असम के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल इन दिनों असम के डिब्रूगढ़ जिले में डेरा डाले हुए हैं. विधानसभा चुनाव का समय है, इसलिए सभी बड़े नेता राज्य में जोर-शोर से प्रचार में जुटे हैं. मैंने उनके कार्यालय में फोन कर अनुरोध किया कि मैं उनके चुनाव प्रचार को कवर करना चाहता हूं और असम की राजनीति व चुनावी माहौल पर उनका इंटरव्यू भी करना चाहता हूं. कुछ देर बाद उनके कार्यालय से कॉल आया और बताया गया कि अगली सुबह 8 बजे केंद्रीय मंत्री अपने घर से निकलेंगे और हेलिकॉप्टर से पहले उस स्थान पर जाएंगे जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बड़ी रैली होनी है.
इसके बाद वे वहीं से हेलिकॉप्टर द्वारा जोरहाट में एक जनसभा को संबोधित करने जाएंगे.अगले दिन की योजना बनाकर मैं होटल लौट आया और आराम किया. सुबह 6:30 बजे उठकर जल्दी-जल्दी तैयार हुआ और 7:30 बजे तक होटल से निकल गया. उस समय तेज बारिश हो रही थी और हवाएं भी काफी तेज चल रही थीं. मन में सवाल उठा कि क्या ऐसे मौसम में हेलिकॉप्टर उड़ पाएगा? तभी अचानक सोनोवाल के एक सहयोगी का फोन आया और उन्होंने कहा कि आप जल्दी पहुंचिए, क्योंकि संभव है कि चॉपर न उड़ पाए और उन्हें सड़क मार्ग से जाना पड़े. यह सुनते ही हम तुरंत निकल पड़े.
होटल से उनका घर करीब 12 मिनट की दूरी पर था, लेकिन भारी बारिश और खराब रास्ते की वजह से यह सफर 15 मिनट में पूरा हुआ. इन 15 मिनटों के दौरान उनके सहयोगी का कई बार फोन आया, यह जानने के लिए कि हम कहां तक पहुंचे हैं. जैसे ही हम वहां पहुंचे, देखा कि उनके सहयोगी गेट पर ही खड़े होकर हमारा इंतजार कर रहे थे. उन्होंने कहा कि आप अपना कैमरा सेट कर लीजिए, मंत्री जी अभी पूजा कर रहे हैं और उसके तुरंत बाद निकलेंगे. मैंने कहा कि अगर वे पूजा कर रहे हैं तो हम उसे भी रिकॉर्ड कर सकते हैं. यह कहते ही हमें अंदर ले जाया गया, लेकिन जैसे ही हम अंदर पहुंचे, तभी सर्बानंद सोनोवाल 'जय श्री कृष्ण' कहते हुए घर से बाहर आए और बोले 'चलो.'
इसके बाद उनके सहयोगी ने मुझे उनके साथ गाड़ी में बैठने के लिए कहा ताकि मैं चलते-चलते ही उनका इंटरव्यू रिकॉर्ड कर सकूं. मैं और केंद्रीय मंत्री पीछे की सीट पर बैठ गए, जबकि मेरे सहयोगी कैमरामैन अंकित सिंह को आगे कैमरा सेट करने में थोड़ा समय लग गया. कुछ देर बाद गाड़ी आगे बढ़ी और इंटरव्यू शुरू हो गया. हमने असम की राजनीति, ईरान युद्ध और शिपिंग मंत्रालय के कामकाज जैसे मुद्दों पर चर्चा की. गाड़ी करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी, जिससे कैमरा थोड़ा हिल रहा था और फ्रेम बार-बार बिगड़ रहा था. बावजूद इसके किसी तरह इंटरव्यू रिकॉर्ड हो गया. करीब डेढ़ घंटे बाद हम गोगामुख पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री मोदी की बड़ी रैली आयोजित थी. रास्ते भर भारी संख्या में महिलाएं और युवा समर्थक पारंपरिक परिधानों में नजर आए.
प्रधानमंत्री की जनसभा लगभग 3 घंटे तक चली, पीएम मोदी की रैली खत्म होने के बाद सरबानंद सोनोवाल अपने एक समर्थक के घर पहुंचे. उन्हें देखने के लिए वहां काफी भीड़ उमड़ पड़ी. आसपास के लोग भी उनसे मिलने और हाथ मिलाने के लिए समर्थक के घर के बाहर इकट्ठा हो गए. माहौल बिल्कुल चुनावी उत्साह से भरा हुआ था. इसी बीच, समर्थकों ने सरबानंद सोनोवाल से आग्रह किया कि वह उनके घर पर ही भोजन करें. कई वर्षों से बीजेपी को कवर करते हुए मैंने एक बात बहुत करीब से देखी है, बीजेपी की यह एक खास परंपरा रही है कि जब भी कोई बड़ा नेता या पार्टी कार्यकर्ता अपने घर से दूर किसी दूसरे इलाके में प्रचार के लिए जाता है, तो वह किसी होटल या रेस्तरां में भोजन करने के बजाय पार्टी कार्यकर्ता या समर्थक के घर पर ही भोजन करना पसंद करता है.
शायद इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री सरबानंद सोनोवाल भी अपने एक कार्यकर्ता के घर पर भोजन करने के लिए बैठ गए. हमें भी उस कार्यकर्ता ने भोजन के लिए आमंत्रित किया. हाथ धोने के बाद मैं और मेरे सहयोगी अंकित सिंह भी केंद्रीय मंत्री के साथ ही भोजन के लिए बैठ गए. जब थाली हमारे सामने सजाई गई तो एक पल के लिए मन में यह सवाल जरूर आया कि कहीं खाने में नॉन-वेज तो नहीं है.
क्योंकि असम और खासतौर पर नॉर्थ-ईस्ट के कई इलाकों में लोग मछली और चावल बेहद पसंद करते हैं. और चूंकि मैं पूरी तरह शुद्ध शाकाहारी हूं, इसलिए मैंने विनम्रता से उनसे अनुरोध किया कि मुझे बिना मछली और चिकन वाला भोजन दिया जाए.
इसके बाद हमारे लिए चावल, दाल, एक हरी सब्जी, हरी चटनी, नींबू, पनीर की सब्जी और मिठाई परोसी गई. सुबह से लगातार काम करते-करते जब आखिरकार इतना स्वादिष्ट घर का बना खाना मिला तो मन को एक अलग ही सुकून मिला. करीब आधे घंटे में हमने भोजन किया और उसके बाद बीजेपी समर्थक को धन्यवाद करके वहां से रवाना हो गए.
1 बजे के आस पास वापस डिब्रूगढ़ के लिए निकल गए. वहां पहुंचते-पहुंचते 3 बज गए. एक पुलिस ग्राउंड में हेलिकॉप्टर तैयार था, लेकिन खराब मौसम के कारण उड़ान की अनुमति नहीं मिली. करीब 3:30 बजे मौसम थोड़ा साफ हुआ और उड़ान की इजाजत मिल गई. इसके बाद मैं, मेरे सहयोगी अंकित सिंह, सरबानंद सोनोवाल और उनके एक सहयोगी, हम चारों हेलिकॉप्टर में सवार हुए और कुछ ही मिनटों में टेकऑफ कर लिया. हमें बताया गया कि जोरहाट पहुंचने में करीब 20 मिनट लगेंगे. इस दौरान हमने इंटरव्यू जारी रखा.
सोनोवाल ने कहा कि बीजेपी फिर से सत्ता में लौटेगी, क्योंकि सरकार ने असम की तस्वीर बदल दी है. उन्होंने विकास, कानून-व्यवस्था और अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दों पर सरकार के काम को गिनाया. शिपिंग मंत्री के तौर पर उन्होंने बताया कि ईरान युद्ध के कारण फंसे भारतीय जहाजों और नाविकों से लगातार संपर्क रखा जा रहा है और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के प्रयास जारी हैं. साथ ही सरकार ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के अलावा वैकल्पिक रास्ते भी तलाश लिए हैं.
इंटरव्यू खत्म होते ही कुछ ही मिनटों में हमारा हेलिकॉप्टर जोरहाट एयरपोर्ट पर उतर गया. वहां बताया गया कि शाम 5 बजे के बाद उड़ान संभव नहीं होगी, इसलिए समय की कमी साफ दिख रही थी. एयरपोर्ट से रैली स्थल तक पहुंचने में करीब आधा घंटा लगा. जैसे ही हम सभा में पहुंचे, सर्बानंद सोनोवाल के समर्थन में नारे गूंजने लगे. बड़ी संख्या में महिला समर्थक मौजूद थीं. उनका स्वागत फूलों की बड़ी माला पहनाकर किया गया और कुछ ही देर में उन्होंने भाषण शुरू कर दिया.
इसी दौरान मेरी नजर एक 26-28 वर्षीय महिला पर पड़ी, जो कुर्सी न मिलने के कारण किनारे खड़ी होकर भाषण सुन रही थी. एक हाथ में बच्चा था और दूसरे हाथ से वह मोबाइल पर वीडियो बना रही थी. जैसे ही मैं उसके पास पहुंचा, वह झिझक कर पीछे हट गई. फिर मैंने एक अन्य महिला से बात की, जिनका नाम जयंती था. उन्होंने बताया कि वे पिछले तीन घंटे से सभा में बैठी हैं और इस बार बीजेपी की सरकार बनने को लेकर आश्वस्त हैं. उनका कहना था कि बीजेपी और कांग्रेस सरकार में सबसे बड़ा फर्क रोजगार और सुरक्षा का है.
उन्होंने बताया कि पहले नौकरी के लिए घूस देनी पड़ती थी, लेकिन अब प्रक्रिया आसान हो गई है. उनकी बेटी को हाल ही में ग्रेजुएशन के बाद नौकरी भी मिल गई. इसके बाद मेरी मुलाकात एक 72 वर्षीय बुजुर्ग से हुई, जो सभा में सबसे पीछे बैठे थे. उन्होंने बताया कि वे 10 किलोमीटर दूर से आए हैं और देर होने के कारण पीछे बैठना पड़ा. उनका कहना था कि बीजेपी सरकार ने उन्हें सुरक्षा का एहसास कराया है, पहले डर के कारण जंगलों में रहना पड़ता था, लेकिन अब वे खुलकर जीवन जी पा रहे हैं.
कुछ देर बाद सभा समाप्त हुई और सर्बानंद सोनोवाल वहां से निकल गए. देर हो चुकी थी, इसलिए हेलिकॉप्टर से लौटना संभव नहीं था और हमें सड़क मार्ग से डिब्रूगढ़ लौटना पड़ा. जो दूरी हेलिकॉप्टर से 20 मिनट में तय हुई थी, वही सड़क मार्ग से करीब 4 घंटे में पूरी हुई और रात लगभग 10 बजे हम वापस डिब्रूगढ़ पहुंच गए.
पीयूष मिश्रा