असम की सियासत में चुनाव से पहले बड़ा उलटफेर हुआ है. हिमंता सरकार में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री नंदिता गरलोसा रविवार को औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल हो गईं. भाजपा द्वारा टिकट न दिए जाने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया है. अब वह कांग्रेस के टिकट पर अपनी मौजूदा सीट हाफलोंग (Haflong) से चुनाव लड़ेंगी.
कांग्रेस के बयान के मुताबिक, पहले इस सीट से पार्टी ने अपने राज्य महासचिव निर्मल लांगथासा को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्होंने “जनहित” में अपना टिकट नंदिता गरलोसा के लिए छोड़ दिया. पार्टी ने कहा कि गरलोसा पिछले पांच साल से दीमा हसाओ की आवाज रही हैं और उन्होंने हमेशा अपने सिद्धांतों पर राजनीति की है.
गरलोसा असम सरकार में खेल और युवा कल्याण मंत्री थीं और वह मौजूदा विधानसभा में हाफलोंग सीट का प्रतिनिधित्व कर रही थीं. इस बार भाजपा ने उनकी जगह नए चेहरे रुपाली लांगथासा को टिकट दिया, जिसके बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी.
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कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नंदिता को भाजपा में अपनी सिद्धांतों पर अडिग रहने की कीमत चुकानी पड़ी. पार्टी ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा आदिवासियों की जमीन बड़े कॉरपोरेट्स को बेचने में रुचि रखती है. बता दें कि भाजपा ने इस बार गार्लोसा की जगह नए चेहरे रूपाली लांगथासा को हाफलोंग से मैदान में उतारा है.
दिलचस्प बात यह है कि रविवार को ही मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाफलोंग जाकर नंदिता गार्लोसा से उनके घर पर मुलाकात की थी, लेकिन यह बैठक बेनतीजा रही और उन्होंने कुछ ही घंटों बाद कांग्रेस का हाथ थाम लिया.
असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई को होगी. ऐसे में नंदिता गरलोसा का कांग्रेस में शामिल होना और हाफलोंग से चुनाव लड़ना इस सीट पर मुकाबले को दिलचस्प बना सकता है.
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