तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक मोनिरुल इस्लाम ने मुर्शिदाबाद के फरक्का में चुनाव आयोग के साथ हुए विवाद को लेकर औपचारिक रूप से माफी मांग ली है. यह तनाव 14 जनवरी को उस समय शुरू हुआ, जब बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के सामूहिक इस्तीफे के बाद मोनिरुल इस्लाम के नेतृत्व में टीएमसी समर्थक फरक्का के बीडीओ (BDO) कार्यालय पहुंचे. प्रदर्शन के दौरान स्थिति बेकाबू हो गई. चुनाव आयोग के कार्यालय में फर्नीचर पलट दिया गया, फाइलें बिखेर दी गईं और अधिकारियों से तीखी बहस हुई.
इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया. पार्टी नेतृत्व ने उनकी रिहाई के बाद उनका स्वागत भी किया. हालांकि, शुरुआती पुलिस रिपोर्ट में विधायक मोनिरुल इस्लाम का नाम शामिल नहीं किया गया था. मामला 19 जनवरी को और गंभीर हो गया, जब टीएमसी विधायक के आवास के बाहर गरीबों को कंबल वितरित किए जाने के दौरान मोनिरुल इस्लाम ने चुनाव आयोग को लेकर तीखी और विवादास्पद टिप्पणियां कीं.
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उनके भाषण का वीडियो सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर वायरल हो गया, जिसके बाद चुनाव आयोग ने मुर्शिदाबाद के स्थानीय प्रशासन को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए. कानूनी दबाव बढ़ने के बीच, मोनिरुल इस्लाम ने शुक्रवार को जंगीपुर के उप-जिलाधिकारी (SDO) को एक पत्र सौंपकर माफी मांगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका किसी भी संवैधानिक संस्था का अपमान करने का इरादा नहीं था. वहीं स्थानीय टीएमसी नेताओं का कहना है कि मोनिरुल इस्लाम ने जो भी किया वह जनहित में था.
बीडीओ जुनैद अहमद द्वारा दर्ज कराई गई लिखित शिकायत में कहा गया कि दोपहर लगभग 1:30 बजे, अज्ञात व्यक्तियों के एक समूह ने कई सरकारी कमरों में धावा बोल दिया और बीएलओ, जॉइंट बीडीओ, चुनाव अधिकारी और अन्य सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (AEROs) की उपस्थिति में सरकारी संपत्ति में तोड़फोड़ की. इस अफरा-तफरी के दौरान, एक एईआरओ आत्मरक्षा करने के प्रयास में चोटिल हो गया.
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भाजपा ने आरोप लगाया कि हिंसा राजनीतिक रूप से प्रेरित थी. पार्टी ने कहा, 'ममता बनर्जी राज्य भर में अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को दंगा करने, हिंसा करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसा रही हैं. ये सभी कार्य ममता बनर्जी के निर्देशों पर किए जा रहे हैं.' भाजपा ने आरोप लगाया कि फरक्का बीडीओ कार्यालय में तोड़फोड़ और हिंसा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की देखरेख में हुई है.
तपस सेनगुप्ता