केंद्रीय बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार शिक्षा, रोजगार और उद्योग से जुड़े अहम ऐलान किए, जिनका सीधा असर देश के युवाओं, MSMEs और डिजाइन सेक्टर पर पड़ेगा. उनका पूरा फोकस ऐसे मॉडल पर रहा जहां शिक्षा और उद्योग एक-दूसरे के पूरक बनकर भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार हों.
वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब्स के पास पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप स्थापित करने का प्रस्ताव लेकर आई है. इन टाउनशिप में एक ही परिसर में कई विश्वविद्यालय, कॉलेज, रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर और रहने की सुविधाएं होंगी. इस मॉडल का उद्देश्य है कि उद्योगों के करीब ही स्किल्ड टैलेंट का एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित हो सके, जिससे युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उद्योगों को प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स उपलब्ध हों. इस कदम को शिक्षा और इंडस्ट्री के बीच की दूरी कम करने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.
तैयार होंगे कॉरपोरेट मित्र
इसके साथ ही सरकार ने एक और महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की. प्रोफेशनल संस्थानों-ICAI, ICSI और ICMAI की मदद से शॉर्ट-टर्म मॉड्यूलर कोर्स और व्यावहारिक टूल्स तैयार किए जाएंगे. इसका लक्ष्य टियर-2 और टियर-3 शहरों में प्रशिक्षित 'कॉरपोरेट मित्र' की एक नई कैडर तैयार करना है.
इन 'कॉरपोरेट मित्रों' को पैराप्रोफेशनल्स के रूप में मान्यता दी जाएगी, जो छोटे और मध्यम उद्योगों यानी MSMEs को कम लागत में अनुपालन पूरा करने में सहायता करेंगे. अभी MSMEs के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को समझना मुश्किल और महंगा साबित होता है. ऐसे में यह नई कैडर उन्हें किफायती, आसान और भरोसेमंद सपोर्ट देने के लिए तैयार की जाएगी.
ऐसे काम करेगी 'कॉरपोरेट मित्र' योजना
बजट में किए गए ये दोनों ऐलान शिक्षा, उद्योग और रोजगार तीनों क्षेत्रों को जोड़ते हुए एक बड़े विजन को सामने रखते हैं. एक ओर जहां यूनिवर्सिटी टाउनशिप भविष्य की पढ़ाई और शोध को इंडस्ट्री से जोड़ेगी, वहीं 'कॉरपोरेट मित्र' योजना छोटे उद्योगों को मजबूत बनाकर विकास की गति को तेज करेगी.
आत्मनिर्भर भारत निधि में 2,000 करोड़ रुपये के टॉप-अप का प्रस्ताव रखा गया है. सरकार का फोकस टियर-2 और टियर-3 शहरों में बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने पर रहेगा. पिछले दशक में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश पर लगातार ध्यान दिया है, और यही रफ्तार आगे भी जारी रखने की मंशा दिख रही है. पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में इंफ्रा विकास को और तेज़ किया जाएगा. वहीं 2026-27 के लिए सरकार ने पूंजीगत खर्च को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे देश में बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी.
aajtak.in