पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में गहमा-गहमी जारी है. इसी बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने शुक्रवार को अपना घोषणापत्र जारी कर दिया. उन्होंने इसे 'दीदी के 10 संकल्प' के रूप में पेश किया गया है. सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि पार्टी के वादे केंद्र के बढ़ते हस्तक्षेप का मुकाबला करने और बंगाल की पहचान की रक्षा करने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं. राज्य में दो चरणों में मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना 4 मई को होगी.
टीएमसी के घोषणापत्र में कई वादे
टीएमसी के घोषणापत्र के केंद्र में 'दीदी के 10 संकल्प' हैं, जिनमें कल्याणकारी योजनाओं और विकास से जुड़े वादों की मिली-जुली रूपरेखा दिखाई दे रही है. पार्टी ने लक्ष्मी भंडार योजना के तहत आर्थिक सहायता में 500 रुपये की बढ़ोतरी का वादा किया है. इसके तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये और एससी/एसटी वर्ग की महिलाओं को 1,700 रुपये मिलेंगे. इसके अलावा ‘बांग्लार युवा साथी’ योजना के तहत बेरोजगार युवाओं को हर महीने 1,500 रुपये की सहायता जारी रखने की बात कही गई है.
किसानों के लिए कृषि बजट
किसानों के लिए 30,000 करोड़ रुपये का कृषि बजट लाने का भी वादा किया गया है, जिसमें भूमिहीन किसानों को भी शामिल किया जाएगा. घोषणापत्र में हर परिवार को पक्का मकान और सभी घरों तक पाइपलाइन के जरिए पीने का पानी पहुंचाने का वादा किया गया है. स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए हर साल ‘दुआरे चिकित्सा’ शिविर आयोजित करने की योजना भी शामिल है, ताकि लोगों को उनके घर के पास ही इलाज मिल सके.
शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने और बंगाल को पूर्वी भारत के ट्रेड सेंटर के रूप में डिवेलप करने की बात कही गई है. इसके लिए आधुनिक लॉजिस्टिक्स और एक ग्लोबल ट्रेड सेंटर बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है.
वृद्धावस्था पेंशन की भी बात
घोषणापत्र में वृद्धावस्था पेंशन को जारी रखने और इसके दायरे को बढ़ाने का भी वादा किया गया है. प्रशासनिक स्तर पर सात नए जिलों के गठन और शहरी निकायों के विस्तार की भी योजना है. टीएमसी का कहना है कि ये सभी संकल्प अगले पांच वर्षों के शासन की दिशा तय करेंगे.
घोषणापत्र जारी करते हुए ममता बनर्जी ने बीजेपी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र नागरिकों को उनके अधिकारों से वंचित करने की साजिश कर रहा है और राज्य को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है.
उन्होंने चुनाव के बाद संभावित परिसीमन को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि इससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्र में बीजेपी दोबारा सत्ता में नहीं आएगी, क्योंकि 'लोग बीजेपी सरकार को पसंद नहीं करते.'
ममता बनर्जी ने केंद्र पर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को कमजोर करने और कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा, 'रेलवे और अन्य पीएसयू को कुछ लोगों को सौंपा जा रहा है, जिनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो देश को लूटकर भाग चुके हैं.'
चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर अधिकारियों का तबादला किया जा रहा है. “इसकी भी एक सीमा होती है, लेकिन इस बार हर विभाग में अधिकारियों को बदला जा रहा है. अगर लोगों को राशन नहीं मिलेगा तो वे किसके पास जाएंगे?' उन्होंने कहा कि बाहर से आए पर्यवेक्षक राज्य की जमीनी हकीकत से अनजान हैं.
अपने हमले को और तेज करते हुए टीएमसी प्रमुख ने आरोप लगाया कि बंगाल में 'अघोषित राष्ट्रपति शासन' लागू कर दिया गया है. उन्होंने कहा, 'यह अब अघोषित नहीं रहा. मोदी जी ने प्रभावी रूप से बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया है. वे इसे खुलकर नहीं कह रहे, लेकिन उनके काम यही दिखाते हैं. यह शर्मनाक है.'
ममता बनर्जी ने बीजेपी पर बंगाल को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि 'वे नहीं चाहते कि बंगाल इस देश में एक मजबूत राज्य के रूप में बना रहे.' अंत में उन्होंने मतदाताओं से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि यह चुनाव केवल सत्ता का नहीं, बल्कि विचारधारा की लड़ाई है. 'हमें चुनाव तो लड़ना ही है, लेकिन उससे बड़ी लड़ाई देश को बचाने की है. यह समय एकजुट होकर बीजेपी को जवाब देने का है,' उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता इस बार 'करारा जवाब' देगी.
इंद्रजीत कुंडू