देशभर में NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों में भारी निराशा और आक्रोश देखने को मिल रहा है. पेपर लीक विवाद के बीच मेडिकल अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने महीनों तक दिन-रात मेहनत की, बीमारी में भी क्लास नहीं छोड़ी, लेकिन सिस्टम की लापरवाही ने उनका पूरा साल दांव पर लगा दिया.
कई छात्रों ने मांग उठाई कि अब मेडिकल प्रवेश परीक्षा को भी JEE की तरह पूरी तरह ऑनलाइन कराया जाए, ताकि पेपर लीक और गड़बड़ियों पर रोक लग सके. छात्रों का कहना है कि ऑफलाइन परीक्षा में प्रश्नपत्र की सुरक्षा बनाए रखना मुश्किल हो रहा है, जबकि ऑनलाइन परीक्षा ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी हो सकती है.
कोटा समेत देश के कई कोचिंग हब में पढ़ रहे विद्यार्थियों ने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के नाम पर सख्ती की जाती है. छात्राओं से मंगलसूत्र तक उतरवाए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद पेपर लीक हो जाना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है.
छात्रों ने बताया कि NEET केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि उनके कई वर्षों की मेहनत, परिवार की उम्मीदों और आर्थिक संघर्ष से जुड़ा सपना है. अब परीक्षा रद्द होने के बाद दोबारा तैयारी का मानसिक दबाव बढ़ गया है. कई अभ्यर्थियों ने इसे 'मेंटली ट्रॉमेटिक' बताया.
विवाद उस समय बढ़ा जब कथित 'गेस पेपर' के कई सवाल असली प्रश्नपत्र से मेल खाने की बात सामने आई. जांच एजेंसियां राजस्थान समेत कई राज्यों में इसकी जांच कर रही हैं. इसके बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द कर दी और दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की. इस पूरे मामले के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच एक ही सवाल गूंज रहा है- आखिर देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में बार-बार पेपर लीक कैसे हो रहा है और मेहनत करने वाले छात्रों को इसकी सजा कब तक मिलती रहेगी?
चेतन गुर्जर