बंगाल में SIR पर बवाल, BJP ने EC से की शिकायत, 'अवैध गिरफ्तारी' और धांधली के लगाए आरोप

पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बीजेपी ने बड़े पैमाने पर प्रशासनिक गड़बड़ी का आरोप लगाया है.पार्टी का कहना है कि राज्य में फॉर्म 7 जमा करने की प्रक्रिया पूरी तरह 'अराजक' हो चुकी है और प्रशासन मतदाताओं को डराने-धमकाने का काम कर रहा है.

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बंगाल में एसआईआर को लेकर बवाल. (File photo: ITG) बंगाल में एसआईआर को लेकर बवाल. (File photo: ITG)

पीयूष मिश्रा

  • कोलकाता,
  • 14 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:03 PM IST

भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया में फॉर्म 7 जमा करने में आ रही बाधाओं और प्रशासनिक दबाव के खिलाफ चुनाव आयोग से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है. पार्टी ने आरोप लगाया है कि स्थानीय प्रशासन और तृणमूल कांग्रेस के दबाव में अधिकारियों द्वारा फॉर्म स्वीकार करने से इनकार किया जा रहा है. साथ ही फॉर्म जमा करने वाले कार्यकर्ताओं की अवैध गिरफ्तारी और उनके वाहनों की जब्ती की जा रही है. बीजेपी ने चुनाव आयोग से स्पष्ट निर्देश जारी कर फॉर्म 7 की निर्बाध स्वीकृति सुनिश्चित करने की मांग की है.

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BJP की एक प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) से राज्य भर में फॉर्म 7 की निर्बाध स्वीकृति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की गई. पार्टी का दावा है कि कई जिलों में ये प्रक्रिया 'अराजकता' में बदल गई है, जहां स्थानीय प्रशासन और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दबाव में अधिकारी विधिवत भरे हुए फॉर्म स्वीकार करने से इनकार कर रहे हैं.

डराने-धमकाने के आरोप

अपने ज्ञापन में, जिसका शीर्षक 'पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान फॉर्म 7 की निर्बाध जमा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सुधारात्मक उपायों का अनुरोध' है, BJP ने जमीनी स्तर पर गंभीर और अभूतपूर्व स्थिति का जिक्र किया.

पार्टी के अनुसार, फॉर्म 7 जमा करने की कोशिश कर रहे जागरूक मतदाताओं को चुनावी तंत्र के विभिन्न स्तरों पर धमकियों का सामना करना पड़ रहा है.

प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को बताया कि जब मतदाता बूथ या स्थानीय कार्यालय स्तर पर फॉर्म 7 जमा नहीं कर पाते तो वे उच्च अधिकारियों जैसे इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (EROs), सब-डिविजनल ऑफिसर (SDOs) और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट-कम-डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (DEOs) से संपर्क करते हैं. लेकिन मदद के बजाय उन्हें कथित रूप से कार्रवाई  का सामना करना पड़ता है.

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BJP ने लगाए गंभीर आरोप

BJP के गंभीर आरोपों में से एक ये है कि फॉर्म 7 जमा करने में मदद करने वाले आवेदकों और पार्टी कार्यकर्ताओं की अवैध गिरफ्तारियां की जा रही हैं और उनके वाहनों को जब्त किया जा रहा है.

पार्टी का कहना है कि ये कार्रवाई कानून की अनुमति के बिना की जा रही हैं और ये भारत के संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है.

बीजेपी ने ये भी आरोप लगाया कि जिला प्रशासन मतदाता सूची में वैध रूप से सुधार या नाम हटाने की मांग कर रहे मतदाताओं को विश्वास, निष्पक्षता और सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहा है, जिससे एसआईआर प्रक्रिया की विश्वसनीयता कमजोर हुई है.

EC से स्पष्ट निर्देश की मांग

बीजेपी ने इस स्थिति को अत्यंत प्रतिकूल और असुरक्षित बताते हुए चुनाव आयोग से राज्य के सभी ईआरओ और डीईओ को स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की है. पार्टी ने मांग की कि अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि वे संबंधित विधानसभा क्षेत्रों या निर्वाचन क्षेत्रों के पात्र आवेदकों द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित फॉर्म 7 स्वीकार करें, जिनमें मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के मान्यता प्राप्त प्रतिनिधियों के माध्यम से प्रस्तुत किए गए फॉर्म भी शामिल हैं.

प्रतिनिधिमंडल ने तर्क दिया कि आयोग से ऐसी स्पष्टता आवश्यक है, ताकि मनमानी अस्वीकृति रोकी जा सके और मतदाताओं के वैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है.

प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के साथ एक समरी शीट भी सौंपी है, जिसमें विधानसभा वार उन मतदाताओं का विवरण दिया गया है. जिन पर आपत्ति जताई गई है इस दस्तावेज में उन आधारों और तर्कों का भी जिक्र है, जिनके तहत इन नामों को चुनौती दी गई है.

बीजेपी का तर्क है कि ये आपत्तियां वास्तविक मतदाताओं द्वारा उठाई गई हैं और इन्हें दबाने के बजाय कानून के तहत इनकी जांच होनी चाहिए, ताकि मतदाता सूची पारदर्शी बनी रहे.

उधर, इस घटनाक्रम से पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में संशोधन को लेकर चल रही राजनीतिक लड़ाई और तेज हो गई है, जिसमें विपक्ष आगामी चुनावी प्रक्रियाओं से पहले प्रणालीगत पक्षपात और प्रशासनिक तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगा रहा है.

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