ओवैसी-हुमायूं के गठबंधन से बदलेंगे बंगाल चुनाव के समीकरण! क्या TMC की बढ़ेगी टेंशन?

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है. इससे मुस्लिम वोट बैंक का समीकरण और दिलचस्प हो गया है.

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जनता उन्नयन पार्टी और एआईएमआईएम का गठबंधन बंगाल चुनाव से पहले मुस्लिम वोट बैंक के समीकरण को दिलचस्प बना रहा है. (Photo: PTI) जनता उन्नयन पार्टी और एआईएमआईएम का गठबंधन बंगाल चुनाव से पहले मुस्लिम वोट बैंक के समीकरण को दिलचस्प बना रहा है. (Photo: PTI)

अनुपम मिश्रा

  • कोलकाता,
  • 23 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:42 PM IST

बंगाल चुनाव में हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी और ओवैसी की एआईएमआईएम के साथ चुनाव लड़ने के फैसले ने मुस्लिम वोट बैंक के समीकरण को दिलचस्प बना दिया है. खास तौर पर दो (मालदा, मुर्शिदाबाद) मुस्लिम बहुल जिलों और बीरभूम की कुछ मुस्लिम डॉमिनेटेड सीटों पर मामला दिलचस्प नजर आ रहा है, क्योंकि ओवैसी की पार्टी इन्हीं जगहों को टारगेट में लेकर चुनाव के मैदान में उतर रही है.

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एआईएमआईएम की नजर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, मालदा और बीरभूम पर है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक हुमायूं कबीर एआईएमआईएम को 50 सीट देने के पक्ष में हैं लेकिन पार्टी इससे भी कम सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

इसकी वजह कम सीटों पर ज़्यादा फोकस बताया जा रहा है जो बिहार चुनाव की तर्ज पर है. पार्टी ने बिहार में केवल 29 सीटों पर चुनाव लड़कर 5 सीटें हासिल कर ली थीं.

एआईएमआईएम बंगाल के प्रेसिडेंट इमरान सोलंकी ने बताया कि “पार्टी फिलहाल बंगाल के मुर्शिदाबाद, मालदा और बीरभूम पर ध्यान लगाते हुए चुनाव में उतर रही है. पार्टी की रणनीति एकदम साफ है. कम सीटों पर चुनाव लड़ना और बेहतर रिजल्ट पाना. एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी 25 मार्च को कोलकाता पहुंच रहे हैं और चुनाव के दौरान इन तीन जिलों में चुनाव प्रचार करेंगे”

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अगर मालदा और मुर्शिदाबाद की बात करें तो इन जिलों में काफी दिनों से एआईएमआईएम अपना बेस तैयार करने में लगी हुई थी. बताया जा रहा है कि सालों से पार्टी यहां ग्राउंड वर्क करने में सक्षम हो चुकी है, वहीं मुर्शिदाबाद से सटे बीरभूम के कुछ मुस्लिम बहुल इलाक़ों में भी एआईएमआईएम को लगता है कि उसकी जमीन तैयार हो चुकी है.

ऐसे में अगर एआईएमआईएम हुमायूं कबीर के साथ मिलकर इन जगहों पर अच्छा प्रदर्शन करती है, तो नुकसान सीधे तौर पर तृणमूल को होता दिख रहा है. लेकिन जमीनी स्तर पर देखने से हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी बेहद नई पार्टी है और मुर्शिदाबाद के बेलडांगा और रेजीनगर इलाकों के अलावा हुमायूं कबीर का बेस अभी तैयार नहीं हो पाया है.

ऐसे में ये संशय बना ही हुआ है कि केवल मुर्शिदाबाद, मालदा और बीरभूम की कुछ सीटों के भरोसे तैयार ये गठबंधन ममता बनर्जी के मुस्लिम वोट बैंक में कितनी दरार डाल पाएगा.

टीएमसी को नहीं नुकसान: फिरहाद हाकिम

तृणमूल का कहना है कि इस गठबंधन से उनको कोई नुकसान नहीं होने वाला. टीएमसी के वरिष्ठ नेता फिरहाद हाकिम कहते हैं कि “दोनों ही पार्टियां कम्युनल पार्टी हैं और बंगाल में ममता का चेहरा देखकर चुनाव होता है, ऐसे में टीएमसी को कोई नुकसान नहीं है” साथ ही फिरहाद ने आरोप लगाया कि बीजेपी फंडिंग कर रही है.

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मुर्शिदाबाद जिले में कुल 22 विधानसभा सीटें हैं. पिछले चुनाव में टीएमसी को 20 और बीजेपी को 2 सीटें मिली थीं. वहीं मालदा जिले में कुल 12 सीटें हैं. यहां पिछले चुनाव में बीजेपी को 4 सीटें मिली थीं और टीएमसी को 8 सीटें मिली थीं.

ऐसे में बंगाल चुनाव में हुमायूं कबीर और ओवैसी के गठबंधन ने खास तौर पर इन तीन जिलों में चुनावी समीकरण को दिलचस्प बना दिया है.

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