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हिंदू धर्म अपनाने वाली US की वो सांसद, जो लड़ेंगी US राष्ट्रपति चुनाव

मानसी मिश्रा
  • 22 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 3:20 PM IST
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अमेरिकी संसद में पहली हिंदू सांसद चुनी गई तुलसी गबार्ड इन दिनों फिर चर्चा में हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाउडी मोदी कार्यक्रम में शामिल न हो पाने को लेकर अमेरिकी सांसद तुलसी गबार्ड ने सफाई दी है. तुलसी ने कहा कि उनके द्वारा मोदी से मुलाकात करने से मना कर देने की खबर गलत है. वे 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, आजकल उसी के प्रचार में बिजी हैं. जानें, तुलसी गबार्ड के बारे में, जिन्होंने अपनाया है हिंदू धर्म.

फोटो: पीएम मोदी के साथ तुलसी गबार्ड
Image Credit: Tulsi Gabbard

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तुलसी गबार्ड ने साल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का दावा किया है. 37 साल की गबार्ड डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति पद की दूसरी महिला दावेदार हैं. भारतीय मूल के अमेरिकियों के बीच बेहद लोकप्रिय तुलसी हिंदू जरूर हैं, लेकिन वो भारतीय नहीं है.

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तुलसी अमेरिका के समोआ के कैथोलिक परिवार में पैदा हुई थीं. उनकी मां कॉकेशियन हैं, जिन्होंने हिंदू धर्म अपना लिया था. उस वक्त तुलसी सिर्फ दो साल की थीं, जब वो हवाई आकर रहने लगीं थीं. बाद में तुलसी ने भी हिंदू धर्म अपना लिया. वो पढ़ाई पूरी करके राजनीति में आ गईं.

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बताया जाता है कि भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों के बीच तुलसी को काफी पसंद किया जाता है. तुलसी पहली अमेरिकी सांसद हैं, जिन्होंने गीता को हाथ में लेकर शपथ ली थी. भले ही तुलसी भारतीय नहीं हैं, लेकिन उनका पूरा विश्वास हिंदू धर्म को लेकर है. अमेरिका के 50वें राज्य हवाई से लगातार जीत दर्ज करती आ रही तुलसी साल 2013 से अमेरिका के हवाई राज्य से हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट सांसद हैं.

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वो हवाई से हर बार रिकॉर्ड वोटों से जीतती हैं. राजनीति में आने से पहले तुलसी अमेरिकी सेना की ओर से 12 महीने के लिए इराक में तैनात रह चुकी हैं. तुलसी पहली सांसद हैं, यही नहीं वो प्रधानमंत्री मोदी की भी बड़ी प्रशंसक रही हैं. साल 2014 में उनकी पीएम मोदी के साथ कई तस्वीरें वायरल हुई थीं. वो कई मंचों से खुलकर उनकी तारीफ कर चुकी हैं. 

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शाकाहारी तुलसी का परिवार चैतन्य महाप्रभु के आध्यात्मिक अंदोलन गौडिया वैष्णव संप्रदाय को मानता है. उनके भाई-बहन भक्ति, जय, नारायण और वृंदावन भी हिंदू धर्म का अनुसरण करते हैं. गीता के कर्मयोग पर विश्वास करने वाली तुलसी वृंदावन में आना चाहती हैं.

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