CBSE की नई डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम ऑन स्क्रीन मार्किंग बोर्ड के लिए ही फजीहत साबित हो गई है. कक्षा 12वीं का रिजल्ट जारी होने के बाद से इसे लेकर विवाद सामने आ रहे हैं. पहले आंसर शीट में गड़बड़ी, स्कैनिंग में परेशानी, नंबरों को लेकर खींचा-तानी और पहले से उठ रहे तकनीकी मुद्दों के बाद बोर्ड जांच के दायरे में आ गया है. अब एक और खुलासा किया जा रहा है. दावा है कि करीब 13000 छात्रों की कॉपियों की जांच मैन्युअल तरीके से की गई है. वहीं, 20 ऐसे छात्र हैं जिनकी कॉपी दूसरे छात्रों की आंसर शीट से बदल गई है.
वेदांत के मामले ने पकड़ी रफ्तार
आंसर शीट बदलने को मामला सबसे पहला वेदांत का था. वेदांत ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि पुनर्मूल्यांकन के दौरान दी गई फिजिक्स की आंसर शीट उनकी नहीं थी. इसके बाद से एक अन्य छात्रा संजना ने भी इसी तरह की समस्या की शिकायत की. स्कैनिंग प्रक्रिया के दौरान उत्तरों में गड़बड़ी हुई और शिकायत मिलने के बाद बोर्ड ने छात्रों से संपर्क कर उन्हें सही आंसर शीट उपलब्ध कराने का विश्वास दिलाया.
क्यों करनी पड़ी मैन्युअल कॉपी चेक
बता दें कि इस साल से कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए ओएसएम सिस्टम शुरू किया गया है. नए सिस्टम के तहत आंसर शीट को स्कैन करके डिजिटल रूप से कॉपियों की जांच की गई. वहीं, ऐसा दावा किया गया कि लगभग 68,000 आंसर शीट में स्कैनिंग की गुणवत्ता से जुड़ी परेशानी पाई गई जिसे बाद में दोबारा स्कैन करना पड़ा, लेकिन दोबारा स्कैन करने के बाद भी 13,000 से ज्यादा कॉपियां निर्धारित मानकों को पूरा करने में सफल नहीं हो पाई, इसलिए उनकी मैन्युअल रूप से जांच करनी पड़ी.
आज से खुल गया पोर्टल
सीबीएसई के इस OSM विवाद का असर रिजल्ट के बाद भी दिखाई दिया. हालांकि, इसे लेकर बोर्ड ने पहले कक्षा 12वीं के वेरिफिकेशन और पुनर्मूल्यांकन पोर्टल 29 मई से खोलने को कहा था, लेकिन बाद में उसे 1 जून कर दिया. बोर्ड को बड़ी संख्या में आवेदन मिलने की उम्मीद है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई कॉपियों के लिए 4 लाख से अधिक रिक्वेस्ट प्राप्त हुए थे और अब ये सभी छात्र वेरिफिकेशन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं.
आजतक एजुकेशन डेस्क