'BJP इतनी बेताब क्यों है?' अफसरों के तबादले को CM ममता ने बताया लोकतंत्र पर हमला

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव से ठीक पहले 50 से अधिक अधिकारियों के तबादले को लेकर चुनाव आयोग और बीजेपी पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने इसे 'अघोषित आपातकाल' बताते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी हार के डर से संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है. ममता ने इसे बंगाल के प्रशासन को कमजोर करने की साजिश बताया है, जबकि आयोग का कहना है कि ये बदलाव निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जरूरी हैं.

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बंगाल को निशाना बना रहा चुनाव आयोग- सी्एम ममता का बड़ा हमला (Photo: X@AITCofficial/PTI) बंगाल को निशाना बना रहा चुनाव आयोग- सी्एम ममता का बड़ा हमला (Photo: X@AITCofficial/PTI)

इंद्रजीत कुंडू

  • कोलकाता,
  • 19 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:14 PM IST

पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल क्या बजा, राज्य की सियासत में मानों जबरदस्त खलबली मच गई है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस वक्त बेहद गुस्से में हैं और उनका यह गुस्सा सीधे चुनाव आयोग पर फूटा है. दरअसल, चुनाव आयोग ने हाल ही में बंगाल में प्रशासन के बड़े पदों पर भारी फेरबदल किया है, जिसे लेकर सीएम ममता ने मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि चुनाव आयोग जिस तरह से बंगाल को निशाना बना रहा है, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया. उनके मुताबिक, यह सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि राजनीति का सबसे निचला स्तर है.

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ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विवटर) पर पोस्ट करके अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने हैरानी जताई कि अभी चुनाव की प्रक्रिया ठीक से शुरू भी नहीं हुई है और उससे पहले ही राज्य के 50 से अधिक बड़े अधिकारियों का तबादला कर दिया गया. इसमें मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और कई जिलों के मजिस्ट्रेट (DM) और SP शामिल हैं. उनका कहना है कि इन अधिकारियों को बिना किसी ठोस वजह या सूचना के मनमाने ढंग से हटाया गया है, जो राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को हिलाने की एक सोची-समझी साजिश है.

इस पूरे विवाद की जड़ में वो बड़े तबादले हैं जो पिछले कुछ दिनों में हुए. डीजीपी पीयूष पांडे की जगह सिद्ध नाथ गुप्ता को लाया गया और मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को हटाकर दुष्यंत नारियाला को जिम्मेदारी दी गई. इतना ही नहीं, कोलकाता पुलिस कमिश्नर समेत कई आईजी और डीआईजी स्तर के अफसरों को भी इधर-उधर कर दिया गया है. सीएम ममता ने इसे 'संविधान पर सीधा हमला' करार देते हुए कहा है कि जो संस्थाएं निष्पक्ष रहने के लिए बनाई गई थीं, उनका अब पूरी तरह से राजनीतिकरण कर दिया गया है.

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'बीजेपी हार के डर से संस्थाओं को बना रही ढाल'

अपनी बात को और धार देते हुए CM ममता ने इसे अघोषित आपातकाल और एक तरह इनडायरेक्टली राष्ट्रपति शासन जैसा बताया है. TMC प्रमुख ने सीधे बीजेपी पर निशाना साधते हुए पूछा, 'आखिर बीजेपी इतनी बेताब क्यों है?' उनका आरोप है कि जब बीजेपी बंगाल की जनता का भरोसा नहीं जीत पाई, तो अब वह सरकारी संस्थाओं, एजेंसियों और चुनाव आयोग के जरिए पिछले दरवाजे से राज्य पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है. उनके मुताबिक, आईबी, एसटीएफ और सीआईडी जैसी महत्वपूर्ण एजेंसियों के अफसरों को चुन-चुनकर राज्य से बाहर भेजा जा रहा है ताकि बंगाल के प्रशासन को कमजोर बनाया जा सके.

ममता ने उन अधिकारियों और उनके परिवारों के प्रति अपना पूरा समर्थन जताया है, जिन्हें इस फेरबदल की गाज झेलनी पड़ी है. उन्होंने कहा कि वो उन अफसरों के साथ चट्टान की तरह खड़ी हैं जिन्हें सिर्फ इसलिए सजा दी जा रही है क्योंकि उन्होंने ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभाई. इतना ही नहीं ममता बनर्जी ने यह भी सवाल उठाया कि जब राज्य में एक संवेदनशील चुनावी प्रक्रिया चल रही है और कई लोगों की जान जा चुकी है, ऐसे में चुनाव आयोग का यह एकतरफा रुख बंगाल के लोगों को और भी ज्यादा खतरे में डाल रहा है.

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दूसरी तरफ, चुनाव आयोग का कहना है कि ये सभी बदलाव चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करने के बाद किए गए हैं ताकि मतदान पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हो सके. आयोग ने राज्य सरकार को इन निर्देशों का तुरंत पालन करने को कहा है. लेकिन तृणमूल कांग्रेस का रुख साफ है कि यह सब केंद्र सरकार के इशारे पर हो रहा है. बता दें कि बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होनी है और नतीजे 4 मई को आएंगे. जैसे-जैसे वोटिंग की तारीख नजदीक आ रही है, बंगाल की सियासी जंग और भी ज्यादा तीखी होती जा रही है.

'आयोग ने पार कर दीं मर्यादा की सारी सीमाएं, लोकतंत्र का बना रहे मजाक'

ममता बनर्जी ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक और पत्र भेजकर आयोग के कामकाज पर हैरानी जताई है. इस चिट्ठी में साफ कहा गया है कि चुनाव आयोग का रवैया पूरी तरह पक्षपातपूर्ण लग रहा है और ऐसा प्रतीत होता है जैसे वे किसी खास एजेंडे के तहत काम कर रहे हैं. टीएमसी प्रमुख ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट की जांच (SIR प्रक्रिया) में पहले ही काफी गड़बड़ियां थीं, जिसे ठीक कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाना पड़ा. अब जब कोर्ट के आदेश लागू होने की बारी आई, तो आयोग ने जल्दबाजी में राज्य के सबसे अनुभवी अफसरों का तबादला कर दिया. बंगाल सरकार का सवाल है कि जब इन अधिकारियों के खिलाफ कोई शिकायत नहीं थी, तो बिना किसी ठोस वजह के उन्हें हटाना क्या लोकतंत्र का मजाक उड़ाना नहीं है?

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चिट्ठी में एक और बड़ी चिंता भयंकर तूफानों को लेकर जताई गई है, जिसका खतरा मार्च और अप्रैल के महीनों में बंगाल में सबसे ज्यादा रहता है. राज्य प्रशासन का मानना है कि ऐसे संकट के समय में अनुभवी अफसरों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, लेकिन आयोग ने उन्हें राज्य से बाहर भेज दिया है. बाहर से आए नए अधिकारी यहां की भाषा, भूगोल और स्थानीय संवेदनशीलता से वाकिफ नहीं हैं, जिससे किसी भी आपदा या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में काम पूरी तरह ठप हो सकता है. मुख्यमंत्री ममता ने चेतावनी दी है कि अगर कोई प्रशासनिक चूक होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी चुनाव आयोग की होगी. 

दूसरी तरफ, चुनाव आयोग का कहना है कि ये सभी बदलाव चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करने के बाद किए गए हैं ताकि मतदान पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हो सके. आयोग ने राज्य सरकार को इन निर्देशों का तुरंत पालन करने को कहा है. लेकिन तृणमूल कांग्रेस का रुख साफ है कि यह सब केंद्र सरकार के इशारे पर हो रहा है. बता दें कि बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होनी है और नतीजे 4 मई को आएंगे. जैसे-जैसे वोटिंग की तारीख नजदीक आ रही है, बंगाल की सियासी जंग और भी ज्यादा तीखी होती जा रही है.

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