तमिलनाडु में गुरुवार को हुए विधानसभा चुनाव में एक ऐसा इतिहास बन गया जो पिछले 74 सालों में कभी नहीं बना था. राज्य में 85.14 फीसदी वोटिंग हुई जो अब तक की सबसे ज्यादा है. इससे पहले का रिकॉर्ड 2011 में 78.29 फीसदी का था जो इस बार टूट गया. पूरे राज्य की 234 सीटों पर वोट पड़े और करीब 5.73 करोड़ वोटरों में से 85 फीसदी से ज्यादा लोग घर से निकलकर वोट डालने गए.
तमिलनाडु में गुरुवार को विधानसभा चुनाव हुए. राज्य में कुल 234 विधानसभा सीटें हैं और सभी पर एक ही दिन वोटिंग हुई. शाम 6 बजे वोटिंग का वक्त खत्म हुआ, लेकिन जो लोग 6 बजे से पहले लाइन में लग चुके थे उन्हें भी वोट डालने दिया गया. शाम तक कुल वोटिंग 85.14 फीसदी पर पहुंच गई.
तमिलनाडु में इससे पहले सबसे ज्यादा वोटिंग 2011 में हुई थी जब 78.29 फीसदी लोगों ने वोट डाला था. उस चुनाव में AIADMK की बड़ी जीत हुई थी. उसके बाद 2016 में वोटिंग घटकर 74.81 फीसदी और 2021 में और घटकर 73.63 फीसदी रह गई थी. यानी पिछले दो चुनावों में वोटिंग लगातार कम हो रही थी. लेकिन इस बार एकदम से 85 फीसदी से ऊपर पहुंच गई जो एक बड़ा उछाल है.
वोटर लिस्ट छोटी होने के बावजूद रिकॉर्ड कैसे बना?
ये बात खास और हैरान करने वाली है. इस बार चुनाव से पहले एक खास प्रक्रिया हुई जिसे SIR यानी स्पेशल इंटेंशिव रिविजन कहते हैं. इसमें वोटर लिस्ट की गहरी जांच की गई. इसके बाद जो लोग फर्जी तरीके से लिस्ट में थे या जिनकी जानकारी गलत थी उन्हें हटा दिया गया. इससे अक्टूबर 2025 में 6.41 करोड़ रहे वोटर इस बार घटकर 5.73 करोड़ रह गए. 2021 में तो 6.29 करोड़ वोटर थे यानी इस बार 56 लाख कम वोटर थे. इसके बावजूद वोटिंग का प्रतिशत सबसे ऊंचा रहा.
जिलेवार कहां कितनी वोटिंग हुई?
सबसे ज्यादा वोटिंग सेलम जिले में हुई जहां 88.02 फीसदी लोगों ने वोट डाला. एडप्पड़ी इलाके में 89.09 फीसदी वोटिंग हुई जो सबसे ऊंचे आंकड़ों में से एक है. कोयम्बटूर में 82.33 फीसदी, तिरुचिरापल्ली में 82.76 फीसदी और चेन्नई में 81.34 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई. मदुरई में थोड़ी कम यानी 77.89 फीसदी वोटिंग हुई.
बड़े नेताओं की सीटों पर क्या हुआ?
मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की सीट कोलाथुर में 83.58 फीसदी वोटिंग हुई. उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की सीट चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी में 81.89 फीसदी वोट पड़े.
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AIADMK के नेता एडप्पड़ी के पलानीस्वामी की सीट एडप्पड़ी में 89.09 फीसदी वोटिंग हुई. यहां DMK सीधे मुकाबले में है. इसके अलावा एक्टर विजय की पार्टी तमिलागा वेत्री कझगम ने यहां एक आजाद उम्मीदवार को समर्थन दिया है क्योंकि उनकी पार्टी के उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो गया था.
एक्टर से नेता बने विजय खुद तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. वहां शाम 5 बजे तक 79.32 फीसदी वोटिंग हो चुकी थी.
सुरक्षा का क्या इंतजाम था?
पूरे राज्य में 3.6 लाख से ज्यादा चुनाव कर्मचारी तैनात थे. सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए थे ताकि शांतिपूर्ण तरीके से वोटिंग हो सके.
ये रिकॉर्ड क्यों खास है?
तमिलनाडु के 74 साल के चुनावी इतिहास में ये पहली बार हुआ जब इतने बड़े पैमाने पर लोग वोट डालने निकले. जब वोटर लिस्ट भी छोटी हो और फिर भी रिकॉर्ड वोटिंग हो, तो इसका मतलब है कि लोगों में इस बार चुनाव को लेकर जबरदस्त उत्साह था.
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