सूरत के तक्षशिला आर्केड स्थित कोचिंग सेंटर में 24 मई को हुए अग्निकांड में अब तक 22 छात्रों की मौत हो चुकी है. इस हादसे में मौत का शिकार हुए कई छात्र-छात्राओं ने इस साल गुजरात 12वीं बोर्ड की परीक्षा दी थी. परीक्षा के परिणाम 25 मई को जारी किए गए. लेकिन किसे पता था कि स्कूल की परीक्षा में पास होने वाले ये स्टूडेंट्स जिंदगी की रेस में फेल हो जाएंगे. जहां इन परिवारों में अभी खुशी का माहौल होना चाहिए था वहीं इनके घरों में मातम पसरा हुआ है.
हादसे के वक्त कोचिंग सेंटर में 35 स्टूडेंट्स थे. सभी छात्र-छात्राएं समर कोचिंग क्लासेज के लिए बिल्डिंग की छत पर मौजूद तक्षशिला आर्केड कोचिंग सेंटर में अपनी क्लासेज ले रहे थे. इसी दौरान देखते-देखते सेंटर में आग फैल गई. खुद को बचाने के लिए बच्चे छत से नीचे कूदने लगे. इस हादसे में कुछ बच्चे अपनी जान बचाने में कामयाब रहे वहीं कुछ आकस्मिक मौत का शिकार हो गए. हादसे में बच्चों का शरीर इतनी बुरी तरह जल गया कि उनके परिवारवाले तक उन्हें पहचान नहीं पा रहे थे. बच्चों के जले शरीर के हिस्सों और उनकी निशानी से उनकी पहचान हो पाई.
ध्रुवी के पिता को अभी तक नहीं है यकीन... उनकी इकलौती बेटी दुनिया में नहीं रही.
वीनू अपनी इकलौती बेटी ध्रुती खुंट की मौत पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं. ध्रुती ने गुजरात बोर्ड की कक्षा 12वीं की परीक्षा में 53 परसेंट हासिल किए हैं. बेटी के परिणाम को दिखाते हुए उसके पिता वीनू ने कहा कि अब वे ध्रुती के रिजल्ट का क्या करेंगे. उन्हें अब सरकार से न्याय चाहिए. इस अग्निकांड में जिस किसी का भी हाथ है सरकार उन सभी को कड़ी से कड़ी सजा दे. परिवार ने सूरत म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन, दक्षिण गुजरात विज कंपनी लिमिटेड और बिल्डर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है.
शर्ट और ब्रेसलेट से की पहचान
हादसे में 12वीं के एक और छात्र निसर्ग की भी मौत हो गई. निसर्ग को उसके परिवार वालों ने उसके शरीर से चिपके शर्ट के टुकड़े और ब्रेसलेट से पहचाना. उसने 12वीं बोर्ड में 62 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं. बेटे की मौत के बाद से ही उसके माता-पिता कुछ बोल नहीं रहे हैं.
बेटी 80% के साथ हुई पास...पर पिता कैसे मनाएं खुशियां?
इस हादसे में रमेश बल्लार की बेटी रुमी भी अकाल मौत के मुंह में समां गई. आग में शरीर और चेहरा बुरी तरह जल गया था. बाद में उसके पिता ने अंगूठी और ब्रेसलेट से बेटी की पहचान की. रुमी ने 12वीं में 87.57 प्रतिशत अंक प्राप्त किए. भर्राए गले से पिता रमेश ने बेटी को नहीं बचा पाने का अफसोस जताया.
इस अग्निकांड में हितेशभाई सुरानी ने भी अपनी बेटी हस्ती को खो दिया. दो भाईयों की इकलौती बहन थी हस्ती. बेटी के रिजल्ट आने के बाद पिता ने कहा कि उन्होंने बेटी का रिजल्ट स्कूल से ले लिया है. घटनास्थल पर उन्होंने अपनी बेटी की पहचान उसकी अंगूठी से की थी.
हादसे का शिकार हुई मानसी वर्षानी के पिता प्रवीनभाई ने कहा कि उनकी आंखों के सामने सब जल रहा था लेकिन वे कुछ नहीं कर पाए. उन्होंने बताया कि सभी बच्चों की लाशें पूरी तरह जली हुई थी. उन्होंने मानसी की पहचान उसके जबड़े से गायब दो दांत से की. 12वीं गुजरात बोर्ड परीक्षा में मानसी सी1 ग्रेड से पास थी.
12वीं की एक और छात्रा यशवी केवडिया भी आज इस दुनिया में नहीं है. उसे परीक्षा में 50 परसेंट अंक मिले थे. यशवी के पिता दिनेश ने बेटी को खोने का दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने अपने घर का बहुमूल्य रत्न खो दिया है. उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है.
अवैध रूप से चल रहा था कोचिंग सेंटरसूरत के सरथाना में 20 छात्रों की जान लेने वाला अग्निकांड तक्षशिला आर्केड बिल्डिंग के उस फ्लोर पर हुआ, जो गैरकानूनी तरीके से बनाया गया था. इस फ्लोर की छत को फाइबर से बनाया गया था. फाइबर में लगी आग पर काबू पाने में मुश्किल हुई. इस मामले में सरथाना पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज हुई है.
नीचे उतरने का रास्ता था ब्लॉक
24 मई को दोपहर लगभग 3 बजे सूरत
की तक्षशिला इमारत में आग लग गई थी. इस बिल्डिंग में कई ट्रेनिंग
इंस्टीट्यूट चल रहे हैं जिसमें बच्चे पढ़ने आते हैं. आग बिल्डिंग में आने
जाने के लिए बनाई गई सीढ़ियों के पास रखे ट्रांसफॉर्मर में लगी थी. जैसे ही
आग लगी अंदर मौजूद छात्र उतरने के लिए नीचे पहुंचे. लेकिन भयानक आग की
लपटों को देखकर बच्चे और बाकी लोग चौथी मंजिल पर चले गए. वहीं आग इतनी
भयानक थी कि कई बच्चों को अपनी जान बचाने के लिए बिल्डिंग से नीचे कूदना
पड़ा.
ये हैं मरने वालों के नाम
एशा रमेश खंडेला (17), जान्हवी मतुर वसोया (17), मीत दिलीप संघानी (17), हस्ती हितेश सुरानी (18), ईशा जॉन्टी कांकड़िया (15), अंश मनसुख ठुमर (18), जान्हवी महेश वेकरिया (17), वंशवि जयेश काननि (18), कृति ध्याला (18), दृष्टि खूंट (18), रूमी बलर (17), खुशाली किरीट, कोठड़िया (17), कृष्णा सुरेश भिकडिया (22), रूद्र डोंडा (18), ऋतू संजय साकरिया , दिनेश केवलिया, ग्रीष्मा गजेरा, निसर्ग कातरोडिया , मानसी वरसानी और एक अन्य.