असम के गुवाहाटी में आयोजित कार्यक्रम पंचायत आजतक असम के दौरान असम में घुसपैठिया के मुद्दे पर चर्चा हुई. विवंता होटल में आयोजित इस विचार विमर्श में असम चुनाव से पहले राज्य के कई मुद्दों पर चर्चा हुई. इस मौके पर सेशन 'असम का चुनाव, घुसपैठिया दांव' में ये मुद्दा गहराया. जहां प्रियंका तामुली, डॉ. समुज्जवल भट्टाचार्य, मेजर जनरल (रिटार्यड) भास्कर कलीता ने शिरकत की.
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि असम में घुसपैठ लंबे समय से समस्या है. कांग्रेस के शासनकाल में बॉर्डर सुरक्षा कमजोर थी, जिससे लाखों लोग आसानी से घुस आए. उन्होंने दावा किया कि असम की 126 विधानसभा सीटों में से 22 पहले ही अल्पसंख्यकों के कब्जे में चली गई हैं और अल्पसंख्यक आबादी 40% तक पहुंच चुकी है. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के नेतृत्व में अब तक 1.6 लाख बीघा (लगभग 50,000 एकड़) सरकारी और वन भूमि से अतिक्रमण हटाया गया है. उन्होंने जोर दिया कि यह मुद्दा हिंदू-मुस्लिम का नहीं, बल्कि बांग्लादेशी मूल के अवैध घुसपैठियों का है, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम हैं, लेकिन भारत सेक्युलर देश है. 1971 से पहले आए लोगों को नागरिकता मिल सकती है, लेकिन उसके बाद आए लोगों को नहीं.
AASU के डॉ. समजुल भट्टाचार्य ने असम आंदोलन की याद दिलाई, जिसमें 6 साल तक संघर्ष हुआ और समझौता हुआ. उन्होंने कहा कि समझौते के अनुसार 1971 के बाद आए लोगों को डिटेक्ट, डिलीट (वोटर लिस्ट से नाम हटाना) और डिपोर्ट करना है. लेकिन 46 साल बाद भी कुछ खास नहीं हुआ. उन्होंने 9 सूत्री फॉर्मूला सुझाया: असम समझौते की सभी धाराओं को समयबद्ध तरीके से लागू करना, बॉर्डर सील करना (केवल 263 किमी बॉर्डर है), संवैधानिक और आर्थिक सुरक्षा देना, एनआरसी अपडेट करना, वन भूमि से अतिक्रमण हटाना और अवैध बांग्लादेशियों व कट्टरपंथी समूहों के खिलाफ विशेष अभियान चलाना. उन्होंने कहा कि असम में इंडिजिनस लोगों की पहचान, भाषा और संस्कृति बचाने की लड़ाई अन्य राज्यों में नहीं दिखती.
पैनल में शामिल अमीनुल ने कहा कि घुसपैठ का मुद्दा चुनावी समय पर ही उछाला जाता है. एनआरसी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बना, लेकिन उसमें भी गड़बड़ियां हैं. 19 लाख लोगों के नाम बाहर रह गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं. उन्होंने तर्क दिया कि घुसपैठियों को कानूनी प्रक्रिया से निकालना चाहिए, हिंसक तरीके से नहीं. CAA को असम समझौते का उल्लंघन बताया, क्योंकि उत्तर-पूर्व के कई इलाकों को इससे छूट मिली, लेकिन असम के 27 जिलों में लागू है. उन्होंने कहा कि डेमोग्राफिक चेंज की बात अतिशयोक्ति है; जनसंख्या वृद्धि गरीबी, अशिक्षा से जुड़ी है, न कि सिर्फ घुसपैठ से.
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