बीट रिपोर्ट: बंगाल में न छप्पा, न बूथ जैमिंग, 2021 की हिंसा से सबक लेकर EC का बड़ा प्लान

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के लिए चुनाव आयोग ने जीरो टॉलरेंस की रणनीति तैयार की है. 2021 की हिंसा से सबक लेते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साफ कर दिया है कि इस बार न छप्पा चलेगी और न ही बूथ जैमिंग. मकसद सिर्फ एक है कि बंगाल का हर वोटर बिना किसी डर या दबाव के मतदान कर सके.

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बिना किसी डर या लालच के मतदान सुनिश्चित करना आयोग का लक्ष्य (Photo: ITG) बिना किसी डर या लालच के मतदान सुनिश्चित करना आयोग का लक्ष्य (Photo: ITG)

ऐश्वर्या पालीवाल

  • कोलकाता,
  • 21 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:17 PM IST

पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज है, लेकिन इस बार चुनाव आयोग पूरी तरह सख्त अंदाज में नजर आ रहा है. 2021 के चुनाव में हुई हिंसा, तोड़फोड़ और डर के माहौल को देखते हुए आयोग ने साफ कर दिया है कि इस बार उसका सबसे बड़ा लक्ष्य हर वोटर को बिना किसी डर के मतदान का मौका देना है.

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि इस बार चुनाव में न 'छप्पा' यानी फर्जी वोटिंग होगी और न ही 'बूथ जैमिंग' यानी बूथ पर कब्जा होने दिया जाएगा. आयोग का कहना है कि निष्पक्ष चुनाव ही लोकतंत्र की असली पहचान है और 2021 जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति किसी भी हाल में नहीं होने दी जाएगी. इस बार चुनाव आयोग की रणनीति पूरी तरह बदली हुई है. अब फोकस घटना होने के बाद कार्रवाई करने पर नहीं, बल्कि पहले से रोकथाम करने पर है. इसके लिए सुरक्षा बलों की पहले से तैनाती, संवेदनशील इलाकों की पहचान और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है. आयोग का साफ संदेश है कि चुनावी प्रक्रिया में डर, हिंसा और दबाव के लिए कोई जगह नहीं होगी.

तबादलों की जंग और जीरो टॉलरेंस वाला 'हंटर'

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चुनाव से पहले बंगाल में प्रशासनिक लेवल पर एक बड़ी 'जंग' भी देखने को मिली है. राज्य सरकार ने अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच करीब 1,370 अफसरों का ट्रांसफर किया है, जिसमें आईएएस, आईपीएस, वेस्ट बंगाल सिविल सर्विस और वेस्ट बंगाल पुलिस सर्विस के अधिकारी शामिल हैं. इसके जवाब में चुनाव आयोग ने भी प्रोटोकॉल के तहत करीब 500 अधिकारियों का ट्रांसफर किया है ताकि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता बनी रहे.  इतना ही नहीं, आयोग ने अधिकारियों को यह भी सख्त निर्देश दिए हैं कि 'सोर्स जैमिंग' यानी वोटर तक सही जानकारी पहुंचने में किसी भी तरह की बाधा या गुमराह करने की कोशिश को पूरी तरह रोका जाए. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि सरकारी विभागों, पीएसयू, ऑटोनॉमस बॉडी और स्थानीय निकायों के कर्मचारी किसी भी राजनीतिक गतिविधि या चुनावी प्रभाव में शामिल न हों.

वहीं, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान पहले ही कर ली गई है और वहां केंद्रीय बलों की तैनाती भी शुरू कर दी गई है. हर इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है और लगातार अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें की जा रही हैं ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी समय रहते रोकी जा सके.

कुल मिलाकर चुनाव आयोग का पूरा फोकस इस बात पर है कि हर मतदाता बिना किसी डर, दबाव या लालच के मतदान कर सके. 2021 के कड़वे अनुभवों से सीख लेते हुए आयोग ने 2026 के लिए पहले से सख्त और व्यापक व्यवस्था तैयार की है, ताकि पश्चिम बंगाल में चुनाव शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो सके.
 

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