चित्तापुरः खड़गे के सामने पिता की विरासत बचाने की चुनौती

कर्नाटक की चित्तापुर विधानसभा कांग्रेस की सबसे मजबूत सीटों में गिनी जाती है. इस सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे चुनाव मैदान में हैं. खड़गे के सामने बीजेपी के वाल्मीकि नाईक हैं. बसपा के देवराजा वीके सहित 8 प्रत्याशी यहां चुनाव मैदान में हैं.

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प्रियांक खड़गे प्रियांक खड़गे

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 15 मई 2018,
  • अपडेटेड 8:02 AM IST

कर्नाटक की चित्तापुर विधानसभा कांग्रेस की सबसे मजबूत सीटों में गिनी जाती है. इस सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे चुनाव मैदान में हैं. खड़गे के सामने बीजेपी से वाल्मीकि नाईक हैं. बसपा के देवराजा वीके सहित 8 प्रत्याशी यहां चुनाव मैदान में हैं.

गुलबर्गा जिले की चित्तापुर विधानसभा सीट कांग्रेस की परंपरगात सीट मानी जाती है. 1957 से लेकर अब तक इस सीट पर 14 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. इनमें 10 बार कांग्रेस उम्मीदवार ने जीत हासिल की है. इसी से कांग्रेस की यहां पर ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है. जबकि बीजेपी और जेडीएस एक-एक बार तथा जनता पार्टी दो बार यहां से जीती है.

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चित्तापुर विधानसभा क्षेत्र 1957 से 2008 तक सामान्य सीट थी. परिसीमन के बाद 2008 में इस सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया. यही वजह रही कि 2008 के चुनाव में चित्तापुर विधानसभा सीट से मल्लिकार्जुन खड़गे चुनाव में उतरे और उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार को 17 हजार 442 मतों से मात दी थी.

2009 के लोकसभा चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे के सांसद बनने के बाद उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद इस सीट से उपचुनाव में उनके बेटे प्रियांक खड़गे मैदान में उतरे, लेकिन वे पिता की विरासत नहीं बचा सके. बीजेपी के वाल्मीकि नाईक ने इस सीट पर पार्टी का खाता खोला.

2013 के विधानसभा चुनाव में प्रियांक खड़गे एक बार फिर कांग्रेस से उम्मीदवार बने. इस बार उन्होंने पार्टी को निराश नहीं किया, उन्होंने वाल्मीकि नाईक को करारी मात दी. प्रियांक खड़गे को 69 हजार 379 वोट मिले जबकि बीजेपी के नाईक को 38 हजार 188 वोट मिले. इस तरह प्रियांक  31 हजार 191 वोटों से विजयी रहे.

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