तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों ने सियासी पंडितों और अधिकांश एग्जिट पोल्स के दावों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है. चेन्नई स्थित द्रमुक (DMK) के मुख्यालय 'अन्ना अरिवालयम' में जो टेंट जीत के जश्न के लिए लगाए गए थे, अब उन्हें उखाड़ा जा रहा है. रुझानों में सत्ताधारी पार्टी के तीसरे नंबर पर खिसकने के साथ ही समर्थकों की भीड़ मायूसी के साथ घर लौटने लगी है.
दरअसल तमिलनाडु की सियासत में एक बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है. अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाकर राज्य की सबसे बड़ी सियासी पार्टी बनकर उभर रही है.
अगर यह रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो विजय तमिलनाडु की राजनीति में वही इतिहास दोहराएंगे जो 1967 में सी.एन. अन्नादुराई और 1977 में एम.जी. रामचंद्रन (MGR) ने रचा था. मुख्यमंत्री स्टालिन खुद अपनी कोलाथुर सीट पर TVK के वी.एस. बाबू से पांच राउंड की काउंटिंग के बार करीब ढ़ाई हजार वोटों से पीछे चल रहे हैं.
वहीं तिरुचिरापल्ली पूर्व सीट से विजय तीन राउंड की गिनती के बाद 5000 से अधिक वोटों से आगे चल रहे हैं. अन्नाद्रमुक (AIADMK) प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी अपनी सीट पर 7003 वोटों की मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं.
DMK का खराब प्रदर्शन उन ज़्यादातर एग्जिट पोल को गलत साबित कर रहा है जिनमें उसे बढ़त मिलने का अनुमान लगाया गया था. इन अनुमानों का आधार मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन द्वारा अपने पांच साल के कार्यकाल में लागू किए गए कई लोकप्रिय कदम और उनका "द्रविड़ मॉडल" था.
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