तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर माहौल बना हुआ है. इस बीच अभिनेता से नेता बनने की ओर बढ़ रहे विजय (थालापति विजय) और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के रूप में एक नया ‘एक्स-फैक्टर’ उभरकर सामने आया है. तमिल राजनीति में विजय का आना, जनता पर उनके असर की संभावना जैसी बातों को लेकर पूर्व तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष के. अन्नामलाई और कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम के बीच तीखी बहस देखने को मिली. इंडिया टुडे तमिलनाडु राउंडटेबल में दोनों नेताओं ने विजय की लोकप्रियता को स्वीकार किया, लेकिन चुनाव में उनकी वास्तविक भूमिका को लेकर अलग-अलग राय रखी.
तमिलनाडु चुनाव में ‘विजय फैक्टर’
अन्नामलाई ने कहा कि तमिलनाडु की जेन-जी पीढ़ी विजय की ओर अट्रैक्ट हो सकती है, जिन्हें डीएमके बनाम एआईएडीएमके मुकाबले में तीसरे विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि उन्होंने तर्क दिया कि उनका पॉलिटिकल एक्सपीरियंस अभी शुरू ही होगा और इसकी कमी से एनडीए के पक्ष में लाभ हो सकता है. अन्नामलाई ने साफ कहा कि 'विजय एक फैक्टर हैं और हम उन्हें इग्नोर नहीं कर रहे हैं,' उन्होंने यह भी अंडरलाइन किया कि तमिलनाडु के अधिकांश विधायक उम्रदराज हैं और 4-5 बार चुनाव जीत चुके हैं. उन्होंने कहा कि 'जमीनी स्तर पर हल्की एंटी-इंकंबेंसी है. बिहार में प्रशांत किशोर को डार्क हॉर्स माना गया था, लेकिन ‘पीके फैक्टर’ काम नहीं आया,'
क्या बोले कार्ति चिदंबरम?
हालांकि कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की राय इस मामले में कुछ अलग रही. उन्होंने विजय की जनअपील को स्वीकार करते हुए भी इस बात पर संदेह जताया कि क्या अभिनेता अपनी लोकप्रियता को चुनावी सफलता में बदल पाएंगे. चिदंबरम ने कहा कि, 'उनके लिए स्पष्ट उत्साह है. मजबूत पार्टी ढांचे के बिना भी उन्हें काफी वोट मिल सकते हैं. लेकिन वे वोट सीटों में बदलेंगे, इस पर मुझे संदेह है,'
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति ने कहा कि सीट जीतने के लिए मजबूत संगठन और जमीनी ढांचा जरूरी होता है, जो लंबे समय में तैयार होता है और फिलहाल विजय के पास ऐसा ढांचा नहीं है. अब तक विजय ने न तो डीएमके और न ही एआईएडीएमके से गठबंधन किया है और दोनों द्रविड़ दलों की खुलकर आलोचना की है. जहां विजय अपने बड़े प्रशंसक वर्ग और साफ-सुथरी छवि के साथ मैदान में हैं, वहीं करूर भगदड़ की घटना, जिसमें 41 लोगों की मौत हुई थी, उनके चुनावी अभियान पर असर डाल सकती है.
दोनों वरिष्ठ नेताओं ने आगामी हाई-स्टेक चुनावों में अपनी-अपनी पार्टियों की संभावनाओं पर भी खुलकर बात की. कांग्रेस-डीएमके गठबंधन में हाल के दिनों में सीटों की संख्या और सत्ता साझेदारी के मुद्दे पर तनाव देखा गया है. दूसरी ओर बीजेपी विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश में जुटी है. बीजेपी ने एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) के नेतृत्व वाली एआईएडीएमके और टीटीवी दिनाकरन की एएमएमके को फिर से एनडीए में शामिल किया है. पीएमके भी एनडीए का हिस्सा है.
2026 का चुनाव होगा बदलाव का चुनाव
अन्नामलाई ने दावा किया कि 2026 का चुनाव बदलाव का चुनाव होगा और माहौल एनडीए के पक्ष में है. उन्होंने कहा, 'जमीन पर माहौल बिल्कुल साफ है. राजधानी विरोध-प्रदर्शनों का केंद्र बन गई है, डॉक्टर, शिक्षक सब आंदोलन कर रहे हैं. असंतोष की भावना है. ग्रामीण इलाकों में बदलाव की चाह है.' हिंदी थोपे जाने के मुद्दे को खारिज करते हुए अन्नामलाई ने कहा कि बीजेपी तमिल हितों की सेवा करने वाली पार्टी है. दक्षिणी राज्य में बीजेपी के कमजोर आधार को लेकर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु की राजनीति में अपेक्षाकृत नए हैं.
अन्नामलाई ने कहा 'पीएम मोदी के पास पिछले 50 सालों से गांधी उपनाम नहीं था. पिछले 12 वर्षों में उनका धीरे-धीरे परिचय हुआ है,' दूसरी ओर, कार्ति चिदंबरम ने कहा कि तमिलनाडु चुनाव में मोदी कोई बड़ा फैक्टर नहीं हैं और यह चुनाव काफी हद तक ‘राष्ट्रपति चुनाव’ जैसा होता है. 'लोग मुख्यमंत्री चेहरे को देखकर वोट देते हैं,” उन्होंने कहा.
साथ ही उन्होंने एआईएडीएमके प्रमुख ईपीएस को 'आकस्मिक मुख्यमंत्री” करार देते हुए कहा कि वे जयललिता के निधन के बाद सीन में आए. 'उन्होंने कभी चुनाव नहीं जीता. वे लगातार तीन चुनाव हार चुके हैं,'
हालांकि लोकसभा सांसद ने डीएमके-कांग्रेस गठबंधन की संभावनाओं को लेकर सतर्क रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि गठबंधन मामूली अंतर से जीत दर्ज कर सकता है. उन्होंने कहा, 'तमिलनाडु में कांग्रेस और बीजेपी मुख्य खिलाड़ी नहीं हैं. कांग्रेस चुनाव को धर्मनिरपेक्ष छवि देती है, जबकि बीजेपी थोड़ा बोझ बनती है. जमीनी स्तर पर हिंदुत्व की राजनीति को ज्यादा स्वीकार्यता नहीं है.'
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