CBSE 12th Result: क्यों कम आए बच्चों के नंबर? बोर्ड ने बताया 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' का डेटा

सीबीएसई ने 2026 की 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली लागू की, जिससे तकनीकी खामियों और खराब स्कैनिंग के कारण छात्रों के नंबर कम हो गए. लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल जांच में कई कॉपियां रिजेक्ट हुईं और अंतिम समय में कुछ को मैन्युअल जांचना पड़ा.

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डिजिटल चेकिंग के फेर में फंसे छात्र? कड़े नियमों से साइंस-कॉमर्स के कट-ऑफ गिरे डिजिटल चेकिंग के फेर में फंसे छात्र? कड़े नियमों से साइंस-कॉमर्स के कट-ऑफ गिरे

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 17 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:18 PM IST

सीबीएसई (CBSE) 12वीं के परिणाम आने के बाद से देशभर के छात्रों और अभिभावकों के बीच मचे हाहाकार के पीछे की 'असली इनसाइड स्टोरी' अब सामने आ गई है. छात्र लगातार शिकायत कर रहे थे कि इस बार नंबर उम्मीद से बहुत कम आए हैं, यहां तक कि जेईई-मेन्स (JEE-Mains) में 95 परसेंटाइल से ऊपर स्कोर करने वाले छात्र भी बोर्ड परीक्षा में पिछड़ गए हैं. सीबीएसई की ओर से भेजे गए आंतरिक सरकारी दस्तावेजों और पिछले 3 सालों के 'ग्रेड कट-ऑफ' डेटा ने साफ कर दिया है कि इस साल बोर्ड द्वारा लागू की गई नई डिजिटल चेकिंग 'प्रणाली' यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) ने पूरे खेल को बदल दिया है.

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दस्तावेजों के मुताबिक इस साल कुल 98,66,222 उत्तर पुस्तिकाओं (आंसर बुक्स) की डिजिटल स्कैनिंग कर कंप्यूटर पर चेकिंग कराई गई थी. लेकिन इस प्रक्रिया में आई तकनीकी कमियों, कड़क मार्किंग और कॉपियों की खराब स्कैनिंग ने छात्रों के नंबरों पर सीधे कैंची चला दी.

क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) और कैसे बिगड़ी बात?
सीबीएसई ने कॉपियों के मूल्यांकन में पारदर्शिता लाने, टोटलिंग की गलतियों को खत्म करने और तेजी से रिजल्ट देने के लिए साल 2026 की 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) को दोबारा लागू किया. इससे पहले साल 2014 में भी बोर्ड ने इसे आजमाया था, लेकिन तब स्कैनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों के चलते इसे रोक दिया गया था.

इस साल इस नई 'प्रणाली' को शुरू करने में शुरुआती दौर से ही बड़ी मुश्किलें आईं:

धड़ाधड़ रिजेक्ट हुईं कॉपियां: चेकिंग के दौरान स्कैनिंग की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि खुद जांचने वाले शिक्षकों (इवैल्यूएटर्स) ने 68,018 कॉपियों को रिजेक्ट कर दिया, जिन्हें दोबारा स्कैन करना पड़ा.

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लास्ट मिनट में हाथ से जांचनी पड़ीं कॉपियां: हद तो तब हो गई जब रिजल्ट घोषित होने की तारीख (9 मई के आसपास) तक 13,583 कॉपियां ऐसी थीं, जिनकी स्कैनिंग क्वालिटी इतनी खराब थी कि कंप्यूटर पर उन्हें पढ़ना नामुमकिन था. छात्रों के बढ़ते तनाव को देखते हुए आनन-फानन में इन कॉपियों को ऑफलाइन (मैन्युअल तरीके से) जांचना पड़ा और फिर उनके नंबर अपडेट किए गए.

शॉर्ट-कट अपनाने वालों को नुकसान: डिजिटल चेकिंग में शिक्षक 'मार्किंग स्कीम' से पूरी तरह बंधे हुए थे. जिन छात्रों ने प्रश्नों के उत्तर में शॉर्ट-कट या किसी अलग तरीके का इस्तेमाल किया था, उनके नंबर सीधे कट गए, क्योंकि कंप्यूटर पर केवल 'स्टेप-वाइज मार्किंग' के ही कड़े निर्देश थे.

पीडीएफ में देखें डेटा 

 

 

डेटा की डबल चेकिंग: साइंस और कॉमर्स के कट-ऑफ गिरे, ह्यूमैनिटीज में सुधार
आधिकारिक 3 साल के डेटा (2024 से 2026) का विश्लेषण करने पर साफ होता है कि इस डिजिटल चेकिंग की सबसे बड़ी गाज मैथ्स, फिजिक्स, केमिस्ट्री और अकाउंटेंसी के छात्रों पर गिरी है. इन विषयों में टॉप 'A1' और 'A2' ग्रेड पाने के लिए जरूरी न्यूनतम नंबर (Lower-level cut-offs) पिछले सालों की तुलना में 1 से 3 नंबर तक नीचे गिर गए हैं.

विषयवार कट-ऑफ का पूरा गणित

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मैथ्स (MATH - 041): साल 2024 में टॉप A1 ग्रेड के लिए न्यूनतम 88 नंबर चाहिए थे, जो 2025 में 86 हुए और इस साल (2026) घटकर 85 नंबर पर आ गए. यानी बच्चों के लिए ज्यादा नंबर लाना मुश्किल हुआ.

फिजिक्स (PHYSICS - 042): साल 2024 में A1 ग्रेड का कट-ऑफ 84 नंबर था, जो 2025 में 82 हुआ और इस साल भारी गिरावट के साथ 79 नंबर पर सिमट गया. वहीं A2 ग्रेड का कट-ऑफ भी 75 (2024) से गिरकर 71 नंबर (2026) पर आ गया.

केमिस्ट्री (CHEMISTRY - 043): साल 2024 में A1 के लिए 92 नंबर चाहिए थे, जो 2025 में 89 और इस बार गिरकर 87 नंबर रह गए.

अकाउंटेंसी (ACCOUNTANCY - 055): कॉमर्स के इस मुख्य विषय में साल 2024 में A1 ग्रेड के लिए न्यूनतम 93 नंबर की जरूरत थी, जो इस साल (2026) घटकर सीधे 89 नंबर पर आ गई.

इसके विपरीत, ह्यूमैनिटीज (कला वर्ग) और इंग्लिश में कट-ऑफ बढ़े हैं:

पॉलिटिकल साइंस (028): 2024 में A1 का कट-ऑफ 89 था, जो 2025 में 77 तक गिरा, लेकिन इस साल बढ़कर 89 नंबर हो गया.

हिस्ट्री (027): 2024 और 2025 में A1 का कट-ऑफ 86 था, जो इस बार सुधरकर 87 नंबर हो गया.

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इंग्लिश कोर (301): पिछले तीन सालों से A1 ग्रेड का कट-ऑफ 92 नंबर पर स्थिर बना हुआ है.

इस पूरे विवाद और बच्चों व अभिभावकों के बढ़ते गुस्से के बाद सीबीएसई ने माना है कि वह छात्रों की इस मानसिक परेशानी और चिंता को समझता है. बोर्ड ने छात्रों को इस संशय से बाहर निकालने के लिए पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूशन) की त्रि-स्तरीय प्रक्रिया शुरू की है:

स्कैन कॉपी: छात्र सबसे पहले अपने संबंधित विषय की जांची हुई उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी पाने के लिए आवेदन करेंगे.

मिलान की सुविधा: छात्र वेबसाइट पर मौजूद सीबीएसई के सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स की ऑफिशियल 'मार्किंग स्कीम' से अपनी कॉपी का खुद मिलान कर सकेंगे.

सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी: अगर छात्र को कोई गड़बड़ी मिलती है, तो वह अपनी आपत्तियां दर्ज कराएगा, जिसके बाद विषय विशेषज्ञों की एक कमेटी तथ्यों के आधार पर अंतिम फैसला लेगी.

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