तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल (पहले चरण) के कुल 386 विधानसभा क्षेत्रों में से 201 सीटों पर तीन या उससे अधिक ऐसे उम्मीदवार हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. यह आंकड़ा चुनावी राजनीति में धनबल और बाहुबल की भूमिका पर फिर सवाल खड़े करता है.
तमिलनाडु में दो प्रमुख गठबंधनों द्वारा उतारे गए 10 में से 9 उम्मीदवार करोड़पति हैं. वहीं पश्चिम बंगाल के पहले चरण में बीजेपी के 152 उम्मीदवारों में से लगभग दो-तिहाई गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं.
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने भारत के निर्वाचन आयोग को दिए गए 5,467 उम्मीदवारों के हलफनामों का विश्लेषण किया. इनमें से 1,290 उम्मीदवारों ने अपनी संपत्ति 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक घोषित की, जबकि 1,067 उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज पाए गए.
तमिलनाडु में 234 में से 135 सीटें 'रेड अलर्ट' कैटेगरी में आती हैं, जहां तीन या उससे अधिक उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले हैं. वहीं बंगाल के पहले चरण में 152 में से 66 सीटें इस कैटेगरी में हैं.
धनबल के मामले में तमिलनाडु के ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) गठबंधन के 94% और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) गठबंधन के 93% उम्मीदवार करोड़पति हैं. अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) 68% करोड़ती उम्मीदवारों के साथ तीसरे स्थान पर है.
पश्चिम बंगाल में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) गठबंधन के 72% उम्मीदवार करोड़पति हैं, जबकि बीजेपी के 47% और इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) के 33% उम्मीदवार करोड़पति हैं.
तमिलनाडु में AIADMK गठबंधन के उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 44.2 करोड़ रुपये है, हालांकि एक उम्मीदवार द्वारा घोषित 5,863 करोड़ रुपये की संपत्ति इस औसत को काफी बढ़ाती है. मीडियन के आधार पर यह आंकड़ा करीब 7-7.4 करोड़ रुपये है, जो ज्यादा वास्तवित तस्वीर पेश करता है.
आपराधिक मामलों में पश्चिम बंगाल में स्थिति ज्यादा गंभीर दिखती है. बीजेपी के 63% उम्मीदवारों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि टीएमसी और लेफ्ट गठबंधन क्रमशः 32% और 37% के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं. कांग्रेस के 22% उम्मीदवारों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.
महिलाओं की भागीदारी दोनों राज्यों में 11% के करीब है. हालांकि तमिलनाडु की नाम तमिलर कच्ची (NTK) ने 49.6% टिकट महिलाओं को देकर अलग मिसाल पेश की है. ADR के पिछली रिपोर्ट के मुताबिक, करोड़पति उम्मीदवारों के जीतने की संभावना गैर-करोड़पतियों की तुलना में 5-8 गुना अधिक होती है, जबकि आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों की जीत की दर भी साफ-सुथरी छवि वाले उम्मीदवारों से लगभग दोगुनी होती है.
डेटा यह भी बताता है कि तमिलनाडु के लगभग हर मतदाता के सामने करोड़पति उम्मीदवार है, जबकि पश्चिम बंगाल के पहले चरण में हर तीन में से एक उम्मीदवार पर गंभीर आपराधिक मामला दर्ज है.
यह पूरा विश्लेषण 2003 के उस कानून के कारण संभव हुआ, जिसके तहत हर उम्मीदवार को अपने आपराधिक मामलों और संपत्ति का खुलासा हलफनामे में करना अनिवार्य है. यही पारदर्शिता चुनावी व्यवस्था की असली तस्वीर सामने लाती है.
दीपू राय