पंचायत आजतक असम 2026 का आगाज... मंच पर दी गई सिंगर जुबिन गर्ग को श्रद्धांजलि

असम में चुनाव से पहले पंचायत आजतक कार्यक्रम का आगाज हो गया है, जिसमें असम के राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा हो रही है. कार्यक्रम की शुरुआत मशहूर सिंगर जुबिन गर्ग को श्रद्धांजलि देकर हुई.

Advertisement
पंचायत आजतक असम के मंच पर शिरकत करने पहुंचीं सिंगर जुबिन गर्ग की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग पंचायत आजतक असम के मंच पर शिरकत करने पहुंचीं सिंगर जुबिन गर्ग की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:57 PM IST

असम में चुनाव से पहले पंचायत आजतक का आगाज हो गया है. इस कार्यक्रम में असम के राजनीतिक, सामाजिक मुद्दों और चुनावी रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है. कार्यक्रम की शुरुआत असम के मशहूर सिंगर जुबिन गर्ग को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि देकर गई. इसके साथ ही पहला सेशन पर ही उनके जीवन से जु़ड़े अनछुए पहलुओं की बातचीत पर आधारित रहा. इस मौके पर जुबिन गर्ग की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ने इस घटना के छह महीने बाद पहली बार इस बारे में बात की. इस दौरान बात करते हुए गरिमा कई मौकों पर काफी भावुक नजर आईं. उन्होंने जुबिन गर्ग से पहली मुलाकात से लेकर उनके जीवन में क्या डर हावी रहा, इस बारे में बात की.

Advertisement

30 साल के साथ की यादें
गरिमा सैकिया गर्ग ने अपनी बात शुरू करने से पहले पंचायत आजतक असम के इस मंच को धन्यवाद किया. उन्होंने कहा- यह 19 सितंबर के घटना के बाद पहली बार है जब मैं कहीं पब्लिकली बाहर आई हूं. जुबिन और मेरा साथ 30 साल का रहा और इस 30 साल में हमने हर लम्हे को साथ जिया, साथ ही हर पल को महसूस किया और मेरे लिए आज वो सारी बातें यादें बन चुकी हैं. 

पहली बार कहां मिले थे जुबिन गर्ग और गरिमा
मैंने उन्हें पहली बार मेरे हॉस्टल में देखा था. 11 सितंबर 1995 का दिन था. हालांकि उनसे पहली मुलाकात से पहले 'अनामिका और माया' अल्बम रिलीज हो चुके थे. इससे पहले मैंने उनका इंटरव्यू पढ़ा था, वहां उनका एड्रेस और पिन नंबर था. मैंने उन्हें लेटर लिखा. उनके जोरहाट वाले घर मेरा लेटर पहुंचा.  एक दिन वह रिकॉरिंड खत्म करके मेरे हॉस्टल में मिलने आए.  11 सितंबर 1995 से सितंबर 2025 तक 30 साल हमने साथ गुजारे. वह मेरे दोस्त थे, फर हम लवर हुए और फिर पति-पत्नी भी बने, ये 30 साल हमारे लिए अनमोल बन गए. 

Advertisement

'बच्चों की तरह निश्छल थे जुबिन गर्ग'
जुबिन के भीतर हमेशा से एक अबोध, निश्चल बच्चा रहता था. जब से मैं उनसे मिली थी. वह हमेशा अपने बचपने में रहते थे. मैं पहले दिन भी जिस 22 साल के लड़के से मिली थी उसके भीतर भी एक बच्चा था और अपने आखिरी वक्त उनके भीतर का वो बच्चा जिंदा रहा. उनकी फैन फॉलोइंग पहले से ही थी, लेकिन शादी के बाद मैंने उनके स्टारडम को बड़े करीब से देखा. लेकिन वह घर में बहुत नॉर्मल बहुत ही साधारण रहते थे. बल्कि बाहर भी लोगों से वह बहुत विनम्रता और गर्मजोशी से मिलते थे.  इसी खुलकर रहने और बोलने में कई बार विवाद भी हो जाते थे. कंट्रोवर्सी होती थी. गरिमा कहती हैं कि उन विवादों पर हम घर में बात करते थे.

मैं उन्हें समझाती थी कि कभी-कभी बिना बोले भी कुछ बातें छोड़ी जा सकती है, क्योंकि लोग आपको सुनते हैं फ़ॉलो करते हैं. इसलिए स्टेज पर या पब्लिक के सामने सोच-समझकर बोलना चाहिए. तब वो (यानी जुबिन) बोलते थे कि स्टेज मेरे लिए घर की तरह है. जैसे मैं घर पर रहता हूं वैसे ही स्टेज पर लोगों के बीच लोगों के साथ बोल सकता हूं. वो मेरे अपने हैं तो उनके सामने क्या छिपाऊं. उन्होंने कहा- जुबिन गर्ग को सुपर हीरोज बहुत पसंद थे.

Advertisement

वह हमेशा बच्चों के तरह थे. उन्हें सुपरहीरोज बहुत पसंद थे. वैसे ही जैसे बच्चों का होता है. 'मुझे याद है कि साल 2002 के किस समय की एक बात है. एक बार हमने साथ में स्पाइडर मैन देखी और अगले दिन उन्होंने क्या किया कि टेबल, चेयर और सोफे सब आस-पास लगाए और उन पर कूद-फांदकर चलने लगे. मतलब ऐसे कि उन्हें स्पाइडर मैन की तरह जमीन पर पांव नहीं रखने हैं.' मैं ये देखकर खूब हंसी. जुबिन गर्ग का जीवन ऐसी ही अचरज और खूबसूरत बातों से भरा जाए, इन पर बात करते चलें तो न जाने कितना समय बीत जाए.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement