तमिलनाडु चुनाव: सीएम स्टालिन का जल्लीकट्टू पर दांव, सर्वश्रेष्ठ बैल ट्रेनर को मिलेगी सरकारी जॉब

तमिलनाडु चुनाव से पहले जल्लीकट्टू के अखाड़े से स्टालिन सरकार ने बड़ा सियासी संदेश दिया है. तमिल अस्मिता के प्रतीक इस खेल को नौकरी से जोड़कर डीएमके ने परंपरा, गौरव और शासन को एक फ्रेम में पेश किया है. यह फैसला सांस्कृतिक सम्मान के साथ चुनावी रणनीति भी माना जा सकता है.

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स्टालिन सरकार पहले भी जल्लीकट्टू के कानूनी संरक्षण पर काम करती रही है (फोटो- X/mkstalin) स्टालिन सरकार पहले भी जल्लीकट्टू के कानूनी संरक्षण पर काम करती रही है (फोटो- X/mkstalin)

aajtak.in

  • मदुरै,
  • 18 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:03 AM IST

तमिलनाडु चुनाव से पहले स्टालिन सरकार ने तमिल अस्मिता के प्रतीक जल्लीकट्टू से जुड़ा बड़ा ऐलान किया है. सीएम स्टालिन ने फैसला किया है कि सर्वश्रेष्ठ बैल प्रशिक्षक को सरकारी नौकरी दी जाएगी.

शनिवार को अलंगनल्लूर में आयोजित प्रसिद्ध जल्लीकट्टू प्रतियोगिता को देखने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन भी पहुंचे थे. यहां सीएम ने जल्लीकट्टू आयोजन में सबसे अधिक बैलों को काबू करने वाले सर्वश्रेष्ठ बैल प्रशिक्षक को पशुपालन विभाग में प्राथमिकता के आधार पर सरकारी नौकरी देने की घोषणा की. माना जा रहा है कि यह जल्लीकट्टू को संरक्षण देने में काफी मददगार साबित हो सकता है.

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उन्होंने यह भी बताया कि अलंगनल्लूर में 2 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक जल्लीकट्टू प्रशिक्षण और उपचार केंद्र स्थापित किया जाएगा.

मुख्यमंत्री ने कहा, 'मदुरै की धरती वीरता के लिए जानी जाती है. विश्व प्रसिद्ध जल्लीकट्टू को देखकर हम भी वीर बन जाते हैं. यहां के बलवान बैल तमिलनाडु का गौरव हैं.' सीएम ने वीरता दिखाने वाले बैल प्रशिक्षकों को सोने की अंगूठियां भी गिफ्ट कीं.

इस प्रतियोगिता के दौरान कम से कम 14 लोग घायल हो गए, जिनमें से 4 को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया.

इससे पहले, हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री का स्वागत करने के लिए जमा हुई भीड़ में एक बैल बेकाबू होकर भागने लगा, जिससे अफरा-तफरी मच गई. हालांकि, उसके मालिकों ने उसे रस्सी से बांधकर वहां से हटा दिया.

बैल मालिकों को सौंपा सोने का सिक्का

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एआईएडीएमके के पूर्व राज्य मंत्री सी विजयभास्कर का बैल, अभिनेता सूरी और श्रीलंकाई राजनेता सेंथिल थोंडाइमन के बैल उन बैलों में शामिल थे जिन्हें रोकना असंभव था. इन सभी बैलों के मालिकों को एक-एक सोने का सिक्का मिला.

अलंगनल्लूर में पोंगल 2026 सीजन के अंतिम आयोजन में लगभग 465 बैल प्रशिक्षकों ने भाग लिया, जहां दिन भर चलने वाले इस आयोजन के दौरान 'वादी वासल' (प्रवेश द्वार) से लगभग 1,000 बैलों को अखाड़े में छोड़ा गया.

19 बैलों को काबू किया, इनाम में मिली कार

मदुरई के करुपायुरानी इलाके के कार्तिक ने 19 बैलों को काबू किया. उन्हें सर्वश्रेष्ठ बैल प्रशिक्षक घोषित किया गया और प्रथम पुरस्कार के रूप में एक कार दी गई.

शिवगंगा जिले के पूवंती गांव के अबी सिद्धार ने 17 बैलों को वश में करने के लिए साइकिल का दूसरा पुरस्कार जीता, जबकि मदुरै के पासिंगपुरम के श्रीधर ने 11 बैलों को काबू करके तीसरा पुरस्कार - एक ई-बाइक जीती.

बालमुरुगन, जिसके बैल को किसी ने भी काबू में करने की हिम्मत नहीं की, ने ट्रैक्टर का प्रथम पुरस्कार जीता.

इस साल का पहला जल्लीकट्टू 3 जनवरी को पुदुक्कोट्टई जिले के थाचनकुरिची गांव में आयोजित किया गया था, जिसमें लगभग 600 बैल और 300 वश में करने वालों ने भाग लिया था.

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