पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक आ गए हैं. आपको बता दें कि चुनाव आयोग के शेड्यूल के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के तहत 294 सीटों के लिए वोटिंग दो चरण में आयोजित कराई जाएगी. राज्य में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा.
इस बीच आसनसोल उत्तर सीट पर एक अनोखा राजनीतिक मामला सामने आया है. यहां एक ही नाम- ‘कृष्णेंदु' के तीन-तीन उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतर गए हैं, जिससे सियासी पारा चढ़ गया है. मंगलवार को शीतला इलाके स्थित भाजपा जिला कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह मुद्दा छाया रहा. जिला भाजपा अध्यक्ष देवतनु भट्टाचार्य की मौजूदगी में आसनसोल उत्तर, दक्षिण, जामुड़िया, रानीगंज, कुल्टी और बाराबनी के भाजपा प्रत्याशी मंच पर मौजूद थे.
नाम एक, उम्मीदवार तीन- क्या है मामला?
आसनसोल एसडीएम कार्यालय में नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के दौरान उस वक्त अजीब स्थिति बन गई, जब एक के बाद एक ‘कृष्णेंदु’ नाम पुकारा जाने लगा पहले कृष्णेंदु मुखोपाध्याय, फिर कृष्णेंदु चटर्जी और आखिर में भाजपा उम्मीदवार कृष्णेंदु मुखर्जी. एक ही सीट पर तीन समान नामों के उम्मीदवारों ने न सिर्फ अधिकारियों बल्कि मौजूद लोगों को भी कुछ देर के लिए उलझन में डाल दिया.
भाजपा प्रत्याशी का तंज- ‘डर अच्छा लगा’
इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा उम्मीदवार कृष्णेंदु मुखर्जी ने चुटीले अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नामांकन के वक्त हम खुद कन्फ्यूज हो गए थे कि असली उम्मीदवार कौन है. लेकिन अच्छा हुआ मुकाबला होना चाहिए. उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा कि लगता है ‘कृष्णेंदु’ नाम इतना फेमस हो गया है कि लोगों को यही नाम लेना पड़ रहा है. विरोधियों का डर साफ दिख रहा है- ये डर अच्छा लगा.
‘वोटर को कन्फ्यूज करने की साजिश’
कृष्णेंदु मुखर्जी ने इस पूरे मामले को साजिश करार देते हुए कहा कि यह विपक्ष की सोची-समझी रणनीति है, ताकि मतदाताओं को भ्रमित कर वोटों का बंटवारा किया जा सके. हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि आसनसोल उत्तर के मतदाता पूरी तरह जागरूक हैं. वे नाम नहीं, पार्टी और चुनाव चिन्ह देखकर वोट देंगे.
‘तीन कृष्णेंदु’ के मामले से गरमाई सियासत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत की चुनावी राजनीति में यह कोई नई बात नहीं है. पहले भी कई जगहों पर प्रमुख उम्मीदवारों के नाम से मिलते-जुलते उम्मीदवार खड़े किए गए हैं, ताकि वोट बैंक में सेंध लगाई जा सके.
फिलहाल ‘तीन कृष्णेंदु’ का यह मामला आसनसोल की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है. अब देखना दिलचस्प होगा कि यह सियासी दांव किस पर भारी पड़ता है और 4 तारीख को जनता किस ‘कृष्णेंदु’ पर भरोसा जताती है.
अनिल गिरी