सेंथमंगलम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 93) एक अत्यंत संवेदनशील अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षित सीट है, जहां चुनाव शोर-शराबे या बड़े प्रचार से नहीं, बल्कि आदिवासी एकजुटता, पहाड़ी इलाकों में कल्याण योजनाओं की सही डिलीवरी और प्रशासन तक पहुंच के आधार पर तय होते हैं. यह हाई-प्रोफाइल या ज्यादा चर्चा में रहने वाली सीट नहीं है, लेकिन यदि पहाड़ी गांवों की
अनदेखी हो जाए तो उसका सीधा असर वोटों पर पड़ता है. यहां जीत-हार का अंतर अक्सर बहुत कम होता है और परिणाम काफी हद तक मतदान प्रतिशत (टर्नआउट) पर निर्भर करता है.
यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है. 13वीं शताब्दी में यह कडवा वंश की राजधानी रहा था और यहीं चोल राजा राजराजा तृतीय को कैद किए जाने की ऐतिहासिक घटना भी जुड़ी है. यह स्थान अपने प्रसिद्ध अबत्सहायेश्वरर मंदिर के लिए जाना जाता है. मंदिर के पास स्थित तालाब के किनारे बने प्राचीन “संगीतमय पत्थर के घोड़े” इसकी विशेष पहचान हैं.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यहां के प्रमुख मतदाता समूहों में अनुसूचित जनजाति (ST) सबसे निर्णायक भूमिका में हैं, खासकर कोल्लीमलाई पहाड़ियों में रहने वाली मलयाली जनजातियां. इसके अलावा अनुसूचित जाति (SC) समुदाय, मैदानी इलाकों के छोटे और सीमांत किसान, कृषि मजदूर परिवार, महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) और कल्याण योजनाओं के लाभार्थी, तथा वन पर निर्भर परिवार भी अहम भूमिका निभाते हैं. यहां का सीधा गणित यह है कि अगर पहाड़ी आदिवासी मतदाता अधिक संख्या में मतदान करें और उन्हें सरकारी योजनाओं पर भरोसा हो, तो वही जीत तय करते हैं.
भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र कोल्लीमलाई के पहाड़ी गांवों और मैदानी इलाकों का मिश्रण है. कई बस्तियां जंगल के किनारे स्थित हैं. अंदरूनी पहाड़ी इलाकों में सड़क संपर्क कमजोर है और अलग-अलग गांवों के बीच दूरी काफी अधिक है. यहां राजनीति विचारधारा से ज्यादा पहुंच और संपर्क पर आधारित है, यानी नेता कितनी आसानी से लोगों तक पहुंच पाता है और लोग प्रशासन तक अपनी बात पहुंचा पाते हैं, यही असली मुद्दा है.
मतदान के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अबत्सहायेश्वरर मंदिर क्षेत्र, मंदिर के पास स्थित संगीतमय पत्थर के घोड़े, कोल्लीमलाई के आदिवासी गांव, पहाड़ी तलहटी की बस्तियां, SC बहुल मैदानी गांव, सेंथामंगलम नगर पंचायत के वार्ड, और जंगल किनारे की आबादियां शामिल हैं. हर क्षेत्र अपनी जरूरतों के आधार पर मतदान करता है. उनके लिए सम्मान, सरकारी पहुंच और जीवनयापन के साधन सबसे बड़े मुद्दे हैं.
मुख्य स्थानीय मुद्दों में पहाड़ी गांवों तक सड़क संपर्क, पीने के पानी और बिजली की सुविधा, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, शिक्षा सुविधाएं और छात्रावास, वन अधिकार और आजीविका तक पहुंच, तथा मनरेगा (MGNREGA) के तहत काम की उपलब्धता शामिल हैं.
मतदाता मनोदशा स्पष्ट है, विधायक को नियमित रूप से पहाड़ी गांवों का दौरा करना चाहिए, वन, राजस्व और पुलिस से जुड़े मुद्दों का समाधान करना चाहिए, और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी योजनाएं आखिरी बस्ती तक पहुंचें. आदिवासी नेतृत्व और परंपराओं का सम्मान करना बहुत जरूरी है. भूस्खलन, बीमारी या किसी भी संकट के समय विधायक की मौके पर मौजूदगी लोगों के विश्वास को मजबूत करती है. यहां का सीधा संदेश है, अगर पहाड़ी इलाकों की अनदेखी हुई, तो हार तय है.