केरल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे तो 4 मई को घोषित किए जाएंगे, लेकिन 'एक्सिस माय इंडिया' (Axis My India) के एग्जिट पोल ने उससे पहले ही राज्य की सियासी तस्वीर को साफ कर दिया है. इस पोल के चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, केरल में इस बार सत्ता परिवर्तन की लहर दिखाई दे रही है, जहां कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF गठबंधन को 78 से 90 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है. यदि ये आंकड़े सही साबित होते हैं, तो केरल की जनता ने एक बार फिर अपनी पुरानी परंपरा को कायम रखते हुए विपक्षी गठबंधन को सत्ता की चाबी सौंपी है.
दूसरी ओर, लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का सपना देख रहे सत्ताधारी वामपंथी गठबंधन (LDF) के लिए ये रुझान काफी निराशाजनक हो सकते हैं. वहीं, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले NDA के लिए राज्य में इस बार भी राह आसान नहीं दिख रही है और उसे मात्र 0 से 3 सीटें मिलने का ही अनुमान है. कुल मिलाकर, 'एक्सिस माय इंडिया' के ये आंकड़े इशारा कर रहे हैं कि पिनाराई विजयन की हैट्रिक की उम्मीदों को बड़ा झटका लग सकता है और केरल में एक बार फिर कांग्रेस गठबंधन की धमाकेदार वापसी हो सकती है.
वर्तमान सत्ताधारी वामपंथी गठबंधन (LDF) को इस बार केवल 50 से 60 सीटें मिलने का अनुमान है, जो पिछले चुनाव (2021) की 99 सीटों के मुकाबले काफी कम है. यह एग्जिट पोल केरल की सभी 140 विधानसभा सीटों पर 24,419 लोगों के साथ किए गए आमने-सामने के साक्षात्कार पर आधारित है. UDF को ईसाई (60%) और मुस्लिम (63%) समुदायों का भारी समर्थन मिलता दिख रहा है, जबकि LDF को SC (57%) और एझवा (47%) समुदायों में बढ़त हासिल है.
9 अप्रैल को हुआ था केरल में मतदान
केरल में 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को सभी 140 सीटों पर एक ही साथ वोट डाले गए थे. इस बार केरल में 78% से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया, जिसमें महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. चुनाव के मैदान में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी LDF (वामपंथी गठबंधन) और कांग्रेस की अगुवाई वाले UDF के बीच रहा, जहां मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन अपनी सरकार के कामों के दम पर लगातार तीसरी बार जीत की हैट्रिक लगाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं विपक्षी कांग्रेस गठबंधन इस उम्मीद में है कि जनता पुरानी परंपरा के हिसाब से इस बार उन्हें मौका देगी.
केरल विधानसभा चुनाव 2026 में वोटिंग के जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने पिछले करीब 5 दशक का रिकॉर्ड तोड़ दिया. इस बार राज्य में 78.27 प्रतिशत मतदान हुआ, जो 1977 के बाद अब तक की दूसरी सबसे बड़ी वोटिंग है. केरल के चुनावी इतिहास में सबसे अधिक मतदान का रिकॉर्ड साल 1977 में बना था, जब 79.2 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था.
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केरल के चुनावी सफर पर नजर डालें तो आजादी के बाद 1957 में राज्य के पहले चुनाव हुए थे, जिसमें 65 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. तब से लेकर अब तक मतदान के प्रतिशत में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन इस बार की भारी वोटिंग ने राजनीतिक पंडितों को भी हैरान कर दिया है. 1977 के बाद पहली बार मतदान का ग्राफ इस स्तर तक पहुंचा है
2021 में क्या था नतीजा
अगर 2021 के चुनावों की बात करें, तो केरल में कुछ ऐसा हुआ था जो पिछले 40-45 सालों में नहीं हुआ था. वहां LDF (वामपंथी गठबंधन) ने इतिहास रचते हुए लगातार दूसरी बार सत्ता पर कब्जा जमाया. 1977 के बाद से केरल में रिवाज था कि हर पांच साल में सरकार बदल जाती थी, लेकिन इस बार जनता ने उस परंपरा को तोड़ दिया.
LDF ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 99 सीटें जीतीं, जो कि पिछले चुनाव से 8 सीटें ज्यादा थीं. वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF गठबंधन पिछड़ गया और उसे सिर्फ 41 सीटें मिलीं. बीजेपी की अगुवाई वाले NDA के लिए तो यह चुनाव काफी मायूसी भरा रहा था, क्योंकि उनका वोट शेयर भी गिरा और जो एक इकलौती सीट उनके पास थी, वो भी हाथ से निकल गई थी.
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