंग हुई थी. वहीं 2009 में 66.9 फीसदी. यहां पर 7 विधानसभा सीटें हैं और सातों पर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है.
सीट का इतिहास
कोलकाता दक्षिण पश्चिम बंगाल की एक पुरानी लोकसभा सीट है जिसका गठन 1951 में ही हो गया था. कोलकाता पश्चिम बंगाल की राजधानी भी है. ऐसा कहा जा सकता है कि यह सीट जमाने के साथ चलती रही. पहले जब सीपीएम मजबूत थी तो वह यहां से जीतती रही. कांग्रेस मजबूत हुई तो उसे यहां से सफलता मिली इसके बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने इस पर कब्जा कर लिया. 1967 में यहां से सीपीएम के जी घोष जीते थे. उन्होंने कांग्रेस के बी. बी. घोष को हराया था. 1971 के चुनाव में बाजी पलट गई और इंडियन नेशनल कांग्रेस के प्रिय रंजन दासमुंशी ने सीपीएम के जी घोष को पराजित कर दिया. हालांकि 1977 में बीएलडी के दिलीप चक्रवर्ती यहां से चुनाव जीते.1980 के चुनाव में सीपीएम के सत्य साधन चक्रवर्ती को जीत मिली.
1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जब पूरे देश में कांग्रेस के प्रति सहानुभूति की लहर चल रही थी तो यह सीट भी उससे अछूती नहीं रही. 1984 में चुनाव में यहां से कांग्रेस के भोलानाथ सेन जीते. 1989 में बाजी पलट गई और सीपीएम के बिप्लब दास गुप्ता ने यहां से जीत दर्ज की. कांग्रेस में अपनी मजबूत पकड़ बना रही ममता बनर्जी ने इसी सीट को अपना कर्मक्षेत्र बनाया. 1984 के चुनाव में सीपीएम के कद्दावर नेता सोमनाथ चटर्जी को हराकर लाइम लाइट में आ चुकी थीं.
1991 में ममता ने सीपीएम के दूसरे कद्दावर नेता बिप्लब दास गुप्ता को पराजित कर दिया. 1996 में भी ममता बनर्जी कांग्रेस से यहां की सांसद चुनी गईं. 1998 में ममता ने डब्ल्यूबीटीसी के बैनर पर चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी. 1999 के पहले ही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस अस्तित्व में आ चुकी थी और ममता बनर्जी ने फिर यहां से जीत दर्ज की. 2004 में ममता ने अपनी जीत कायम रखी. 2009 में ममता ने यहां से AITC से सुब्रत बख्शी को टिकट देकर सांसद बनाया. 2011 में एक बार फिर ममता बनर्जी यहां से सांसद चुनी गईं. पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने यह सीट छोड़ दी और यहां से फिर तृणमूल कांग्रेस के सुब्रत बख्शी 2014 में सांसद चुने गए.
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सना जैदी