कोलकाता में CEC ज्ञानेश कुमार का विरोध, SIR मुद्दे को लेकर TMC वर्कर्स ने दिखाए काले झंडे

भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान कोलकाता में विरोध प्रदर्शन हुआ और कुछ लोगों ने काले झंडे दिखाए. वह आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के लिए तीन दिन के दौरे पर यहां आए हैं.

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भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार बंगाल चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करने राज्य के तीन दिवसीय दौरे पर गए हैं. (File Photo: PTI) भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार बंगाल चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करने राज्य के तीन दिवसीय दौरे पर गए हैं. (File Photo: PTI)

अनुपम मिश्रा

  • कोलकाता,
  • 08 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:47 PM IST

भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार रविवार को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने पश्चिम बंगाल के दौरे पहुंचे. इस दौरान विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त कोलकाता एयरपोर्ट से अपने होटल की ओर जा रहे थे, तब तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए और ईसीआई के खिलाफ नारेबाजी की.

मुख्य निर्वाचन आयुक्त तीन दिन के दौरे पर कोलकाता पहुंचे हैं, जहां वह आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की बैठक में हिस्सा लेंगे. विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में तैनात सुरक्षा कर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड लगाकर सड़क से दूर रखा, जिससे उनका काफिला सुरक्षित तरीके से होटल तक पहुंच सका.

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प्रदर्शन का नेतृत्व तापस चटर्जी ने किया. उन्होंने कहा कि यह विरोध पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ किया गया और इसमें विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए. इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी भाजपा और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव के समय बंगाल में सांप्रदायिक राजनीति करने की कोशिश करती है. 

गवर्नर को इस्तीफे के लिए मजबूर किया गया: ममता

ममता ने कहा कि कुछ लोग यह आरोप लगाते हैं कि उन्होंने राज्य में मुसलमानों को बसाया है, जबकि वे विभाजन से पहले से यहां रह रहे हैं. मुख्यमंत्री ने भाजपा पर इतिहास भूलने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें देश के स्वतंत्रता आंदोलन और महात्मा गांधी के योगदान को भी याद रखना चाहिए. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पूर्व राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस को पद छोड़ने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा और इसकी जांच होनी चाहिए. ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार की मुख्य मांग यह है कि राज्य के सभी वास्तविक मतदाताओं का वोटिंग अधिकार सुनिश्चित किया जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, जिसे बंगाल की जनता स्वीकार नहीं करेगी. 

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यह भी पढ़ें: 'राष्ट्रपति खड़ी हैं और आप...', पुरानी तस्वीर दिखाकर CM ममता बनर्जी का PM मोदी पर​ पलटवार

ममता बनर्जी ने कहा, 'वे कह रहे हैं कि मैं बंगाल में मुसलमानों को ले आई हूं. सुनो, वे विभाजन से पहले से यहां रह रहे हैं. मैंने देश का विभाजन नहीं किया. मैं तो तब पैदा भी नहीं हुई थी. भाजपा से पूछो, उस समय वह कहां थी? तुम तो अंग्रेजों की दलाली कर रहे थे. गांधी जी को किसने मारा? उनके दिमाग में कोई मानसिक समस्या है. वे सारा इतिहास भूल चुके हैं. वे गांधी जी को भी भूल गए. उन्होंने नरेगा का नाम मिटा दिया, जबकि गांधी जी गुजराती थे.'

उन्होंने आगे कहा, 'राज्यपाल को क्यों जाना पड़ा? क्या इसकी जांच की जरूरत नहीं है? धनखड़ क्यों चले गए? क्या जांच की जरूरत नहीं है? हमें अनुमति दीजिए, हमारी सीआईडी ​​इस मामले की जांच करेगी. सी.वी. आनंद बोस बागडोगरा में राष्ट्रपति का स्वागत करने वाले थे, लेकिन उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया. वे (BJP) कुछ लोगों को धमकी दे रहे हैं कि उन पर महाभियोग लगा देंगे, लेकिन इतने बहुमत के साथ आप महाभियोग कैसे लगाएंगे? हमारी एकमात्र मांग है कि असली मतदाताओं को वोट डालने दिया जाए. आप यहां शांति से हमारे कारण रह रहे हैं. अगर एक दिन ऐसा आया जब हम नहीं रहे, तो एक समुदाय एकजुट होकर आपका घेराव करेगा. वे आपको पल भर में नष्ट कर देंगे.'

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