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वर्ल्ड बैंक की नौकरी छोड़कर बनी थीं IAS, आज इस काम से बनाई पहचान

मानसी मिश्रा
  • 25 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 8:47 PM IST
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हैदराबाद में महिलाओं का एक पूरा तबका आईएएस हरि चंदना दसारी को मैडम के नाम से जानता है. इन महिलाओं की जिंदगी में इस आईएएस अफसर का रोल ही ऐसा है. साल 2018 में जीएचएमसी सेरीलिंगमपल्ली की जोनल कमिश्नर बनकर आईं इस आइएएस ने भला ऐसा क्या किया है जो महिलाएं इसे देवी से कम नहीं मानतीं. आइए, जानें इस आईएएस का पूरा सफर.

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2010 बैच की आईएएस आफिसर हरि चंदना के बारे में मजदूर रह चुकीं ममता का कहना है कि मैं पहले मजदूरी का काम करती थी. इसमें पूरे महीने इतना नहीं कमा पाती थी, लेकिन अब जूट बैग बेचकर करीब 12 हजार रुपये कमा लेती हूं.

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सिर्फ ममता ही नहीं ममता जैसी इलाके की सैकड़ों महिलाएं वेस्ट यानी कबाड़ से यूजफुल सामान बनाने वाले सेल्फ हेल्फ ग्रुप से जुड़कर कमा रही हैं. हरि चांदना ने टाइम्स आफ इंडिया को बताया कि जब मैंने पहली बार जवाहर नगर कूड़ा घर देखा तो मेरे मन में यही ख्याल आया था कि अगर इस कूड़े को रीसाइकिल किया जाए तो काफी काम आ सकता है.

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दसारी लंबे समय से कचरा प्रबंधन को लेकर आंदोलन चला रही हैं. उनके काम का असर हैदराबाद में कई जगह देखा जा सकता है. हरि चंदना कहती हैं कि रीसाइकिल प्लास्टिक से बहुत सारी चीजें बनाई जा सकती है. इससे रूफिंग शीट्स से लेकर फर्नीचर और इंटीरियर भी बनाया जा सकता है.

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हरि चंदना के प्रयास से आज 695 महिलाएं एक प्लेटफार्म पर जुड़कर एसएचजी के जरिये कूड़े कबाड़ से अच्छी अच्छी उपयोगी चीजें बनाकर कमा रही हैं. महिलाओं ने तीन कटलरी (चाकू-चम्मच आदि का सेट) बैंक भी बनाए हैं जहां से वो मार्केट से कम रेंज में कटलरी बेचती हैं.

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वर्ल्ड बैंक से भी छोड़ा जॉब
दसारी ने जरूरतमंद लोगों की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए ही वर्ल्ड बैंक और बीपी शेल की नौकरी छोड़ी थी. वो कहती हैं कि वो सिविल सर्विस में आकर ऐसे ही काम करना चाहती थीं जो उन्होंने कर दिखाया.

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दसारी ने बताया कि कई कंपनियों ने अपने सीएसआर यानी कार्पोरेट सोशल रिसपांसिबिलिटी के जरिये ग्रेटर हैदराबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) की किटी में 60 करोड़ रुपये दान किए थे. इस रकम से शहर का पहला डॉग पार्क बनाया गया. ये डॉग पार्क भी उन्हीं का आइडिया था.

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बता दें कि साल 2018 में निगम शहर भर में प्लास्टिक के दोबारा उपयोग की पहल चलाकर हरित क्रांति लाने में सफल रहा. इस परिवर्तन में जोनल कमिश्नर (पश्चिम क्षेत्र) हरी चंदना दसारी की खास भूमिका मानी जाती है.

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हैदराबाद में एक गंदे डंप यार्ड को भारत के पहले सर्टिफाइड डॉग पार्क में बदला गया है जो अंतरराष्ट्रीय मानकों पर बना है. इसके अलावा फुटपाथ बनाने के लिए प्लास्टिक कचरे का उपयोग भी बेहद खास है. दसारी इसके पीछे पर्यावरण अर्थशास्त्र में पढ़ाई करना मेन वजह बताती हैं.

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