अंथियूर विधानसभा क्षेत्र (संख्या 105) में अंथियूर शहर और उसके आसपास की स्थानीय निकायों शामिल हैं. यह विधानसभा क्षेत्र 1962 के चुनाव से अस्तित्व में है. वर्तमान समय में यह तिरुप्पुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. हालांकि 2009 के लोकसभा चुनाव तक यह सीट गोबिचेट्टिपालयम लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हुआ करती थी.
से अंथियूर एक ग्रामीण प्रधान क्षेत्र है, लेकिन अंथियूर शहर यहां का मुख्य केंद्र माना जाता है, जहां से आसपास के गांवों की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियां जुड़ी हुई हैं. यहां की आबादी में प्रमुख समुदायों में कोंगु वेल्लालर गौंडर, अनुसूचित जाति (Scheduled Castes), देवेन्द्रकुला वेल्लालर, नायक शामिल हैं. इसके अलावा शहर के कुछ हिस्सों में अल्पसंख्यक समुदायों की भी सीमित उपस्थिति देखी जाती है. इन समुदायों का स्थानीय राजनीति और सामाजिक ढांचे पर काफी प्रभाव रहता है.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र बरगुर हिल्स (Bargur Hills) के प्रवेश द्वार के रूप में भी जाना जाता है. यहां से पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंच आसान होती है. इसके अलावा यहां के आसपास एरेटी वॉटरफॉल्स (Eretti Waterfalls) जैसे प्राकृतिक पर्यटन स्थल भी स्थित हैं, जो इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाते हैं. अंथियूर एक कृषि प्रधान क्षेत्र है और यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती पर आधारित है. यह इलाका खास तौर पर पान के पत्तों (Betel Leaves) और गन्ने (Sugarcane) की खेती के लिए जाना जाता है. इसलिए यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था को कृषि आधारित अर्थव्यवस्था (Agrarian Economy) कहा जाता है.
क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थानों या गतिविधि केंद्रों (Hotspots) में अंथियूर गुरुनाथस्वामी मंदिर प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाता है. इसके अलावा यहां लगने वाला साप्ताहिक बाजार (Weekly Market) आसपास के किसानों और व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र है. इस क्षेत्र के कई वार्ड और इलाके पूरी तरह से कृषि गतिविधियों पर आधारित हैं, इसलिए किसानों की समस्याएं और जरूरतें यहां की राजनीति में अहम भूमिका निभाती हैं.
अंथियूर विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय मुद्दों की बात करें तो किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय सामने आते हैं. इनमें सबसे बड़ा मुद्दा हल्दी (Turmeric) की कीमतों में अस्थिरता है, जिससे किसानों की आय प्रभावित होती है. इसके अलावा भवानी नदी से सिंचाई की व्यवस्था और वहां बने चेक डैम (Check Dam) के रखरखाव का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है. किसानों को मिलने वाली फसल बीमा योजनाओं में देरी और कृषि ऋण माफी (Loan Waiver) की मांग भी यहां के प्रमुख चुनावी मुद्दों में शामिल रहती है.
मतदाताओं के रुझान की बात करें तो इस क्षेत्र के किसान और ग्रामीण मतदाता राजनीतिक रूप से काफी जागरूक माने जाते हैं. यहां के लोग आमतौर पर ऐसे नेताओं को प्राथमिकता देते हैं जो न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित कर सकें, बेहतर सिंचाई व्यवस्था ला सकें और किसानों को बाजार तक बेहतर पहुंच (Market Access) दिलाने में मदद कर सकें. इसी वजह से अंथियूर में चुनावी राजनीति अक्सर कृषि, सिंचाई और किसानों के आर्थिक हितों के इर्द-गिर्द घूमती है.