मुस्कान ने ब‍िना कोचिंग क्रैक किया UPSC, ऐसे 8 से 12 घंटे की सेल्फ स्टडी से पाई सक्सेस

देश में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए बड़े कोचिंग संस्थानों का एक बड़ा बाजार खड़ा हो चुका है. हजारों छात्र महंगी कोचिंग लेकर तैयारी करते हैं, लेकिन इसके बावजूद सफलता सभी को नहीं मिलती. ऐसे माहौल में एक छात्रा ने बिना किसी कोचिंग के UPSC परीक्षा पास कर मिसाल पेश की है.

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बिना कोचिंग बनी अफसर, मुस्कान की सफलता बनी मिसाल बिना कोचिंग बनी अफसर, मुस्कान की सफलता बनी मिसाल

मनीष चौरसिया

  • नई दिल्ली ,
  • 09 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:40 PM IST

यूपीएससी जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में सफलता हासिल करना हर किसी का सपना होता है, लेकिन इसके लिए सालों की मेहनत और सही स्ट्रेटजी की जरूरत होती है. ग्रेटर नोएडा के एक छोटे से गांव की बेटी ने बिना किसी कोचिंग के सिर्फ सेल्फ स्टडी के दम पर यूपीएससी परीक्षा पास कर ये साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता जरूर मिलती है.

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ग्रेटर नोएडा की रहने वाली मुस्कान वर्मा ने सेल्फ-स्टडी के सहारे UPSC परीक्षा पास कर अपने परिवार और इलाके का नाम रोशन किया है. सफलता की खबर आते ही उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया. घर में मिठाइयों के डिब्बे और गुलदस्ते नजर आ रहे हैं और आस-पड़ोस के लोग लगातार उन्हें बधाई देने पहुंच रहे हैं.

कोचिंग के पैसे नहीं थे, इसलिए खुद बनाई राह

मुस्कान बताती हैं कि उन्होंने ग्रेजुएशन के बाद UPSC की तैयारी शुरू की लेकिन कोचिंग की फीस काफी ज्यादा होने के कारण उन्होंने सेल्फ-स्टडी का रास्ता चुना.

उनके मुताबिक जब मैंने तैयारी शुरू की तब कोचिंग लेने के लिए इतने साधन नहीं थे. इसलिए मैंने एनसीईआरटी की किताबों से बेसिक मजबूत किया और जरूरी स्टडी मटीरियल खुद जुटाकर पढ़ाई शुरू कर दी.

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रोज 8 से 12 घंटे की पढ़ाई

तैयारी के दौरान मुस्कान रोजाना औसतन आठ घंटे पढ़ाई करती थीं. प्रीलिम्स पास होने के बाद मेन्स की तैयारी के समय यह समय बढ़कर 10 से 12 घंटे तक पहुंच जाता था. वो बताती हैं कि इस परीक्षा में सबसे जरूरी चीज लगातार पढ़ाई की आदत है. कोई छुट्टी नहीं होती थी. लगातार पढ़ना पड़ता है, तभी उसका रिजल्ट मिलता है. 

क्या थी मुस्कान की प्रीलिम्स की स्ट्रेटजी 

मुस्कान के अनुसार प्रीलिम्स परीक्षा के लिए उन्होंने स्टैटिक हिस्से पर ज्यादा ध्यान दिया.  उनकी स्ट्रेटजी में रोजाना अलग-अलग विषयों की रिविजन, प्रैक्टिस क्वेश्चन हल करना, नियमित टेस्ट देना, मेन्स में हर दूसरे दिन टेस्ट शामिल था. मेन्स परीक्षा की तैयारी में मुस्कान ने लिखने की प्रैक्टिस पर खास ध्यान दिया.

वो कहती हैं कि हम बहुत कुछ पढ़ लेते हैं, लेकिन जब लिखने बैठते हैं तो सब कुछ पेपर पर नहीं आ पाता. इसलिए मैंने मेन्स के दौरान लगभग हर दूसरे दिन टेस्ट लिखा. इससे बहुत मदद मिली. 

दोस्तों के साथ किया मॉक इंटरव्यू

इंटरव्यू की तैयारी के लिए मुस्कान और उनके कुछ दोस्त साथ बैठकर एक-दूसरे के मॉक इंटरव्यू लेते थे और फीडबैक देते थे. उनका मानना है कि पढ़ाई के साथ-साथ जो सीखा है उसे लागू करना भी उतना ही जरूरी है.  मुस्कान का पहला प्रयास 2023 में था और दूसरा 2024 में, लेकिन दोनों बार वह प्रीलिम्स पास नहीं कर सकीं.

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वह बताती हैं कि उस समय अपनी स्ट्रेटजी को लेकर संदेह जरूर हुआ, लेकिन उन्होंने पढ़ाई जारी रखी. साल 2025 में मेरा प्रीलिम्स अच्छे नंबरों से निकल गया. उसके बाद मेन्स और इंटरव्यू भी उसी प्रयास में क्लियर हो गया. 

परिवार का मिला पूरा साथ

तैयारी के दौरान मुस्कान का ज्यादातर समय पढ़ाई में बीतता था. दोस्तों से मिलना-जुलना भी काफी कम हो गया था. हालांकि परिवार का पूरा सहयोग मिला. खाली समय में वो पेंटिंग करती थीं या घरवालों के साथ समय बिताकर खुद को तरोताजा करती थीं.

मुस्कान का कहना है कि आज डिजिटल माध्यमों की वजह से पढ़ाई के कई संसाधन ऑनलाइन उपलब्ध हैं. उनके मुताबिक अगर किसी में फोकस और मेहनत है तो वह घर बैठकर भी तैयारी कर सकता है. कोचिंग जरूरी नहीं है.

सोशल मीडिया से बनाई दूरी

तैयारी के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया से लगभग दूरी बना ली थी हालांकि यूट्यूब पर लेक्चर और स्टडी मटीरियल देखकर उन्होंने तैयारी में मदद ली. मुस्कान का रिजल्ट आने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है. उनके पिता बताते हैं कि जब रिजल्ट देखा तो कुछ समय तक समझ ही नहीं आया कि कैसे प्रतिक्रिया दें. उन्होंने कहा कि इतनी खुशी थी कि कुछ पल के लिए शब्द ही नहीं मिले.

मुस्कान की सफलता उन छात्रों के लिए खास प्रेरणा मानी जा रही है जो महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते. उनका संदेश है कि इस परीक्षा में सबसे जरूरी चीज लगातार मेहनत और धैर्य है. मुस्कान ने कहा कि असफलता आती है, लेकिन मेहनत जारी रखनी चाहिए. अगर इस साल नहीं हुआ तो अगले साल जरूर होगा.
 

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